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Thursday, October 30, 2008

पटाखे ........ राम राम !





सबसे पहले क्षमा चाहत हूँ कि माता जी की बीमारी की वजह से दो दिन कुछ नही लिखा पाया पर शिकायत करना चाहूंगा कि और किसी ने भी ब्लॉग पर कुछ लिखने का प्रयास नही किया ...... ख़ास कर कम से कम श्री राम के अनन्य भक्तजनों से तो उम्मीद थी कि वे श्री राम के घर लौटने पर ब्लॉग पर कुछ दिए जला देंगे पर वही न कि जो बादल ........ जिस तरह से ब्लॉग पर पिछले दिनों जय श्री राम के उद्घोष किए गए थे लगा था कि ....... पर मैं क्षमा सहित पूछना चाहूँगा कि क्या राम भक्ति केवल बहस और बहस तक ही सीमित है ?



कबीर ने कहा



कस्तूरी कुंडली बसे, मृग ढूंढें बन माहि



ऐसे घट घट राम हैं, दुनिया देखे नाही



खैर क्षमा फिर मांगते हुए ..... श्रृंखला में प्रस्तुत है हमारे नियमित पाठक अनुपम अग्रवाल जी की भेजी एक मजेदार कविता पटाखों के नाम .................................



पटाखों के नाम


ये नहीं है परदा ,हुआँ हुआँ

बारूद का गर्दा ,धुआँ धुआँ


है बढ़ा प्रदूषण , हुआँ हुआँ ,

ये धुंध नहीं , है धुआँ धुआँ


यूँ छोडे पटाखे हैं कम भी

हर जन कहता थोड़े हम भी

ना बच पायें , निकले दम भी

ना बच्चे समझे ना हम भी


पानी सूखा , सूखी ज़मीन

और सूख गया है कुआँ कुआँ


है बढ़ा प्रदूषण , हुआँ हुआँ

सज गयी ज़िंदगी धुआँ धुआँ


है बढ़ा प्रदूषण वहाँ वहाँ

है चले पटाखे जहाँ जहाँ

ये नहीं है .....




अनुपम अग्रवाल

anupam.agrawal2@gmail.com

Monday, October 27, 2008

जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना


आलोकोत्सव में आज श्रृंखला को आगे बढाते हुए हम प्रस्तुत करते हैं प्रसिद्द कवि गोपाल दास नीरज की एक कविता .....कविता का भाव यह है कि सच्ची दीपावली घरों को नही जिंदगियों को रोशन करने से होगी......


जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना


अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।



नई ज्योति के धर नए पंख झिलमिल,

उड़े मर्त्य मिट्टी गगन स्वर्ग छू ले,

लगे रोशनी की झड़ी झूम ऐसी,

निशा की गली में तिमिर राह भूले,



खुले मुक्ति का वह किरण द्वार जगमग,

ऊषा जा न पाए, निशा आ ना पाए

जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना

अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।


सृजन है अधूरा अगर विश्‍व भर में,

कहीं भी किसी द्वार पर है उदासी,

मनुजता नहीं पूर्ण तब तक बनेगी,

कि जब तक लहू के लिए भूमि प्यासी,



चलेगा सदा नाश का खेल यूँ ही,

भले ही दिवाली यहाँ रोज आए


जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना

अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।

मगर दीप की दीप्ति से सिर्फ जग में,

नहीं मिट सका है धरा का अँधेरा,

उतर क्यों न आयें नखत सब नयन के,

नहीं कर सकेंगे ह्रदय में उजेरा,



कटेंगे तभी यह अँधरे घिरे अब,

स्वयं धर मनुज दीप का रूप आए

जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना

अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।



गोपाल दास 'नीरज'

Sunday, October 26, 2008

तमसो माँ ज्योतिर्गमय !

बेहद उत्साह और खुशी के साथ आज हम दीपावली के अवसर पर सप्ताह भर के आलोकोत्सव के आयोजन की घोषणा करते हैं। अपने निर्माण से लेकर अब तक के सफर में हम अब तक हिरोशिमा सप्ताह से शुरू कर के आतंकवाद के ख़िलाफ़ विशेष श्रृंखला तक के सरोकारों का निर्वहन करते आए क्यूंकि आप सबका योगदान उसमे नींव की ईंट की भांति बना रहा। आज दीपावली पर सप्ताह भर की श्रृंखला प्रारंभ करते हुए भी हम आपसे यही अपेक्षा रखते हैं।

दीपावली पर श्रृंखला प्रकाशित करने का विचार मन में तब आया जब चारों तरफ़ अँधेरा कुछ ज्यादा ही दिखने लगा। चिंगारिया तो थी पर धार्मिक कट्टरपंथ और विद्वेष की.....कहीं ये चिंगारियां एक मुल्क में कई मुल्क बनाने पर आमादा थीं, कहीं आपदा में फंसे लोगों की सहायता में सेंध लगाती, कहीं किसानो की ज़मीन पर राजनीतिक झुग्गियां बसाती तो कहीं धर्म के नाम पर खून से तिलक करती और वजू करती ..........! फिर लगा कि नहीं ये चिंगारियां रौशनी नहीं कर सकती ये तो घर जला डालेंगी और घर जला कर भी भला कहीं रौशनी की जाती है ?

तब विचार और सुझाव की प्रक्रिया चालू हुई और सहमती बनी कि शायद या मौका उत्तम है जब रौशनी का आह्वान किया जाए ...... घरों के चिराग बुझाने की जगह दिलों में चिराग जलाने की बात की जाए !

हमारे लिए यह पर्व किसी धर्म का नही पर अधर्म के ख़िलाफ़ लड़ाई का ज़रूर है .... हमारे लिए ये पर्व है आलोक का जिसकी एक किरण गहरे तम् को चीरते हुए अपनी अलग जगह बना लेती है ..... ये लड़ाई है दिए की हवा से कि भले ही बुझना है पर जितनी देर जलना है .... अंधेरे को छाने नहीं देना है !
यह जीत है सुबह की कि रात भले ही कितनी काली हो सुबह को आने से रोक नहीं सकती है !
यह कामना है कि जितने अंधेरे जीवन हो ..... सब रोशन हो उठे !

यह विशवास है कि सच्ची रौशनी जलाने से नहीं ख़ुद जलने से होती है ......
यह संदेश है कि रौशनी अपनी राह ख़ुद ढूंढ लेती है
यह इतिहास है कि जब तक दुनिया में अँधेरा है तब तक रौशनी उसके ख़िलाफ़ लडेगी
यह प्रण है कि हमें जो रौशनी में हैं ...... उनको उजाले में लायेंगे जो अंधेरे में गुम हैं ...............
यह रास्ता है जो ले जाता है अज्ञान- से ज्ञान की ओर !
यह उम्मीद है कि इस दीपावली उन दिलों में में मोहब्बत रोशन होगी जहाँ नफरत के अंधेरे पसरे हुए हैं .....
आइये आज जलते दीयों की जगमग शिखाओं को साक्षी बनाकर एक कसम खाएं ....
कि अगर पड़ोसी के घर अँधेरा है
और अपने घर दो दिए जलते हैं
तो चलो एक दिया
पड़ोसी के घर
रख चलते हैं
अगर
अपने घर भी केवल एक ही
दिया जले
तो उसको
दोनों घरों के बीच रख चलें .......

इसी के साथ हमें शुभारम्भ करते हैं CAVS संचार पर ज्योति के अनुपम प्रसार पर्व के आयोजन "आलोकोत्सव" का इसी छोटी सी प्रार्थना के साथ .....
मेरे मन के अंध तमस में ज्योतिर्मय उतरो ....... !!

