आतंकवादियों के महल्ले में
कवि सम्मलेन हो रहा था
हम संचालन कर रहे थे
हाल इतने बुरे थे की
हर कवि मंच पर आने में
घबरा रहा था
और श्रोता थे की
बस घूरे जा रहे थे
न हंस रहे थे
न तालियाँ बजा रहे थे
हमने कहा की भाइयों अब
तालियाँ बजाइए और
कवि सम्मलेन को उठाइए
की एक आतंकवादी श्रोता
बोला आप चुपचाप बैठ जाइये
मंच पर उठाने लायक है ही क्या ?
अब कवियत्री जी को बुलाइए ।
मेरा अनुरोध है केव्स के अपने सभी बड़े भाइयों से क्या यार इस ब्लॉग को अखाडा बना दिया है अरे कभी तो मस्ती में आते हो न । हमेशा वैसे ही रहो । परशुराम की तरह फरसा लेकर टहलना हो तो बात ही अलग है भाई लोग गरमा गरम बहस के बीच मेरी ये कविता चाय ब्रेक बने इसी आशा के साथ
हमेशा आपका ---- आशु प्रज्ञा मिश्र
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Wednesday, October 8, 2008
बात निकलेगी तो पाकिस्तान तक जाएगी...
कुछ लोगो की बात निकलती है तो पाकिस्तान और आई एस आई तक ही जाती है....
हमारे दिव्य,यशस्वी हिंदु धर्म की ऊदारता को ऊसकी कमजोरी मानने वाले या तो मूर्ख है या मूर्ख होने का ड्रामा कर रहे है.....
हालाकी ऐसी धूर्तता और मूर्खता वे हमेशा करते रहते है.... डजन्ट मैटर....
जहां 12 बीवीयां 20 बच्चे होते हो.....जहां ससुर अपनी बहु के साथ बलात्कार कर देता हो....जहां सबसे आसानी से तलाक हो जाता हो....जहां बच्चो को मदरसो मे बम बनाना और आतंक फैलाना सिखाया जाता हो.....मुझे नही लगता की इससे मजबूत धर्म कोई और होगा....
हमारे धर्म के गरीब परिवार के बच्चो को पालने और पढाने के लिए ISI और PAK
से पैसा नही आ रहा है...इन लोगो का ऐसा कोई माई बाप नही है.......यही कारण है की कुछ लोग बहक गए है....और हमे पूरी आशा है की वो जल्दी घर लौटेंगे....
और रही बात मानसिकता की तो हमारी मानसिकता स्पष्ट है और सबके सामने है....
कर्मभूमी और जन्म भूमी पर हर राश्ट्रवादी व्यक्ती को गर्व होना चाहिए....
अब मनमोहन सिंह की जन्म भूमी पाकिस्तान है और कर्मभूमी भारत है तो वे पाकिस्तान के कसीदे गढने लगे.....
कौन समझाए ऐसे बुद्धुजीवीयो को.................
कूटनीती तो हर सफल पत्रकार का गुंण है....चाणक्य की कूटनीतीयो ने एक साधारण व्यक्ती को सम्राट बना दिया....
हम तो अभी साधारण बनने की कोशिश कर रहे है........
प्रभु सदबुद्धी दे.........
जय भारत...जय छत्तीसगढ......नवीन सिंह......
हमारे दिव्य,यशस्वी हिंदु धर्म की ऊदारता को ऊसकी कमजोरी मानने वाले या तो मूर्ख है या मूर्ख होने का ड्रामा कर रहे है.....
हालाकी ऐसी धूर्तता और मूर्खता वे हमेशा करते रहते है.... डजन्ट मैटर....
जहां 12 बीवीयां 20 बच्चे होते हो.....जहां ससुर अपनी बहु के साथ बलात्कार कर देता हो....जहां सबसे आसानी से तलाक हो जाता हो....जहां बच्चो को मदरसो मे बम बनाना और आतंक फैलाना सिखाया जाता हो.....मुझे नही लगता की इससे मजबूत धर्म कोई और होगा....
हमारे धर्म के गरीब परिवार के बच्चो को पालने और पढाने के लिए ISI और PAK
से पैसा नही आ रहा है...इन लोगो का ऐसा कोई माई बाप नही है.......यही कारण है की कुछ लोग बहक गए है....और हमे पूरी आशा है की वो जल्दी घर लौटेंगे....
और रही बात मानसिकता की तो हमारी मानसिकता स्पष्ट है और सबके सामने है....
कर्मभूमी और जन्म भूमी पर हर राश्ट्रवादी व्यक्ती को गर्व होना चाहिए....
अब मनमोहन सिंह की जन्म भूमी पाकिस्तान है और कर्मभूमी भारत है तो वे पाकिस्तान के कसीदे गढने लगे.....
कौन समझाए ऐसे बुद्धुजीवीयो को.................
कूटनीती तो हर सफल पत्रकार का गुंण है....चाणक्य की कूटनीतीयो ने एक साधारण व्यक्ती को सम्राट बना दिया....
