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Tuesday, October 14, 2008

क्या कहें......

दोस्त मयंक इसको निजि आक्षेप न माने....

पिछले लेखो मे मैने कोई आपत्तीजनक शब्द नही लिखे थे....और अगर आप जय श्री राम को आपत्तीजनक मानते है....तो ये आपकी मानसिक्ता है....

और बार बार ऐसा लिख के क्या साबित करना चाहते है कि आप बहुत बडे धर्मनिर्पेक्ष,और निष्पक्ष पत्रकार हो गए है....
ये तुष्टीकरण बंद कर दीजीए....

बजरंगीयो पर राजनिती नामक लेख मे मैने किसी तरह से कोई आपत्तीजनक शब्द नही लिखा है...और भाषा भी सभ्य है....
और जैसा आप हम पर आरोप लगाते रहते है कि हम संघी है या भाजपाई है.....तो मित्र आप के लेखो से भी स्पष्ट है कि आप भी कांग्रेसी है....
तुष्टीकरण की राजनीती तो कांग्रेसी ही करते हैं....
आप को भी कांग्रेस का प्रवक्ता बन जाना चाहिए.....

कैव्ससंचार चुकी हमारे विभाग के नाम पर बना हुआ है और मै इस विभाग का पूर्व छात्र हू ईसलिए इसे अपना मानते हुए ऐसा लिखता हु...क्योकी किसी भी विषय को सर्वप्रथम परिवार मे डिसकस किया जाता है.....
और मेरा मानना है कि हमारे विभाग के सभी विद्यार्थि आप की तरह
धर्मनिर्पेक्ष नही होंगे
....क्योंकी मेरे पास भी कई लोगो फोन आते है और ऊनके द्वारा मेरी इन टिप्पणीयो पर समर्थन मिलता है....

और मेरे लेखो से आप भी कई जगह सहमत है....जिसकी मुझे आशा नही थी....
ऊसके लिए आपका साधुवाद.....

और रही बात बार बार मेरे इसी विषय पर लिखने की तो ये विषय इस वक्त सबसे गर्म और सामयिक है.....और पत्रकारो को सामयिक विषय पर लिखते पढते रहना चाहिए....

और आपकी मंशा मै अच्छी तरह से समझता हूं.....
बहरहाल
मै भी यही चाहूंगा की अब विवाद आगे न बढे.....इसके लिए आपका सहयोग वांछित है....

मेरी कुंठा को समझे और मुझे राष्ट्रवाद के पथ पर आगे बढने दे और अपने बहके हुए साथीयो को संगठित करने दे......

अपना ब्लाग अजर अमर रहे...... ऐसी मेरी मंगलकामना है......
जय हिन्द....जय भारत.....नवीन सिंह....

धर्मनिर्पेक्षता याने हिन्दू विरोध??????

आज सारा देश जिस विडंवना से गुजर रहा है,वह सोचने लायक है। जानकारी के लिये बताना चाहता हूँ,मैं धर्म-निरपेक्षवादी बिल्कुल नहीं हूँ बल्कि धर्म-सापेक्षवादी हूँ। आज धर्म-निरपेक्षता का मतलव हिन्दुओं का विरोध है। जो राजनैतिक स्तर पर ही नहीं हम से भी जुडा हुआ है। उनके लिये खास कर कहना चाहता हूँ जो राजनीति की बात को राजनीति मानते हैं। जब देश में चल रहे हालात के लिये राजनीति ही ज़िम्मेदार है तव उसकी चर्चा क्यों ना की जाये मेरे प्रिय साथियों के लिये भी कहना चाहता हूँ जो हिन्दुओं की आँख बंद करके बुराई करते हैं पुरानी वो बातें करते हैं जो उस दौर में सब धर्मों में थीं। अगर इतना ही एतराज़ है अपने धर्म से तो छोड क्यों नहीं देते या फिर आप अपने को अलग बता कर क्या दिखाना चाहते हैं? ऐंसे हिन्दुओं के लिये सिर्फ यही शब्द हैं कि या तो वो आलोचना छोंडें या फिर आगे आकर जहाँ जो सुधार लगता है वो करें किसने रोका है। हिन्दू धर्म की खामियां दूर करने आयें कौन मना करता है। हिन्दुं के पक्ष का मतलव मुस्लिमों का विरोध नहीं है भाईयों खुद में कोई गलती है तो अपनेआप को मार डालना या छोड देना ठीक बात है ना ये संभव है। व्यवस्था बदलने के लिये व्यवस्था में रहना चाहिये ना कि व्यवस्था से हट कर इसे बदलने का निर्थक प्रयास करने चाहिये।