आप सभी आमंत्रित हैं हमारे परिवार संग दीवाली मनाने को ......
ई मेल करें cavssanchar@gmail.com

Friday, October 24, 2008

एक नजर

विवेक/चक दे इंडिया में वाकई रंग दे बसंती हो जाए तो निश्चित ही तारे जमी पर आ हीं जायेंगे लेकिन गौरतलब है की जैसे जैसे भारत देश का इतिहास बदला है वैसे वैसे बॉलीवुड के इतिहास में भी कई रंग देखने को मिलते है ,और उसने अपने अच्छे बुरे प्रयासों से हमे कुछ न कुछ या फिर बहुत ज्यादा समय समय पर चेताया है विगत दो सालो में आई फिल्मो की श्रेणी में "चक दे इंडिया "जिसने भारत देश के राष्ट्रीय खेल "हाकी"जिसको स्थानीय खेल जैसा भी सम्मान नही मिल पा रहा है ,को लोगो के मानस पटल केंद्रित करते हुए एक महत्वपूर्ण खेल बताते हुए लोगो के दिलों दिमाग पर छाई तो दूसरी तरफ़ रंग दे बसंती जो आधुनिकता में भटके युंवाओ को अपने अन्दर बदलाव करके देश बदलने का माद्दा पैदा करने का संदेश दे गई तो इन सबसे इतर आस्कर के दौड़ में दौड़ती तारे ज़मी पर ने एवरी चाइल्ड स्पेशल का नारा देते हुए अपने बच्चों को रेस का घोड़ा समझने वालो के मुहँ पर तमाचा मारा और एक ऐसे बाल रोग की तरफ़ दुनिया का ध्यान खिचवाया जिसे हम सभी बच्चों की नौटंकी कहकर नजरअंदाज कर देते थे और दूसरी तरफ़ डीस्लेक्सिया पीड़ित बच्चों को आइन्स्टीन ,लियोनार्दो दा विन्ची ,जो सभी बचपन में इसी रोग से पीड़ित थे के सरल तरीके से प्रस्तुत करते हुए बच्चों के प्रोत्साहन को बढ़ाने का काम किया खैर ,सिनेमा हमारी ही प्रतिक्रया का दर्पण है और अपनी ही प्रतिक्रया देखकर हम कितना सबक लेते हैं यह हमारे ऊपर ही निर्भर है इसीलिए लगे रहो मुन्ना भाई जारी रहेगा........

Wednesday, October 22, 2008

भोर का सपना

टलते टलते लॉन्च के बाद आख़िर आज भारत का मिशन चंद्रयान आज सफल हो गया। भारतीय अन्तरिक्ष विज्ञानियों की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में भारत का पहला मानवरहित अभियान चंद्रयान-1 बुधवार को सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया गया। भारत का अब तक का सबसे सफल लॉन्च वाहक पी एस एल वी ११ इसे लेकर आन्ध्र प्रदेश के श्री हरिकोटा के सतीश धवन अंतर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष केन्द्र से लेकर अन्तरिक्ष की ओर रवाना हुआ।

इसके बाद का दृश्य विहंगम था दुनिया भर के वैज्ञानिकों, मीडिया के ब्राडकास्टिंग कक्षों में बैठे तमाम मीडिया कर्मी, अल सुबह उठ कर टेलिविज़न स्क्रीन के सामने आँखें मलते देशवासी और इसरो के नियंत्रण कक्ष में उपस्थित वैज्ञानिक एक साथ तालियाँ बजा कर भारत के ज्ञान और विज्ञान का लोहा मान रहे थे।

इसरो के अध्यक्ष माधवन नायर ने प्रक्षेपण के चंद लम्हों बाद ही कहा कि

पहले चरण का उद्देश्य था कि चंद्रयान सफलता से छोड़ा जा सके और अपनी पहली कक्षा में स्थापित हो। ऐसा हो गया है और हम अपने पहले उद्देश्य में सफल हो गए है.
उन्होंने कहा, चार दिन से हम लोग कुछ प्रतिकूल चुनौतियों से जूझ रहे थे. बारिश, बिजली, तेज़ हवा जैसी चुनौतियाँ भी हमारे सामने थीं. फिर भी हम सफलतापूर्वक चंद्रयान का प्रक्षेपण कर पाए.
उन्होंने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए इस अभियान से जुड़े सभी वैज्ञानिकों को इस सफलता पर बधाई दी

चंद्रयान के साथ 11 अन्य उपकरण अंतरिक्ष में भेजे गए हैं जिनमें से पाँच भारत के हैं और छह अमरीका और यूरोपीय देशों के.
वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रयान को उसकी कक्षा में स्थापित करने के लिए कुल मिलाकर क़रीब 15 दिनों का समय लगेगा.
यह चंद्रयान चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर ऊपर रहकर चंद्रमा का त्रिआयामी नक्शा तैयार करेगा और उसकी सतह पर मौजूद तत्वों और खनिजों के विवरण एकत्रित करेगा।

चंद्रयान के साथ ही आज सुबह सुबह एक पुराना और बड़ा सपना सच हो गया है.....एक प्राचीन मान्यताओं को समेटे और सहेजे देश, जहाँ आर्यभट्ट ने खगोल के गूढ़ रहस्य सुलझा डाले, वराहमिहिर ने कह डाला जो गैलीलियो ने बाद में बताया.....जहाँ आज भी नदियों को, धरती को और पशुओं को माँ जैसे संबोधन से नवाज़ दिया जाता है ..... जहाँ आज भी लोग दूसरे के दुःख में शरीक हैं .......जहाँ आज भी कितनी गरीबी है वाकई उस मुल्क के लिए यह एक अकल्पनीय स्वप्न के सच होने जैसा है......बड़े बुजुर्ग अक्सर कहा करते थे कि "भोर के सपने सच होते हैं.......आज भोर वाकई एक सपना सच हो गया..........."

Monday, October 20, 2008

जनता जनार्दन


जनता जनार्दन लंबे समय से CAVS संचार के पाठकों और हमारे कुछ साथियों की मांग थी कि चूँकि केव्स के वर्तमान और पूर्व विद्यार्थियों के अलावा कोई और इस ब्लॉग का सदस्य नहीं बन सकता है अतः एक मंच प्रदान किया जाए हमारे पाठकों के लिए जिस पर हम उनकी चुनिन्दा प्रतिक्रिया प्रकाशित कर सकें ....... तो हाज़िर है "जनता जनार्दन" ! इस मंच पर हम आपकी चुनिन्दा टिप्पणिया और पत्र प्रकाशित करेंगे .... आप हमें अपने पत्र jantajanaardan@gmail.com ई मेल भी कर सकते हैं ...... तो कहिये जो लगता है आपको क्यूंकि " आवाज़ ऐ खल्क, नगाडा ऐ खुदा" यानी जनता की आवाज़ ही ईश्वर की आवाज़ है ! इस लिंक ब्लॉग का वेब पता है http://cavspaathak.blogspot.com/ इसका लिंक हमने साइड बार में दे दिया है जिस पर लिंक कर के सीधे इस पर जाया जा सकता है


आपका


केव्स परिवार

भूख की बिसात पर विकास के मायने

आज देश आर्थिक मोर्चे पर खूब प्रगति कर रहा है.चाहे खेल का मैदान हो या अन्तरिक्ष विज्ञानं का रहस्य या फिर वैश्विक राजनितिक -व्यापारिक मंच हर किले को फतह करने में हम सफल हो रहे हैं. इसी विकास के गुमान की पोले खोल रहा है अभी हाल ही में जारी वैश्विक भुखमरी सूचकांक २००८ जिसमेबताया गया है की विश्व की कुल भूखी आबादी का २५ प्रतिशत हमारे देश में रहता है. पाँच वर्ष तक के सर्वाधिक कुपोषित पाँच करोड़ बच्चे भी हमारे देश में रहते है. भारत में ही सबसे ज्यादा नवजात शिशु और नौजवान माताओं की मौत होती है. स्वस्थ्य और शिक्षा सुबिधाओं का बुरा हाल है. आज पुरी दुनिया में सबसे ८६ करोड़ लोग भूख से त्रस्त हैं जो वश्विक विकास के खोखली मिथक को तोड़ता है. अभिजित सेनगुप्ता कमिटी के रिपोर्ट के मुताबिक हमारे देश में ८४ करोड़ लोग २० रूपये प्रतिदिन पर गुजारा करते हैं. जरा सोचिये कैसा होगा इनका जीवन. कितनी बड़ी विडम्बना है न इस देश की जहाँ धन कुबेरों का एक समुदाय रहता है उसी देश में भूख से तड़पने वालों की तादाद भी बहुत ज्यादा है.भ्रष्टाचार चरम पर है, हत्या ,बलात्कार घरेलु हिंसा में हम सबसे आगे हैं इन सबसे विकास अवरुध्ध होता है,मानवीयता लज्जित होती है. देश में बदहाली का आलम ऐसा है की लोग पहले से ही पेट की आग नही बुझा प् रहे थे उन्हें महगाई ने और मार डाला है . विश्व की सबसे सस्ती कार नैनों और उद्द्योगपतियों की एक फौज पैदा करने वाले इस देश में गरीबों का जीवन गाजर-मूली के समान है जिसे जब चाहो काटो और उखाड़ दो कोई फर्क नही पड़ता. आज इस देश में गरीबी और आतंकवाद राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है और इन दोनों का ही आपस में गहरा सम्बन्ध है. सरकार को लगता है की इससे कोई सरोकार ही नही है. इसमे सारा दोष हमारे नीति-निर्माताओं का है सबकुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं. इस मामले में केन्द्र और राज्य दोनों ही सरकारें दोषी हैं.अब तक किसी प्रधानमंत्री ने गरीबी के मुद्दे को लेकर गंभीरता पुर्वक रूचि नहीं दिखाई है. सिर्फ़ चुनाओं के समय गरीबी हटाओ, इंडिया शाइनिंग,संपूर्ण विकास,और बिल्डिंग इंडिया जैसे नारे अब तक दिए जाते रहे हैं और धर्म के नाम साम्प्रदायिकता की राजनीती के सहारे जनभावनाओं को उकेर कर चुनावी जंग जितने की कोशिश की जाती रही है. आज जरुरत है की हमारे नीति निर्माता बंद एसी कमरों से निकल कर गरीबी, भुखमरी,आतंकवाद के विरुध्ध धुप में बैठकर योजनायें तैयार करें तभी इन समस्याओं का समाधान निकल पायेगा. वरना हमारी सरकारें गरीबी और भूख के बिसात पर विकास के मुंगेरी लाल के हसीं सपने की तरह ही सपने देखते रह जायेंगे और हमसे बदहाल और पिछडे देश आगे निकल जायेंगे.