हम तो अभी साधारण बनने की कोशिश कर रहे है........
प्रभु सदबुद्धी दे.........
जय भारत...जय छत्तीसगढ......नवीन सिंह......
Tuesday, October 7, 2008
जीवन के कुछ अनमोल पल
जीवन के कुछ हसीं पल ,
जो कभी याद आते है,
तो कभी गुद -गुदाती है,
पर हर पल यह एहसास दिलाते है
की कोई तो है जो हमारे पास है ,
जो हमारे दिल का बना एहसास है ,
जिसके बिना सुना पड़ा आवास है ,
जिसके बिना अब न भूख है और न प्यास है ,
पर हमें उनके अब भी आने की आस है ,
अब तो भगवान पर टिकी हुई आस है ,
लेकिन फ़िर होता एह्ससा है
हम भी तो भगवान की ही संतान है
उन्ही का ही तो वरदान है ,
तो फिर क्यो दिल में उठी यह भ्रम की प्यास है ,
न कोई दूर है, न कोई पास है,
अब हम आने वाली दुनिया है,
इसे लिए भगवान से जोड़ रखी आस है.
जो कभी याद आते है,
तो कभी गुद -गुदाती है,
पर हर पल यह एहसास दिलाते है
की कोई तो है जो हमारे पास है ,
जो हमारे दिल का बना एहसास है ,
जिसके बिना सुना पड़ा आवास है ,
जिसके बिना अब न भूख है और न प्यास है ,
पर हमें उनके अब भी आने की आस है ,
अब तो भगवान पर टिकी हुई आस है ,
लेकिन फ़िर होता एह्ससा है
हम भी तो भगवान की ही संतान है
उन्ही का ही तो वरदान है ,
तो फिर क्यो दिल में उठी यह भ्रम की प्यास है ,
न कोई दूर है, न कोई पास है,
अब हम आने वाली दुनिया है,
इसे लिए भगवान से जोड़ रखी आस है.
मुझे मरने दो
मेरा भी मानना है की रोटी की कीमत पर धर्म परिवर्तन नही होना चाहिए .कम से कम भूख से मर कर वो गरीब जब अपने भगवान् से मिलेगा तो,उससे ये सवाल करेगा की भगवान् तुने मुझे गरीब क्यों पैदा किया और अगर गरीब पैदा कर भी दिया तो ऐसे धर्म मे क्यों भेजा जिसमे अमीर हमें तेरे मन्दिर मे जाने नही देते तेरी अराधना नही करने देते,ये ख़ुद तो हमारी फरियाद सुनते नही और तुझे सुनाने नही देते, भगवान् तो एक है बस उसके रूप अलग है , नाम अलग है,फिर वो गाड हो ,खुदा हो या भगवान् .हे भगवान् ये कितना कमज़ोर धर्म है जो कुछ लोगों के धर्म परिवर्तन से प्रभावित हो रहा है,इस धर्म के ठेकेदार कितने डरपोक है जो मुठ्ठी भर मिशानारीस से घबराए हुए है.क्या ये हमें मारने की अपेछा रोटी नही देसकते थे हमारे बच्चो को शिक्षा नही उपलब्ध करवा सकते थे। हमें गले लगते तो हम इनसे दूर क्यों जाते। क्या इनसे हमारी हालत नही देखी जाती और अगर वो ये देख सकते है तो इन सवालों पर चुप क्यों है.
बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी
पढ़ कर अफसोस हुआ की उत्तर प्रदेश के रहने वाले राज ठाकरे की मानसिकता से प्रेरित हो कर जय छत्तीसगढ़ का नारा बलंद कर रहे हैं .दूसरों को अच्छे पद और नौकरी की नसीहत देने वाले ख़ुद नौकरी के प्यार मे छत्तीसगढ़ के कसीदे पड़ने लगे हैं.मुझे किसी राज्य से कोई बैर नही है पर .लोगों की मानसिकता और डिप्लोमेसी उनकी बातो से ज़ाहिर हो जाती है.अब आप उनसे निश्पच्क्ष्ता की उम्मीद कैसे कर सकते हैं .बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी
न्युक्लीयर धर्म बम....
भाई अजीत जानकर अच्छा लगा की आप मिशनरीयो के आजीवन प्रचारक हो गए है...दिल्ली बैठ कर ऐसी बाते करना,लगता है किसी पार्टी का कोई प्रवक्ता बोल रहा हो.....
रही बात धर्म परिर्वतन की...तो मै आपको ये बता दू की मिशनरीयां भोलेभाले आदीवासीयो पर कोई परोपकार नही कर रहे है बल्की ईसाइयत नामक न्युक्लियर धर्म बम ऊनके हाथो मे थमा रहे है....और यह बम ईसाई देशो से ईम्पोर्ट हो रहा है...और जब यह धर्म बम अपनी शक्ती अनुसार फटेगा तो हर जगह आपको प्रभु,ईश्वर और प्रार्थनांए दिखायी देंगी....और वैसे भी आप भविश्य मे और ज्ञानीयों पर ज्यादा यकीन रखते है तो मै आपको बता दू की नास्त्रेदमस ने कहा है कुछ समय बाद दुनीया मे केवल ईसा और मूसा ही रहेंगे.....अगर आप भी अपना भविश्य सुरक्षित करना चाहते है तो ईसाई धर्म अपना लीजीए....और आपको लगता है की आदीवासीयो का धर्म परिवर्तन प्रगतीवादी कदम है तो आप भी ऐसा कदम ऊठाईये...ऊन्हे तो रोटी मिलती है आपको पद,मुद्रा और सुविधा मिल सकती है....