Monday, October 13, 2008

निष्पक्ष पत्रकार बने.......

मेरा किसी पर निजी आक्षेप का कोई इरादा नहीं है पर अब कोई रास्ता नही बचा है....इसे कृपया निजी आक्षेप ना माने ! मैंने बार बार यह समझाया की केव्स संचार किसी धर्म या राजनीति का अड्डा नही है और कृपा करके इसे किसी एक धर्म का और धार्मिक राजनीति का मंच ना बनाएं ............ हम धर्मनिरपेक्ष है हमें रहने दें !

आपकी व्यक्तिगत राजनैतिक और धार्मिक भावनाओं का हम सम्मान करते हैं पर उसके लिए आप व्यक्तिगत ब्लॉग बना सकते हैं.....यह मंच हिदू या मुस्लिम का नहीं है इंसानियत का !

इससे पहले भी कई बार मुझे आपके लेख संपादित करने पड़े क्यूंकि आपत्तिजनक अंश थे ...... क्षमा करें पर मेरे पास यही एक काम नहीं है ....... यह सामना या पांचजन्य नही है ! जब हम इस तरह के उत्तेजक और कट्टरपंथी लेख लिखते है तो किस हक से अपने को किसी और मज़हब के कट्टरपंथी से बेहतर या अलग कहते हैं ?

हम आतंकवाद के ख़िलाफ़ है ..... इसलिए नहीं की उसे किसी धर्म विशेष के आदमी से जोड़ते हैं बल्कि इसलिए क्यूंकि उसमे हिन्दू और मुसलमान दोनों मरते हैं जो हमारी नज़र में पहले इंसान हैं !

नवीन जी क्या अब आपको पढ़कर नही लगता की आप बजरंग दल के प्रवक्ता हो गए हैं ?

आप से मेरी जो कुछ फ़ोन पर बात हुई उसे सार्वजनिक ना करते हुए बस यह कहूँगा की यह तय हुआ था की इस ब्लॉग पर धार्मिक और राजनीतिक लामबंदी नहीं की जायेगी ...... हम एक अच्छे पत्रकार के तौर पर किसी धार्मिक या राजनैतिक दल के समर्थन के नारे नहीं लगा सकते !

बजरंग दल और सिमी की तुलना वाकई राजनीति है यहाँ मैं सहमत हूँ पर बजरंग दल ने आज तक ऐसा भी कोई देशोद्धार नही कर दिया जिसकी आप बात करते हैं ........ रही बात हथियार बांटने की तो धार्मिक चिन्हों की आड़ में हथियार बांटने की छुपी हुई मंशा क्या है सब जानते हैं ...... उसके लिए तर्क आप भले ही हजारों गढ़ दें

बजरंग दल निश्चित रूप से देशद्रोही संगठन नहीं है पर विद्वेष और हिंसा तो फैलाई ही है ....... इसके लिए मैं उतना ही दोष इस्लामिक कट्टरपंथियों और कठमुल्लों को भी देता हूँ

छोडिये खैर बजरंग दल पर प्रतिबन्ध का समर्थन मैं भी नहीं करता पर उनके सेवा भाव के बहुत उदाहरण देखने को नहीं मिलते

ग्राहम स्टेन्स की हत्या के बारे में क्या कहना है ?