आर्थिक मंदी की मार....

दुनिया भर के वित्तीय बाज़ार में जो खलबली मची हुई है और वित्तीय कंपनियों को जो पैसे का दबाव झेलना पड़ रहा है, वह आर्थिक विकास के लिए गंभीर ख़तरा है...
और इस क्रम मे जब नौकरीयो मे छटनी हो,वेतन मे कटौती हो और रोजगार की संभावनाए खत्म हो जाए तो यह निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण होगा...
जहां हर वर्ष लाखो युवा अपनी शिक्षा पूर्ण करके नौकरी करने के लिए निकलते हो और उन्हे कुछ हाथ न लगे तो यह भारत जैसे विकासशील देश के लिए और भी घातक होगा...

भारत मे आर्थिक मंदी के आने का सबसे बडा कारण है विदेशी पैसा...

भारतीय सेंसेक्स मे सूचीबद्ध हर सेक्टर के 30 कम्पनीयो मे विदेशी धन लगा हुआ है...फिलहाल विदेशी निवेशक अपना पैसा निकालने के मूड मे दीखाई दे रहे है...
सेंसेक्स के शीर्ष 5 सेक्टरो मे जो विदेशी पैसा लगा हुआ है और वह कभी भी भारतीय बाजार मे तबाही ला सकते है वो है----
1-बैंक-------------34%
2-आई टी----------28%
3-आटो-----------24%
4-फार्मा-----------18%
5-रियल ईस्टेट-------17.5%....
भारतीय बाजार मे 1 अक्टूबर को 2,83,468 करोड रू विदेशी पैसा लगा हुआ था...जिसमे से अभी तक 46,661 करोड रू निकाला जा चुका है...

फिलहाल ये पैसा सबसे ज्यादा बैंकिंग और आई टी मे लगा हुआ है और इन दोनो सेक्टर्स को अपने भविष्य के प्रती सचेत रहना पडेगा...

इस समय दुनिया भर के बैंको की हालत खस्ता है...कारण है अनाब शनाब लोन दिया जाना...
भारतीय बैंको की हालत भी ऐसी ही है...
हमारे देश के बैंको के पास एक समय इतना पैसा हो गया था कि लोन देने की सारी हदे पार कर दी थी...त्योहारो पर ये अपना सारा धन लुटाने को तैयार रहते थे...

अभी देश भर मे बैंको का 30,000 करोड रू. क्रेडिट काड धारको पर बकाया है...और सोचने की बात यह है कि देश भर मे क्रेडिट कार्ड धारक मात्र 4% है...

वैसे इस संकट के दौर मे दुनिया भर के देशो ने बाजार को स्थिर करने के लिए लगभग 32 खरब डालर की सहायता देने का निर्णय किया है...
जिसमे यूरोपीय देशो ने 1000 अरब डालर
अमेरिकी ने 700 अरब डालर
दक्षिण कोरिया ने 130 अरब डालर और
भारत सरकार ने भी 1,45,000 करोड बाजार को स्थिर करने मे झोंक दिये है...

और हायरिंग फायरिंग पालिसी के तहत जब लोगो को संस्था से निकाला जा रहा है तब वे संस्था को दोषी करार दे रहे है...
पर ये गलत है क्योंकी पिछले 2 सालो मे जब कुछ लोगो ने 5-5 ,6-6 नौकरीया बदली और वह भी सैलरी मे 40% इजाफे के साथ तब इन लोगो ने स्थिरता की दुहाई क्यो नही दी...
क्योंकी हर संस्था अपने इम्पलोई से स्थिरता और लम्बे समय का साथ चाहती है...

यदि बाजार को स्थिर करना है और अपने भविष्य को सुरक्षित करना है तो निवेशको को कंपनियो मे एवं कर्मचारियो को अपनी संस्था मे विश्वास रखना होगा एवं भय के वातावरण को दूर करना होगा...अन्यथा बाजार मे बहुत जल्द ही विस्फोट की स्तिथी बन जाएगी...

जय भारत...नवीन सिंह...

Sunday, October 19, 2008

एक पाठक की ई मेल ...

केव्स संचार के नियमित पाठकों में से हैं अनुपम अग्रवाल जी। पेशे से इंजिनियर अनुपम जी उत्तर प्रदेश के अनपरा में कार्यरत हैं। केव्स संचार में गत दिनों चल रही बहस पर इन्होने अपने विचार हमें ई मेल किए और यह सुझाव दिया की क्यों नहीं हम पाठकों का कोना नाम से एक लिंक स्तम्भ प्रारंभ करें जिनमे कुछ वाकई बढ़िया, सटीक, दिलचस्प और चुनिन्दा पत्रऔर टिप्पणिया शामिल करें।यहाँ से विचार पैदा हुआ जनता जनार्दन का !
फिलहाल हम इस स्तम्भ की शुरुआत करने का वादा पूरा करते हुए अनुपम जी की यह ई मेल प्रकाशित कर रहे हैं ...... अनुपम जी का ब्लॉग है..... http://www.aapkesamne.blogspot.com/

अनुपम जी ने यह पत्र नवीन जी की एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया स्वरुप लिखा है।

प्रिय मित्र
हम सभी आपसे सहमत हैं कि रास्ट्रीय एकीकरण को प्राथमिकता होनी चाहिए मुझे भी लगता है कि बजरंग दल का निर्माण राम जानकी रथ की सुरक्षा के लिए किया गया था ।आपकी बात शत प्रतिशत सही भी हो सकती है परन्तु यह भी तो सोचें कि इस सब कामों से चाहे वोह बजरंग दल करे या सिमी , इस देश के लोगों का कोई भला नहीं होने वाला है माफ़ी चाहूँगा पर समाज के स्तम्भ कहे जाने वाले , सबसे बड़े जानकर और निर्णयकर्ता पत्रकार ख़ुद हैं।लेकिन यह निष्कर्ष ''ईसाइयों के खिलाफ हिंसा भड़काने में सबसे बड़ा हाथ कांग्रेस का है '' पूर्वाग्रह ग्रसित भी हो सकता है ।और किसी भी तरह की गैर जिम्मेदारी देश के लिए घातक भी हो सकती है हमारा प्रस्ताव होना चाहिए कि हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई का झगडा ख़त्म कर नए नजरिये से सोचना चाहिए।इस भावना से कि राष्ट्र का और राष्ट्र के लोगों का भला हो तो सबसे पहले जितने विवादित स्थल हैं, वहां विश्वविद्यालय या विश्व स्तरीय चिकित्सालय खुलवाने चाहिए ताकि समाज के ठेकेदार ,धर्म के नाम पर लोगों को भड़का कर , आगे अपना उल्लू सीधा न कर पायें ।मेरा अनुरोध है कि इस राष्ट्र के कल्याण का दम भरने वाले सभी राष्ट्रवादी संगठन इस काम में आगे आयें और अपनी असीम उर्जा को रचनात्मक कार्यों में लगायें.

आपका
अनुपम अग्रवाल

हाथी को मत दान करो...

किसी भी लोकतांत्रिक देश का सबसे बडा उत्सव चुनाव होता है...और इस उत्सव को लेकर राजनितिक पार्टीया जोरशोर से तैयारी कर रही है...

भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा की तरह अपने हिन्दु मतदाताओ पर कनसनट्रेट किया हुआ है....
और वही पुराने पर मजबुत मुद्दे(राम सेतु,अमरनाथ,आतंकवाद) लेकर चुनावो मे उतरने वाली है...और आशा है की इस बार भाजपा... कांग्रेस व अन्य समर्थित पार्टीयो की गलतीयो के फलस्वरुप पूर्ण बहुमत लेकर सरकार भी बनाएगी....