और रही बात तर्को की तो ये मेरे तर्क है और इस पे मेरा कोपीराईट है....और तर्क नापने का पैमाना खोज निकाला है क्या आपने....
मै दो पंक्तीयां कह रहा हू....ये दो लाईने आदीवासीयो और मिशनरीयो के लिये है....
मुद्रा पे बिके हुए लोग सुवीधा पे टिके हुए लोग बरगद
की बात करते है गमले पे ऊगे हुए लोग.......
जय भारत...जय छत्तीसगढ......नवीन सिंह....
रही बात धर्म परिर्वतन की...तो मै आपको ये बता दू की मिशनरीयां भोलेभाले आदीवासीयो पर कोई परोपकार नही कर रहे है बल्की ईसाइयत नामक न्युक्लियर धर्म बम ऊनके हाथो मे थमा रहे है....और यह बम ईसाई देशो से ईम्पोर्ट हो रहा है...और जब यह धर्म बम अपनी शक्ती अनुसार फटेगा तो हर जगह आपको प्रभु,ईश्वर और प्रार्थनांए दिखायी देंगी....और वैसे भी आप भविश्य मे और ज्ञानीयों पर ज्यादा यकीन रखते है तो मै आपको बता दू की नास्त्रेदमस ने कहा है कुछ समय बाद दुनीया मे केवल ईसा और मूसा ही रहेंगे.....अगर आप भी अपना भविश्य सुरक्षित करना चाहते है तो ईसाई धर्म अपना लीजीए....और आपको लगता है की आदीवासीयो का धर्म परिवर्तन प्रगतीवादी कदम है तो आप भी ऐसा कदम ऊठाईये...ऊन्हे तो रोटी मिलती है आपको पद,मुद्रा और सुविधा मिल सकती है....
और रही बात तर्को की तो ये मेरे तर्क है और इस पे मेरा कोपीराईट है....और तर्क नापने का पैमाना खोज निकाला है क्या आपने....
मै दो पंक्तीयां कह रहा हू....ये दो लाईने आदीवासीयो और मिशनरीयो के लिये है....
मुद्रा पे बिके हुए लोग सुवीधा पे टिके हुए लोग बरगद
की बात करते है गमले पे ऊगे हुए लोग.......
जय भारत...जय छत्तीसगढ......नवीन सिंह....
Sunday, October 5, 2008
शहादत रास ना आई
मित्रो हमारे देश की बरसो पुरानी विडंबना रही है....कि हम देश के वीरो को अक्सर शहीद हो जाने के बाद भुला देते है...
इस बार 28 को भगत सिंह का कही नामो-निशान नही था.....वहीं 2 को गांधी जी पर हल्ला हुआ पडा था.....क्या गांधी ही देश के अकेले हीरो थे.........
इस पर हम सभी को सोचने की जरुरत है..... बहरहाल,
अभी हाल ही मे एक और ऐसी ही घटना हुई..... एक कार्ड-र्बोड शूटर को फर्जी शूटिंग जीतने पर करोडो रुपए मिले...और कुंवारी लडकीयो से शादी के आफर मिले....
वहीं एक रीयल शूटर को आतंकीयो से लडते हुए शहीद हो जाने पर 5 लाख का ईनाम मिलता है.....इस दर्द को और इस अपमान को केवल शर्मा जी का परिवार
ही समझ सकता है.....
और यदी आप लोग समझ सके तो अच्छा है.......
.......नवीन सिंह.......
मित्रो हमारे देश की बरसो पुरानी विडंबना रही है....कि हम देश के वीरो को अक्सर शहीद हो जाने के बाद भुला देते है...
इस बार 28 को भगत सिंह का कही नामो-निशान नही था.....वहीं 2 को गांधी जी पर हल्ला हुआ पडा था.....क्या गांधी ही देश के अकेले हीरो थे.........
इस पर हम सभी को सोचने की जरुरत है..... बहरहाल,
अभी हाल ही मे एक और ऐसी ही घटना हुई..... एक कार्ड-र्बोड शूटर को फर्जी शूटिंग जीतने पर करोडो रुपए मिले...और कुंवारी लडकीयो से शादी के आफर मिले....
वहीं एक रीयल शूटर को आतंकीयो से लडते हुए शहीद हो जाने पर 5 लाख का ईनाम मिलता है.....इस दर्द को और इस अपमान को केवल शर्मा जी का परिवार
ही समझ सकता है.....
और यदी आप लोग समझ सके तो अच्छा है.......
.......नवीन सिंह.......
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