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Sunday, July 27, 2008

पाँच साल पन्द्रह हमले !



परसों और कल हुए धमाको के बारे में ज्यादा कुछ क्या बताऊ पर इतना कहना चाहूँगा कि शायद अमेरिका केवल हौवा खडा करता है वस्तुतः आतंकवाद के सबसे बड़े शिकार दुनिया में हम हैं। इसका सबूत ये है कि पिछले पाँच साल में भारत में पन्द्रह बड़े आतंकवादी हमले हो चुके हैं .............................. एक नज़र


13 मार्च 2003: मुंबई में एक ट्रेन में हुए धमाके में 11 लोगों की मौत हो गई।



25 अगस्त 2003: मुंबई में एक के एक दो कार बम धमाकों में 60 लोगों की मौत हो गई।



15 अगस्त 2003: असम में हुए धमाके में 18 लोग मारे गए जिनमें ज़्यादातर स्कूली बच्चे थे।



29 अगस्त 2003: नई दिल्ली के तीन व्यस्त इलाक़ों में हुए धमाकों में 66 लोगों ने अपनी जान गँवाई।



7 मार्च 2006: वाराणसी में हुए तीन धमाकों में कम से कम 15 लोग मारे गए जबकि 60 से ज़्यादा घायल हुए।



11 जुलाई 2006: मुंबई में कई ट्रेन धमाकों में 180 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई।



8 सितंबर 2006: महाराष्ट्र के मालेगाँव में कुई सिलसिलेवार धमाकों में 32 लोग मारे गए।



19 फरवरी 2007: भारत से पाकिस्तान जा रही ट्रेन में हुआ धमाका। इस धमाके में 66 लोगों की मौत हो गई जिनमें से ज़्यादातर पाकिस्तान के नागरिक थे.



18 मई 2007: हैदराबाद की मशहूर मक्का मस्जिद में शुक्रवार की नमाज़ के दौरान धमाका हुआ। जिनमें 11 लोगों की मौत हो गई.



25 अगस्त 2007: हैदराबाद के एक पार्क में तीन धमाके हुए जिनमें कम से कम 40 लोग मारे गए।



11 अक्तूबर 2007: अजमेर में ख़्वाज़ा ग़रीब नवाज़ की दरगाह पर हुआ धमाका। धमाके में दो लोगों की मौत हो गई.



23 नवंबर, 2007 : वाराणसी, फ़ैज़ाबाद और लखनऊ के अदालत परिसर में सिलसिलेवार धमाके हुए जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई और 50 से ज़्यादा घायल हो गए।



13 मई 2008: जयपुर में सात बम धमाके हुए। जिनमें कम से कम 63 लोगों की मौत हो गई.



25 जुलाई 2008: बंगलौर में हुए सात धमाके। जिनमें दो व्यक्ति की मौत हो गई और कम से कम 15 घायल हुए.



26 जुलाई 2008: अहमदबाद में लगातार 1६ धमाके हुए।


2 comments:

  1. दुख इस बात का है कि ज्यों ज्यों दिन बीतेंगे...आपको अपनी लिस्ट और लम्बी करते जाना होगा। नए धमाके होते रहेंगे... लोग मरते रहेंगे, और हम यूं ही बेबस देखते रहेंगे। अमरीका ने जो एक बार झेला, हम बार बार झेलने पर मजबूर हैं। कोई ठोस कदम नहीं, सिर्फ सांत्वना के दो शब्द, मुआवजे के पैकेज औऱ कार्रवाई का आश्वासन। जमीनी तौर पर खामियां वहीं, नए सिलिसलेवार धमाकों का डर भी वहीं। जिस अल्लाह के नाम पर वो धमाके करने की बात कर रहे हैं.... अब तो वो अल्लाह ही खैर करे।

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  2. ye dhamake mein jab tak netaon ke ghar wale nahi marenge.............kuch nahi hoga ,,,,,,,,,,,,,,,

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