पर कुछ क्षेत्रीय पार्टीया जिनका अपने क्षेत्र के बाहर कोई अस्तित्व नही है...वह इन दिनो दूसरे राज्यो और पारंपरिक वोट बैंको को छोडकर नए लोगो को रिझाने मे लगी हुई है...जिसमे सपा,लोजपा,राजद,त्रणमूल कांग्रेस जैसी पार्टीया शामिल है...
पर
बहुजन समाज पार्टी की मायावती को अब उत्तर प्रदेश छोटा लगने लगा है...और जिस बडे घर के वे सपने देख रही है वो अभी कोसो मील दूर है...
और उस बडे घर मे सर्व समाज निवास करता है इसलिए बहन जी ने लखनउ मे मुस्लिमो को करोडो के गिफ्ट देने की घोषणांए कर दी है...जिसमे कई स्कूल कालेज और अरबी फारसी विश्वविद्यालय है...

और साथ ही बाटला हाउस के जांच की मांग कर दी और मांग क्यो न करे जब अमर सिंह अकेले सेवईंया खा रहे हो...वैसै भी मायावती अमर सिंह और मुलायम को अपना सबसे बडा दुशमन बताती है...
बहन जी ने सोनिया गांधी को कह दिया है कि मुस्लिमो को उनके रहते बिना कारण परेशान नही किया जाएगा...
कुछ महीने पहले तक समाजवादी पार्टी में रहे सिद्दीक़ी का कहना है, "आज मुसलमान जानता है कि रास्ता केवल मुसलमान और दलित के गठजोड़ से ही निकल सकता है"...

कुछ समय पहले तक सिद्दिकी समाजवादी हुआ करते थे...पर अब ये भी बहन जी के सान्निध्य मे सोशल इंजीनीयरिंग सीख रहे है...

देखना यह होगा की इस बार बहन जी का हाथी सोशल इंजीनीयरिंग का बोझ उठाते हुए उत्तर प्रदेश से चलकर मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ,राजस्थान से होते हुए क्या दिल्ली पहुंच पाएगा या नही...

और यदि हाथी पीएम की कुर्सी पर विराजता है तो मंत्रीमंडल मे ब्राहम्ण,दलित और मुस्लिमो की इंजीनीयरिंग दिखायी देगी...
जय भारत...नवीन सिंह...

Saturday, October 18, 2008

ऊडीसा हिंसा की जड : कांग्रेस

पिछले कई दिनो से ऊडीसा मे हिंसा जारी है...और इस हिंसा मे अब तक कई लोग मारे जा चुके है....
ईसाइयो के खिलाफ हिंसा भडकाने मे सबसे बडा हाथ कांग्रेस का है...

ऐसा अंदेशा है कि कांग्रेस के राज्य सभा सांसद आर के नायक के दिशा निर्देशन और ऊनकी ऊपस्तिथी मे ही इस सुन्दरकाण्ड को अंजाम दिया गया हो...

84 साल के स्वामी लक्ष्मनानंद जो कि धर्मान्तरण विरोधी और पुनः धर्म में वापसी के खिलाफ अभियान चला रहे थे,ऊनकी हत्या जनमाष्टमी के दिन करने की साज़िश छह महीने पहले तैयार की गई थी...
पूरे मामले की साज़िश की तैयारी स्थानीय संगठन ने तैयार किया हुआ था जबकि दूसरे संगठन को इस तैयारी को अमली जामा पहनाने के लिए तैयार किया गया...
संगठन ने तीन-चार माओवादियों को स्वामी जी की हत्या करवाने के लिए धन दिया था....

स्वामीजी की हत्या माओवादी संगठन के नेतृत्व में की गई...जबकि टीम के बाकी सदस्यों में स्थानीय युवकों को शामिल किया गया...स्वामी जी और उनके चार शिष्यों को तितर-बितर करने के लिए एके- 47 से गोलियां चलाई गई...
बाद में उनकी हत्या की पुष्टि के लिए हत्यारों ने एड़ी की नसों को काट दिया...
इसके तुरंत बाद सीपीआइ (माओवादियों) ने उनकी हत्या की जिम्मेदारी ले ली...
इस जधन्य हत्याकांड के बाद राज्य के कंधमाल जिले में ईसाइयों के खिलाफ हिंसा फैल गयी...जो अभी तक अनवरत जारी है...
इस हिंसा से नवीन पटनायक सरकार के प्रसाशनिक काबीलियत पर सवालिया निशान लग गया एवं भाजपा के चरित्र पर ऊंगलिया ऊठने लगी...

केन्द्र सरकार ऊडीसा सरकार को हर तरफ से घेरने मे लगी हुई है....आनन फानन मे हिंसा का ईकलौता जिम्मेदार बजरंग दल को ठहरा दिया गया...

देश मे लगातार हो रही आतंकी घटनाओ के पीछे शामिल सिमी जैसे आतंकवादी संगठनो के समर्थन मे जो लोग ऊतरे हुए है ऊन्हे यह सुनकर शर्म आनी चाहिए कि पुलिस रिमांड में पूछताछ के दौरान प्रतिबंधित संगठन सिमी के कोषाध्यक्ष मो अली ने भारतीय संविधान के प्रति अविश्वास व्यक्त करते हुए बताया
कि सिमी संगठन इस्लाम धर्म पर विश्वास करता है और पूरी दुनिया को इस्लाम धर्म के अनुसार चलाना चाहता है और इसके लिए वह कोई भी कुर्बानी देने को तैयार है...
ऐसे वक्तव्य देने के बाद भी लालु,पासवान और अर्जुन सिंह सिमी का समर्थन करते हुए दिखते है....ऐसी ओछी राजनिती से देश का कोई कल्याण नही होने वाला है...
और
देश जब आर्थिक प्रगती के पथ पर अग्रसर हो और ऊस समय ऐसे हालात हो तो यह देश का दुर्भाग्य ही होगा....
और ऐसे मे जब कांग्रेस सांप्रदायिक तुष्टीकरण मे लगी हो तो और भी बडा दुर्भाग्य होगा...

अभी हाल ही मे एकता परिषद की बैठक मे इन मुद्दो पर कांग्रेस और भाजपा एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप की राजनीती करते रहे...और परिणाम के नाम पर केवल सुर्खिया ही निकली क्योंकी चुनावो का समय आ चुका है...

दोनो ही शीर्ष पार्टीयो को सोचना होगा कि सांप्रदायिक तुष्टीकरण और राष्ट्रीय एकीकरण एक साथ नही हो सकता...

जय भारत...नवीन सिंह...

Friday, October 17, 2008

आज फिर........ करवाचौथ

आज करवाचौथ है......एक कविता जो मन में बचपन से मचलती रही, कागज़ पर आज आ पायी है ! स्वीकारें

आज फिर माँ
सुबह से भूखी है
और हमारी दिनचर्या
वैसी ही है

आज फिर भाभी
रात तक
पानी भी नहीं पीने वाली हैं
भइया चिल्ला कर
पूछते हैं
क्यों मेरी चाय बना ली है ?

आज फिर दीदी
व्रत रखेंगी
जीजाजी की
लम्बी उम्र के लिए
उनको
खांसते खांसते
तीन महीने हुए

सुहागन मरने की
दुआएं करती
आज फिर नानी
अस्पताल में
भूखी हैं
बीमारी के हाल में

आज फिर दादी
सुना रही हैं बहुओं
को करवाचौथ की व्रत कथा
बहुएं भूखी प्यासी हैं
सुबह से
सुनती हैं मन से यथा

आज फिर पत्नी
खाने के लिए
पति का
मुंह देखेगी पहले

आज फिर पति
का दिन
वैसे ही बीता
दफ्तर में
चाय पर चाय पीता

आज फिर बिटिया
को
बाज़ार से दिला लाया टाफी
सोचा जी लो ज़िन्दगी
तुम्हारे करवाचौथ में
वक़्त है काफ़ी

मयंक सक्सेना

Tuesday, October 14, 2008

आइये दीपावली मनाएं !

सूचना देना चाहूँगा कि केव्स संचार अगले सप्ताह २६ तारीख से ब्लॉग पर दीपावली विशेष प्रारंभ कर रहा है, आप सबसे अनुरोध है कि इस अवसर पर अपने
लेख
कवितायेँ
कहानियां और
संस्मरण
हमें भेजें ......हम चाहते हैं कि प्रकाश का पर्व हम मिलकर मनाएं .......इस विशेषांक का नाम क्या हो इस पर भी आपके विचार आमंत्रित हैं ! सर्वश्रेष्ठ नाम को पूरे दीपावली सप्ताह में उस सदस्य या पाठक के नाम के साथ प्रकाशित किया जाएगा ....

चुनावी शंखनाद .... पर कश्मीर चुप !