मैंने बार बार कहा की केव्स संचार को किसी धार्मिक और राजनैतिक दल का मंच ना बनाए

मेरे भी कुछ राजनीतिक विचार और आस्थाएं हैं पर उनके लिए मैं इस मंच का इस्तेमाल नही करता

केव्स संचार को पाञ्चजन्य ना बनाएं

निष्पक्ष पत्रकार बने ........ प्रयास करें यह मुश्किल नहीं

आगे से मैं नहीं चाहता की यह स्थिति फिर आए

बजरंगीयो पर राजनीती....

अपने 25 वर्ष की यात्रा मे बजरंग दल पर कई सवाल ऊठते रहे है....
84 मे भाजपा के विनय कटियार के नेत्रत्व मे राम जानकी रथ की सुरक्षा के लिए बजरंग दल का निर्माण हुआ.... किसी धर्म का विरोध और किसी को मारने के लिए नही हुआ था....

बजरंग दल,शिव सेना,वीहिप,आरएसएस को शुरु से ही काँग्रेस और अन्य पार्टियो ने गलत ढंग से पेश किया... इनके विरोध का कारण केवल एक ही है कि य़े सारे ही दल भगवा रंग से रंगे हुए है.....
इनके नामो से विशुद्ध हिन्दु होने का पता चलता है.....हमारे धार्मिक चिन्हो का प्रयोग करते है....

03 मे अजमेर मे प्रवीण तोगडीया ने एक सभा मे कायर्कताओ को त्रिशूल बाट दिया....तो ऊन्हे गिरफ्तार कर लिया... अरे ये हमारे देवी देवताओ के यशस्वी अस्त्र शस्त्र है....
और भगवा रंग के वस्त्रो से श्रद्धा भाव,एकाग्रता और सेवा भाव बढता है.... अल्पसंख्यक राजनीति पर टिकी कांग्रेस इन संगठनो को आरोपित करती रहती है...

बजरंग दल और वी एच पी ने कभी राजनीती नही की और न करेगी....
इनका ऊद्देश्य तो केवल इतना है कि हिन्दुजनाभावानाओ और हिन्दुओ का सम्मान मिलता रहे....
कांग्रेस इसको समझ नही पा रही है और आतंकवाद के प्रती अपनी हार को छुपाने के लिए और हिंदुत्व विरोधी एवं तुष्टीकरण की राजनीति करने के लिए ऐसा कर रही है....

श्रीराम सेतु....अमरनाथ मुद्दे इसका बडा ऊदाहरण है....
बजरंग दल और सिमी मे तुलना हो ही नही सकती....सिमी एक विशुद्ध आतंकवादी संगठन है.....और जो भी बजरंग दल पर आरोप लगा रहे है...वह इसका खामियाजा होने वाले चुनावो मे भुगतेंगे....
और भविष्य मे कभी बजरंग दल पर आतंकवादी होने पर देश मे प्रतिबंध लगता है.... तो ये निशचित रूप से अन्डरग्राऊंड मूवमेंट चलाएंगे..... ऊस वक्त ये देश के लिए और भी खतरनाक होगा....
इसकी जिम्मेदार कांग्रेस, और सिमी का समर्थन करने वाले, और बजरंगीयो का विरोध करने वाले होंगे....
जय भारत.....नवीन सिंह....

Sunday, October 12, 2008

पहले धर्म को समझें।

दोस्तों पिछले कुछ दिनों से केव्स पर गरमा गरम पढने को मिल रहा था हालांकि बहस अपनी सार्थकता खो चुकी थी कमेंन्ट्स कर नहीं पा रहा था, तो मन किया कुछ मैं भी लिखूं और आज चला आया कुछ लिखने सबसे पहले मयंक का बहुत धन्यवाद मुझे जोडने के लिये। सचमुच धर्म से जुडा मुद्दा वेहद संजीदा क़िस्म का होता है जिस पर हम जैसे कम बुद्धियों को तो क़तई नही बोलना चाहिये क्योंकि कोई भी धर्म महज़ अपने आराध्य को पूजने, आरती करने तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि यह एक वृहद विज्ञान होता है। इसे धर्म इसलिये कहा जाता है ताकि अनुयायी निर्दिष्ट पूजन विधान को करें और स्वस्थ रह सकें। इंसान के भीतर विद्यमान सभी दस रसों में से भय का हमारे ऋषियों(वैज्ञानिकों) ने इस्तेमाल करते हुए इसे सर्वोच्च सत्ता के प्रति भय और उसे अपना माई-बाप मानने की सीख दी, क्योंकि विज्ञान हर आदमी नहीं समझता। मुझे शायद धर्म की इससे ज़्यादा सरल परिभाषा कुछ और नहीं लगी मैं इस मंच के माध्यम से सबसे पहले धर्म क्या है ये समझने की कोशिश करना चाहता हूँ। आप सभी का सादर कमेंट्स आमंत्रित हैं कृपया दें और कारवां ये वार्ता आगे बढायें। धन्यवाद।।।।।।।।।।