चुनाव आयोग ने आज दोपहर राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ा दीं जब उसने ५ राज्यों में चुनाव की तिथियों की घोषणा कर दी। एक प्रेस वार्ता में मुख्या चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी ने ५ राज्यों में चुनाव के कार्यक्रमों की सूची जारी की पर अपेक्षा के विपरीत जम्मू एवं कश्मीर में चुनाव के कार्यक्रम के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया गया। माना जा रहा है की बीते दिनों राज्य के हालातों के मद्देनज़र चुनाव आयोग वहाँ चुनाव और राज्यों के साथ साथ कराने में हिचक रहा है। फिलहाल नक्सल हिंसा से प्रभावित छत्तीसगढ़ के अलावा सभी राज्यों में एक ही दिन में मतदान संपन्न कराया जाएगा जबकि छत्तीसगढ़ में चुनाव दो चरणों में होंगे। सभी राज्यों में मतदान के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का प्रयोग किया जाएगा। सभी राज्यों में मतगणना ८ दिसम्बर को होगी। चुनाव कार्यक्रम इस प्रकार है ....
  1. छत्तीसगढ़ ( ९० सीटें ) १४ एवं २० नवम्बर
  2. मध्य प्रदेश (२३० सीटें ) २५ नवम्बर
  3. दिल्ली ( ७० सीटें ) २९ नवम्बर
  4. मिजोरम (४० सीटें ) २९ नवम्बर
  5. राजस्थान ( २०० सीटें ) ०४ दिसम्बर

चुनाव की घोषणा के साथ कई जगह युद्ध स्तर पर काम हो गया है जिसमे सबसे ऊपर है राजनीतिक दल पर उसके बाद नंबर आता है हम सब पत्रकारों का और विशेष तौर पर उनका जो इन राज्यों में काम कर रहे हैं। ख़ास तौर पर अपने जी छत्तीसगढ़ के साथियों को बधाई देना चाहूँगा कि उनकी बहुत दिनों की इच्छा पूरी हुई। चुनाव आयोग को बधाई दें आपकी सहालग का मौसम आ गया है.......

फिलहाल सूचना देना चाहूँगा कि केव्स संचार अगले सप्ताह २६ तारीख से ब्लॉग पर दीपावली विशेष प्रारंभ कर रहा है, आप सबसे अनुरोध है कि इस अवसर पर अपने

लेख

कवितायेँ

कहानियां और

संस्मरण

हमें भेजें ......हम चाहते हैं कि प्रकाश का पर्व हम मिलकर मनाएं .......इस विशेषांक का नाम क्या हो इस पर भी आपके विचार आमंत्रित हैं ! सर्वश्रेष्ठ नाम को पूरे दीपावली सप्ताह में उस सदस्य या पाठक के नाम के साथ प्रकाशित किया जाएगा ....

क्या कहें......

दोस्त मयंक इसको निजि आक्षेप न माने....

पिछले लेखो मे मैने कोई आपत्तीजनक शब्द नही लिखे थे....और अगर आप जय श्री राम को आपत्तीजनक मानते है....तो ये आपकी मानसिक्ता है....

और बार बार ऐसा लिख के क्या साबित करना चाहते है कि आप बहुत बडे धर्मनिर्पेक्ष,और निष्पक्ष पत्रकार हो गए है....
ये तुष्टीकरण बंद कर दीजीए....

बजरंगीयो पर राजनिती नामक लेख मे मैने किसी तरह से कोई आपत्तीजनक शब्द नही लिखा है...और भाषा भी सभ्य है....
और जैसा आप हम पर आरोप लगाते रहते है कि हम संघी है या भाजपाई है.....तो मित्र आप के लेखो से भी स्पष्ट है कि आप भी कांग्रेसी है....
तुष्टीकरण की राजनीती तो कांग्रेसी ही करते हैं....
आप को भी कांग्रेस का प्रवक्ता बन जाना चाहिए.....

कैव्ससंचार चुकी हमारे विभाग के नाम पर बना हुआ है और मै इस विभाग का पूर्व छात्र हू ईसलिए इसे अपना मानते हुए ऐसा लिखता हु...क्योकी किसी भी विषय को सर्वप्रथम परिवार मे डिसकस किया जाता है.....
और मेरा मानना है कि हमारे विभाग के सभी विद्यार्थि आप की तरह
धर्मनिर्पेक्ष नही होंगे
....क्योंकी मेरे पास भी कई लोगो फोन आते है और ऊनके द्वारा मेरी इन टिप्पणीयो पर समर्थन मिलता है....

और मेरे लेखो से आप भी कई जगह सहमत है....जिसकी मुझे आशा नही थी....
ऊसके लिए आपका साधुवाद.....

और रही बात बार बार मेरे इसी विषय पर लिखने की तो ये विषय इस वक्त सबसे गर्म और सामयिक है.....और पत्रकारो को सामयिक विषय पर लिखते पढते रहना चाहिए....

और आपकी मंशा मै अच्छी तरह से समझता हूं.....
बहरहाल
मै भी यही चाहूंगा की अब विवाद आगे न बढे.....इसके लिए आपका सहयोग वांछित है....

मेरी कुंठा को समझे और मुझे राष्ट्रवाद के पथ पर आगे बढने दे और अपने बहके हुए साथीयो को संगठित करने दे......

अपना ब्लाग अजर अमर रहे...... ऐसी मेरी मंगलकामना है......
जय हिन्द....जय भारत.....नवीन सिंह....

धर्मनिर्पेक्षता याने हिन्दू विरोध??????

आज सारा देश जिस विडंवना से गुजर रहा है,वह सोचने लायक है। जानकारी के लिये बताना चाहता हूँ,मैं धर्म-निरपेक्षवादी बिल्कुल नहीं हूँ बल्कि धर्म-सापेक्षवादी हूँ। आज धर्म-निरपेक्षता का मतलव हिन्दुओं का विरोध है। जो राजनैतिक स्तर पर ही नहीं हम से भी जुडा हुआ है। उनके लिये खास कर कहना चाहता हूँ जो राजनीति की बात को राजनीति मानते हैं। जब देश में चल रहे हालात के लिये राजनीति ही ज़िम्मेदार है तव उसकी चर्चा क्यों ना की जाये मेरे प्रिय साथियों के लिये भी कहना चाहता हूँ जो हिन्दुओं की आँख बंद करके बुराई करते हैं पुरानी वो बातें करते हैं जो उस दौर में सब धर्मों में थीं। अगर इतना ही एतराज़ है अपने धर्म से तो छोड क्यों नहीं देते या फिर आप अपने को अलग बता कर क्या दिखाना चाहते हैं? ऐंसे हिन्दुओं के लिये सिर्फ यही शब्द हैं कि या तो वो आलोचना छोंडें या फिर आगे आकर जहाँ जो सुधार लगता है वो करें किसने रोका है। हिन्दू धर्म की खामियां दूर करने आयें कौन मना करता है। हिन्दुं के पक्ष का मतलव मुस्लिमों का विरोध नहीं है भाईयों खुद में कोई गलती है तो अपनेआप को मार डालना या छोड देना ठीक बात है ना ये संभव है। व्यवस्था बदलने के लिये व्यवस्था में रहना चाहिये ना कि व्यवस्था से हट कर इसे बदलने का निर्थक प्रयास करने चाहिये।

Monday, October 13, 2008

निष्पक्ष पत्रकार बने.......

मेरा किसी पर निजी आक्षेप का कोई इरादा नहीं है पर अब कोई रास्ता नही बचा है....इसे कृपया निजी आक्षेप ना माने ! मैंने बार बार यह समझाया की केव्स संचार किसी धर्म या राजनीति का अड्डा नही है और कृपा करके इसे किसी एक धर्म का और धार्मिक राजनीति का मंच ना बनाएं ............ हम धर्मनिरपेक्ष है हमें रहने दें !

आपकी व्यक्तिगत राजनैतिक और धार्मिक भावनाओं का हम सम्मान करते हैं पर उसके लिए आप व्यक्तिगत ब्लॉग बना सकते हैं.....यह मंच हिदू या मुस्लिम का नहीं है इंसानियत का !

इससे पहले भी कई बार मुझे आपके लेख संपादित करने पड़े क्यूंकि आपत्तिजनक अंश थे ...... क्षमा करें पर मेरे पास यही एक काम नहीं है ....... यह सामना या पांचजन्य नही है ! जब हम इस तरह के उत्तेजक और कट्टरपंथी लेख लिखते है तो किस हक से अपने को किसी और मज़हब के कट्टरपंथी से बेहतर या अलग कहते हैं ?

हम आतंकवाद के ख़िलाफ़ है ..... इसलिए नहीं की उसे किसी धर्म विशेष के आदमी से जोड़ते हैं बल्कि इसलिए क्यूंकि उसमे हिन्दू और मुसलमान दोनों मरते हैं जो हमारी नज़र में पहले इंसान हैं !

नवीन जी क्या अब आपको पढ़कर नही लगता की आप बजरंग दल के प्रवक्ता हो गए हैं ?

आप से मेरी जो कुछ फ़ोन पर बात हुई उसे सार्वजनिक ना करते हुए बस यह कहूँगा की यह तय हुआ था की इस ब्लॉग पर धार्मिक और राजनीतिक लामबंदी नहीं की जायेगी ...... हम एक अच्छे पत्रकार के तौर पर किसी धार्मिक या राजनैतिक दल के समर्थन के नारे नहीं लगा सकते !

बजरंग दल और सिमी की तुलना वाकई राजनीति है यहाँ मैं सहमत हूँ पर बजरंग दल ने आज तक ऐसा भी कोई देशोद्धार नही कर दिया जिसकी आप बात करते हैं ........ रही बात हथियार बांटने की तो धार्मिक चिन्हों की आड़ में हथियार बांटने की छुपी हुई मंशा क्या है सब जानते हैं ...... उसके लिए तर्क आप भले ही हजारों गढ़ दें

बजरंग दल निश्चित रूप से देशद्रोही संगठन नहीं है पर विद्वेष और हिंसा तो फैलाई ही है ....... इसके लिए मैं उतना ही दोष इस्लामिक कट्टरपंथियों और कठमुल्लों को भी देता हूँ

छोडिये खैर बजरंग दल पर प्रतिबन्ध का समर्थन मैं भी नहीं करता पर उनके सेवा भाव के बहुत उदाहरण देखने को नहीं मिलते

ग्राहम स्टेन्स की हत्या के बारे में क्या कहना है ?

मैंने बार बार कहा की केव्स संचार को किसी धार्मिक और राजनैतिक दल का मंच ना बनाए

मेरे भी कुछ राजनीतिक विचार और आस्थाएं हैं पर उनके लिए मैं इस मंच का इस्तेमाल नही करता

केव्स संचार को पाञ्चजन्य ना बनाएं

निष्पक्ष पत्रकार बने ........ प्रयास करें यह मुश्किल नहीं

आगे से मैं नहीं चाहता की यह स्थिति फिर आए

बजरंगीयो पर राजनीती....

अपने 25 वर्ष की यात्रा मे बजरंग दल पर कई सवाल ऊठते रहे है....
84 मे भाजपा के विनय कटियार के नेत्रत्व मे राम जानकी रथ की सुरक्षा के लिए बजरंग दल का निर्माण हुआ.... किसी धर्म का विरोध और किसी को मारने के लिए नही हुआ था....

बजरंग दल,शिव सेना,वीहिप,आरएसएस को शुरु से ही काँग्रेस और अन्य पार्टियो ने गलत ढंग से पेश किया... इनके विरोध का कारण केवल एक ही है कि य़े सारे ही दल भगवा रंग से रंगे हुए है.....
इनके नामो से विशुद्ध हिन्दु होने का पता चलता है.....हमारे धार्मिक चिन्हो का प्रयोग करते है....

03 मे अजमेर मे प्रवीण तोगडीया ने एक सभा मे कायर्कताओ को त्रिशूल बाट दिया....तो ऊन्हे गिरफ्तार कर लिया... अरे ये हमारे देवी देवताओ के यशस्वी अस्त्र शस्त्र है....
और भगवा रंग के वस्त्रो से श्रद्धा भाव,एकाग्रता और सेवा भाव बढता है.... अल्पसंख्यक राजनीति पर टिकी कांग्रेस इन संगठनो को आरोपित करती रहती है...

बजरंग दल और वी एच पी ने कभी राजनीती नही की और न करेगी....
इनका ऊद्देश्य तो केवल इतना है कि हिन्दुजनाभावानाओ और हिन्दुओ का सम्मान मिलता रहे....
कांग्रेस इसको समझ नही पा रही है और आतंकवाद के प्रती अपनी हार को छुपाने के लिए और हिंदुत्व विरोधी एवं तुष्टीकरण की राजनीति करने के लिए ऐसा कर रही है....

श्रीराम सेतु....अमरनाथ मुद्दे इसका बडा ऊदाहरण है....
बजरंग दल और सिमी मे तुलना हो ही नही सकती....सिमी एक विशुद्ध आतंकवादी संगठन है.....और जो भी बजरंग दल पर आरोप लगा रहे है...वह इसका खामियाजा होने वाले चुनावो मे भुगतेंगे....
और भविष्य मे कभी बजरंग दल पर आतंकवादी होने पर देश मे प्रतिबंध लगता है.... तो ये निशचित रूप से अन्डरग्राऊंड मूवमेंट चलाएंगे..... ऊस वक्त ये देश के लिए और भी खतरनाक होगा....
इसकी जिम्मेदार कांग्रेस, और सिमी का समर्थन करने वाले, और बजरंगीयो का विरोध करने वाले होंगे....
जय भारत.....नवीन सिंह....

Sunday, October 12, 2008

पहले धर्म को समझें।

दोस्तों पिछले कुछ दिनों से केव्स पर गरमा गरम पढने को मिल रहा था हालांकि बहस अपनी सार्थकता खो चुकी थी कमेंन्ट्स कर नहीं पा रहा था, तो मन किया कुछ मैं भी लिखूं और आज चला आया कुछ लिखने सबसे पहले मयंक का बहुत धन्यवाद मुझे जोडने के लिये। सचमुच धर्म से जुडा मुद्दा वेहद संजीदा क़िस्म का होता है जिस पर हम जैसे कम बुद्धियों को तो क़तई नही बोलना चाहिये क्योंकि कोई भी धर्म महज़ अपने आराध्य को पूजने, आरती करने तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि यह एक वृहद विज्ञान होता है। इसे धर्म इसलिये कहा जाता है ताकि अनुयायी निर्दिष्ट पूजन विधान को करें और स्वस्थ रह सकें। इंसान के भीतर विद्यमान सभी दस रसों में से भय का हमारे ऋषियों(वैज्ञानिकों) ने इस्तेमाल करते हुए इसे सर्वोच्च सत्ता के प्रति भय और उसे अपना माई-बाप मानने की सीख दी, क्योंकि विज्ञान हर आदमी नहीं समझता। मुझे शायद धर्म की इससे ज़्यादा सरल परिभाषा कुछ और नहीं लगी मैं इस मंच के माध्यम से सबसे पहले धर्म क्या है ये समझने की कोशिश करना चाहता हूँ। आप सभी का सादर कमेंट्स आमंत्रित हैं कृपया दें और कारवां ये वार्ता आगे बढायें। धन्यवाद।।।।।।।।।।

हम तो झोला उठा के चले...सबके नाम (एजुकेशनल टूर)

भोपाल,१२ अक्टूबर , दृश्य श्रृव्य अध्ययन केन्द्र के छात्र आज शैक्षिक भ्रमण पर पूना , गोवा और मुंबई के लिए रवाना हो रहे हैं । सभी छात्र हबीबगंज स्टेशन पर झेलम एक्सप्रेस की समयानुसार मिलेंगे और इस प्रकार से एक यादगार सफर की शुरुआत होगी। इस टूर पर कुल २५ लागों का दल केव्स के विभागाध्यक्ष डॉ श्रीकांत सिंह के साथ जा रहा है । आज स्टेशन पर जाने वालों से ज्यादा छोड़ने वालों के होने की सम्भावना है (आप भी आमंत्रित हैं )। निश्चित रूप से ये केव्स की स्नेहिल परम्परा की पहचान है ।

इस टूर पर हम ऍफ़.टी.आई, फिल्म्स डिविज़न , चैनल और प्रोडक्शन हाउस तो देखेंगे ही , साथ ही साथ गोवा की मस्ती , मुमबई की माया और पूना की मद्धम रवानी का लुत्फ़ भी लेंगे । इस दौरान कई वर्कशॉप और पूना में एक अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी जो की मीडिया और वीडियो प्रोडक्शन में इस्तेमाल हो रहे आधुनिकतम इक्विपमेंट्स पर है, उसमे भी हिस्सा लेने का मौका मिलेगा ।

आज जब की इस टूर की शुरुआत हो रही है, सबसे पहले मैं अपने सभी सीनियर्स को धन्यवाद् देता हूँ क्यूंकि हमें शैक्षिक भ्रमण के लिए प्रेरित बल्कि ये कहें की उद्वेलित उन्होंने ही किया । अगर आप सब इस टूर में हमारे साथ होते तो ज़रूर इस यात्रा के श्रीसुख में वृद्धि होती। मैं टूर पर अपने किसी कारणवश अपने साथ न चल पाने वाले अपने बैचमेट्स से कहूँगा की हमें उनकी कमी खलेगी । मैं अपने जूनियर्स से कहूँगा की अगली बार के लिए वो भी तैयार रहे क्यूंकि ये मौका एक ही बार मिलता है ,और अंत में मैं इस भ्रमण दल के सभी सदस्यों से कहूँगा की खूब मस्ती करो और एक एक लम्हे को जी डालो !