हम तो झोला उठा के चले...सबके नाम (एजुकेशनल टूर)

भोपाल,१२ अक्टूबर , दृश्य श्रृव्य अध्ययन केन्द्र के छात्र आज शैक्षिक भ्रमण पर पूना , गोवा और मुंबई के लिए रवाना हो रहे हैं । सभी छात्र हबीबगंज स्टेशन पर झेलम एक्सप्रेस की समयानुसार मिलेंगे और इस प्रकार से एक यादगार सफर की शुरुआत होगी। इस टूर पर कुल २५ लागों का दल केव्स के विभागाध्यक्ष डॉ श्रीकांत सिंह के साथ जा रहा है । आज स्टेशन पर जाने वालों से ज्यादा छोड़ने वालों के होने की सम्भावना है (आप भी आमंत्रित हैं )। निश्चित रूप से ये केव्स की स्नेहिल परम्परा की पहचान है ।

इस टूर पर हम ऍफ़.टी.आई, फिल्म्स डिविज़न , चैनल और प्रोडक्शन हाउस तो देखेंगे ही , साथ ही साथ गोवा की मस्ती , मुमबई की माया और पूना की मद्धम रवानी का लुत्फ़ भी लेंगे । इस दौरान कई वर्कशॉप और पूना में एक अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी जो की मीडिया और वीडियो प्रोडक्शन में इस्तेमाल हो रहे आधुनिकतम इक्विपमेंट्स पर है, उसमे भी हिस्सा लेने का मौका मिलेगा ।

आज जब की इस टूर की शुरुआत हो रही है, सबसे पहले मैं अपने सभी सीनियर्स को धन्यवाद् देता हूँ क्यूंकि हमें शैक्षिक भ्रमण के लिए प्रेरित बल्कि ये कहें की उद्वेलित उन्होंने ही किया । अगर आप सब इस टूर में हमारे साथ होते तो ज़रूर इस यात्रा के श्रीसुख में वृद्धि होती। मैं टूर पर अपने किसी कारणवश अपने साथ न चल पाने वाले अपने बैचमेट्स से कहूँगा की हमें उनकी कमी खलेगी । मैं अपने जूनियर्स से कहूँगा की अगली बार के लिए वो भी तैयार रहे क्यूंकि ये मौका एक ही बार मिलता है ,और अंत में मैं इस भ्रमण दल के सभी सदस्यों से कहूँगा की खूब मस्ती करो और एक एक लम्हे को जी डालो !

भगवान् टूर को यादगार बनाएं ।

Saturday, October 11, 2008

जरा याद करो कुर्बानी

आज से ब्लॉग पर मुद्दा सिर्फ़ लोकनायक और उनका जीवन होगा। हम एक सार्थक बहस उनके जीवन इमर्जेंसी के जेपी ,स्वतंत्रता संग्राम के जेपी और उसके भी बाद व्यवस्था के ख़िलाफ़ तूफ़ान का रुख मोड़ते जेपी के ऊपर चर्चा करेंगे। मेरा अनुरोध के केव्स के समस्त ब्लॉग वीरों से की हम जेपी के जीवन पर इस चर्चा के आह्वाहन को सफल बनायें।

गूगल बाबा का वरदान - हिन्दी टंकण औजार

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