भगवान् टूर को यादगार बनाएं ।

Saturday, October 11, 2008

जरा याद करो कुर्बानी

आज से ब्लॉग पर मुद्दा सिर्फ़ लोकनायक और उनका जीवन होगा। हम एक सार्थक बहस उनके जीवन इमर्जेंसी के जेपी ,स्वतंत्रता संग्राम के जेपी और उसके भी बाद व्यवस्था के ख़िलाफ़ तूफ़ान का रुख मोड़ते जेपी के ऊपर चर्चा करेंगे। मेरा अनुरोध के केव्स के समस्त ब्लॉग वीरों से की हम जेपी के जीवन पर इस चर्चा के आह्वाहन को सफल बनायें।
जयप्रकाश नारायण (11 अक्टोबर, 1902 - 8 अक्टोबर, 1979) भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे। वे जेपी के नाम से भी जाने जाते है। उन्हें 1970 में इंदिरा गांधी के खिलाफ विपक्ष का नेतृत्व के लिए जाना जाता है। वे समाज-सेवक थे और लोकनायक भी कहलाए जाते थे।

शिक्षा
पटना मे अपने विद्यार्थी जीवन में जयप्रकाश नारायण ने स्वतंत्रता संग्राम मे हिस्सा लिया। 1922 मे वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए, जहाँ उन्होंने 1922-1929 के बीच कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय-बरकली, विसकांसन विश्वविद्यालय में समाज-शास्त्र का अध्यन किया। पढ़ाई के महंगे खर्चे को वहन करने के लिए उन्होंने खेतों, कंपनियों, रेस्टोरेन्टों मे काम किया। वे मार्क्स के समाजवाद से प्रभावित हुए। उन्होने एम.ए. की डिग्री हासिल की। उनकी माताजी की तबियत ठीक न होने की वजह से वे भारत वापस आ गए और पी.एच.डी पूरी न कर सके।

जीवन
उनका विवाह बिहार के मशहूर गांधीवादी बृज किशोर प्रसाद की पुत्री प्रभावती के साथ अक्टोबर 1920 मे हुआ। प्रभावती विवाह के उपरांत कस्तुरबा गांधी के साथ गांधी आश्रम मे रहीं।
१९२९ में जब वे अमेरिका से लौटे, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तेज़ी पर था। उनका संपर्क गाधी जी के साथ काम कर रहे जवाहर लाल नेहरु से हुआ। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बने। 1932 मे गांधी, नेहरु और अन्य महत्वपूर्ण कांग्रेसी नेताओ के जेल जाने के बाद, उन्होने भारत मे अलग-अलग हिस्सों मे संग्राम का नेतृत्व किया। अन्ततः उन्हें भी मद्रास में सितंबर 1932 मे गिरफ्तार कर लिया गया और नासिक के जेल में भेज दिया गया। यहाँ उनकी मुलाकात एम. आर. मासानी, अच्युत पटवर्धन, एन. सी. गोरे, अशोक मेहता, एम. एच. दांतवाला, चार्ल्स मास्कारेन्हास और सी. के. नारायणस्वामी जैसे उत्साही कांग्रेसी नेताओं से हुई। जेल मे इनके द्वारा की गई चर्चाओं ने कांग्रेस सोसलिस्ट पार्टी (सी.एस.पी) को जन्म दिया। सी.एस.पी समाजवाद में विश्वास रखती थी। जब कांग्रेस ने 1934 मे चुनाव मे हिस्सा लेने का फैसला किया तो जेपी और सी.एस.पी ने इसका विरोध किया।
1939 मे उन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेज सरकार के खिलाफ लोक आंदोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने सरकार को किराया और राजस्व रोकने के अभियान चलाए। टाटा स्टील कंपनी में हड़ताल करा के यह प्रयास किया कि अंग्रेज़ों को इस्पात न पहुंचे। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 9 महिने की कैद की सज़ा सुनाई गई। जेल से छूटने के बाद उन्होने गांधी और सुभाष चंद्र बोस के बीच सुलह का प्रयास किया। उन्हे बंदी बना कर मुंबई की आर्थर जेल और दिल्ली की कैंप जेल मे रखा गया। 1942 भारत छोडो आंदोलन के दौरान वे आर्थर जेल से फरार हो गए।
उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हथियारों के उपयोग को सही समझा। उन्होंने नेपाल जा कर आज़ाद दस्ते का गठन किया और उसे प्रशिक्षण दिया। उन्हें एक बार फिर पंजाब में चलती ट्रेन में सितंबर 1943 मे गिरफ्तार कर लिया गया। 16 महिने बाद जनवरी 1945 में उन्हें आगरा जेल मे स्थांतरित कर दिया गया। इसके उपरांत गांधी जी ने यह साफ कर दिया था कि डा. लोहिया और जेपी की रिहाई के बिना अंग्रेज सरकार से कोई समझौता नामुमकिन है। दोनो को अप्रेल 1946 को आजाद कर दिया गया।
1948 मे उन्होंने कांग्रेस के समाजवादी दल का नेतृत्व किया, और बाद में गांधीवादी दल के साथ मिल कर समाजवादी सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की। 19 अप्रेल, 1954 में गया, बिहार मे उन्होंने विनोबा भावे के सर्वोदय आंदोलन के लिए जीवन समर्पित करने की घोषणा की। 1957 में उन्होंने लोकनिति के पक्ष मे राजनिति छोड़ने का निर्णय लिया।
1960 के दशक के अंतिम भाग में वे राजनिति में पुनः सक्रिय रहे। 1974 में किसानों के बिहार आंदोलन में उन्होंने तत्कालीन राज्य सरकार से इस्तीफे की मांग की।
वे इंदिरा गांधी की प्रशासनिक नीतियों के विरुद्ध थे। गिरते स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने बिहार में सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन किया। उनके नेतृत्व में पीपुल्स फ्रंट ने गुजरात राज्य का चुनाव जीता। 1975 में इंदिरा गांधी ने आपात्काल की घोषणा की जिसके अंतर्गत जेपी सहित ६०० से भी अधिक विरोधी नेताओं को बंदी बनाया गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई। जेल मे जेपी की तबीयत और भी खराब हुई। ७ महिने बाद उनको मुक्त कर दिया गया। 1977 जेपी के प्रयासों से एकजुट विरोध पक्ष ने इंदिरा गांधी को चुनाव में हरा दिया।
जयप्रकाश नारायण का निधन उनके निवास स्थान पटना मे 8 अक्टूबर 1979 को हृदय की बीमारी और मधुमेह के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन प्रधानमंत्री चरण सिंह ने ७ दिन के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया, उनके सम्मान मे कई हजार लोग उनकी शोक यात्रा मे शामिल हुए।
1998 में उन्हें भारत रत्न से सम्मनित किया गया।

तुशटीकरण की राजनीती....


पिछले कई सालो से देश की कुछ पार्टीया तुश्टीकरण की राजनिती कर रही है...

.... आए दिन अल्पसंख्यकों को कोई न कोई गिफ्ट देती रहती है...और घोशणाओ का तो कोई ठिकाना ही नही है... अब ये गिफ्ट देने के मामले मे एक दूसरे से काम्टीशन करती रहती है...और कभी कभी तो इस हद तक गिर जाती है...कि विपक्षीयो को शर्म आ जाती है....

इनमे सबसे पहला नाम कांग्रेस का आता है...
जब जम्मु के लाल चौक मे कट्टरपंथीयो ने भारत के झंडे को अपमानित करते हुए पाकिस्तान के झंडे को जिस गर्मजोशी के साथ फहराया.....
ऊस समय कांग्रेस अलगाववादियों को आई लव यू कह रही थी....

अब जब दिल्ली इनकाऊंटर मे शर्मा जी शहीद हो जाते है तो कांग्रेस के अर्जुन सिंह...ऊनकी शहादत पर शक करते है... और जामिया मीलीया के संदिग्ध आतंकीयो को कानूनी संरक्षण देने के बयान पर सहमती व्यक्त कर देते हैं....

असली मास्टरमाइंड तो ये हैं जो आतंक की भाषा बोलते हैं........जो लोग पकड़े गए हैं उन्हें कानूनी सहायता मिलनी ही चाहिए।
हमारा संविधान-कानून उन्हें इसका अधिकार देता है लेकिन ये सहायता देना किसी संस्थान का काम नहीं है। ये जामिया मिलिया का काम नहीं है।’

ईसके बाद सपा के मुलायम और अमर सिंह है... अमर सिंह ने शर्मा जी के शहीद होने पर 10 लाख देने की घोशणा की... अल्पसंख्यक नेताओ के साथ कुछ दिन बाद एक कार्यक्रम में उन्होंने श्री शर्मा की शहादत पर सवाल उठाकर अल्पसंख्यक समुदाय का भी राजनैतिक लाभ उठाने की चाल दी....

इसके बाद है लोजपा के पासवान.... जिन्होंने देश के सबसे बडे नेटर्वक वाले आतंकवादी संगठन के बैन हो जाने पर विरोध किया....वैसे ये कोई नई बात नही है,ऐसा ये अक्सर करते रहते है......

वोट की राजनीती आदमी को किस हद तक गिरा देती है....सोचने की बात है... एसी राजनीती करके ये अपने घर कैसे जाते होंगे....अपने बच्चो को मुंह कैसे दिखोते होंगे...ईनके रिशतेदारो को इनकी बातो पर यकीन कैसे होता होगा....

ये आज तक यक्ष प्रश्न बना हुआ है....

औरजब इस दलदल मे अटल जी जैसा कमल का फूल खिला हो तो..... सोचने की बात है....

अन्त मे मै कुछ लोगो को कहना चाहुंगा की तुशटीकरण की राजनीती बन्द करे....

जय भारत....जय छत्तीसगढ....नवीन सिंह....

Friday, October 10, 2008

मेरी सोच

मन्दिर हिंदू का है और इस्लाम की आयतें मुस्लमान की ऐसी दो राही सोच उन्ही लोगों की होती है जो सिर्फ़ धर्म के नाम पे अपनी आपसी खीज निकलना चाहते है , बहाने से लड़ना जानते हैं पर आगे बढ़के उन कुरीतियों को दूर करने की पहल से हमेशा बचते हैं। मैं हिंदू हं पर मैं मन्दिर भी जाती हं और दरगाह भी पर ध्र्म्नान्तरण की आड़ में एक दुसरे पर छीटा कशी कहाँ तक सही है। किसी मुस्लमान पे ऊँगली उठाने से पहले ये सोचना साथ ही समझना भी ज़रूरी है की अक्सर दूसरो पे वही ऊँगली उठाते है जिनके घर शीशे के होते हैं। एक धर्म तब महान होता है जब वो धर्मों की इज्ज़त करना सिखाये। पिछले हफ्ते से चल रही बहस को जहाँ एक तरफ़ सही मोड़ देना ज़रूरी था वहीँ लोगों को ये समझना भी ज़रूरी हो गया था की ये बहस कॉलेज के दो गुटों की नही जो एक गाली दे तो दूसरा हथियार उठा ले। हिंदू हो या मुस्लमान, जनती और पालती तो दोनों को एक एक माँ ही है ना। कौन हिंदू कौन मुस्लमान कौन इसाई-- क्या धर्म होने से संस्कार बदल जाते हैं, जैसे संस्कार नही बदलते वैसे ही इंसान हो इंसान पे क्यों नही मरते। धर्म की दुहाई तो सब देते हैं। किसी धर्म या जात से इंसान बड़ा नही होता , कर्मों से होता है। क्या हमारे माँ-बाप हमे धर्म के नाम पे लड़ना सिखाते है। जब वो हमे सही राह दिखाते है तो हम अपने अहम् में क्यों एक दुसरे के दुश्मन हो जाते हैं।

रही बात एक वक्त के मेरे बहुत करीबी मित्र नवीन सिंह की
तो क्षमा चाहूंगी नवीन मैं आपसे छोटी हूँ पर ये ज़रूर कहना चाहूंगी कि आज आप ग़लत हैं और मुझे लगता है की आप को इस बात पर विचार और ध्यान देने की ज़रूरत है की किस तरह आप उन गरीब लोगों की व्यथा को एक पत्रकार के नाते दुनिए तक पहुँचा सकें न की कौन पाकिस्तान की राह पर चल रहा है या मिशनरियों का सहायक है इस बात पे ध्यान दे। अक्सर ऐसी बातों से ही ध्यान भटकता है इससे आप उन लोगों की तो मदद करेंगे ही साथ ही अपनी नजाने कैसे संकीर्ण हो चुकी मानसिकता से भी छुटकारा पा पाएंगे। उम्मीद करती हूँ की आप मेरी बातों पे गौर फरमाएंगे।

पहल

खैर जो भी हुआ वोही भला है कम से कम हमारे ब्लॉग का सन्नाटा तो टूटा नवीन भइया ने ब्लॉग मैं गर्मी पैदा कर दी जो जाड़े से पहले जरूरी थी। ब्लॉग की भी एक मर्यादा होनी ही चाहिए। हम अपने ब्लॉग मैं तथ्यों को रखें कीचड़ को नहीं दिल के मेल को रखें मैल को नहीं। हमारे पास तथ्य न हो तो इसका मतलब यह तो नहीं की हम कीचड़ उछालने की राजनीती करें। याद रखें किसी के ऊपर कीचड़ उछालने से पहले हमेशा हाथ अपना ही गन्दा होता है और हमेशा पोस्ट पढ़ तो लेते हैं कभी प्रतिउत्तर भी दिया करें
आपके उत्तर की प्रतीक्षा मैं
आशु प्रज्ञ मिश्र

कलम और चिट्ठी ......

विवेक /अभी हालिया में श्याम बेनेगल की फ़िल्म वेलकम टू सज्जनपुर ने एक बार फिर आज के आधुनिक युग में जब संचार के कई आयाम मौजूद है ,तभी e-मेल ,ब्लॉग के जंजाल ,टेलीफोन से बाहर निकलकर हमारी पुरानी संचार व्यवस्था जिसे हम चिट्ठी या फिर पत्र कहते हैं को हमारे मानस पटल पर केंद्रित करते हुए (चिठ्ठी आई है) की याद दिलाई है खैर कलम की ताकत सीमित नही हो सकती की वह कभी पत्रकार या लेखक के हाथो का साधन मात्र बन जाए बल्कि कलम ने स्वय अपनी ताकत से लेखक या पत्रकार को मजबूर किया है की मुझे पकड़ और लिख लेकिन इससे आगे बढ़कर सोचे तो शायद हमारी रक्षा कर रहे जवान हो या घर में आश लगाए माँ बाप जो एक गरीब विकसित देश के अंग है के लिए चिट्ठी, उस कलम स्याही या एक सफ़ेद कागज़ के जोड़ से कही ज्यादा है दोस्तों कलम की ताकत वंहा भी दीखाई देती थी जब डाकिया चाचा कोई चिठ्ठी लेकर महीनो पर किसी दरवाजे पर पहूंचते थे सायद तब यह फक्र की बात होती थी और आज भी ,मुख्य बात यह की चिठ्ठी में जो मार्मिकता ,खुशी,संवेदनशीलता ,अहसाश ,मिलता है शायद वो खुशी अहसाश मेसेज या मेल नही दे पाते हो.......जारी रहेगा.....

use the forum for positive thoughts

Articulation of your ideas is a must and this is possible only for those who have perfected the art of communication .often we tend to say "i do not know how to express myself"This means you ar moving over a goldmine and you dont know how to explore it.by exchanging your thoughts with othersyou can learn this.the art of communication can be developed only when we remove our mental blocksand cultivate the faculty of speaking.it is a process for those aspiring to go high in the media field can ill afford. hope it will soothe some ruffled feathers and hurt egos. so dwell deep in scriptures before writing.

मस्ती की पाठशाला....

कुछ दिन और,
कुछ लम्हे और,
वो कॉलेज की मस्ती,
वो कैंटीन की चाय सस्ती,
वो चाय पीते-पीते विश्व की राजनीती को समेट कर रख देना,
और अपनी बात सिद्ध करने के लिए कुछ भी कर देना,
वो घूमना-फिरना भोपाल की सडको में दोस्तों के साथ,
वो लड़कियों का पीछा करना मस्ती के साथ,
वो "प्रपोस" करने को लेकर रात भर जागना
और दुसरे दिन सोते ही रह जाना,
वो लडाई-झगडे और बकैती,
लंच को लेकर रोज छिनैती,
वो मीठे सपने और कसमे वादे खाना,
वो कॉलेज लेट जाना और,
सर से रोज डांट खाना,
और रूम पर आकर बिंदास सो जाना,
वो क्लास बंक करना और कैंटीन में बैठना,
चार चाय पीना और दो के पैसे देकर बिंदास निकल लेना,
वो दोस्तों को "पप्पू" बनाना और खाली टाइम में लाइब्रेरी जाना,
वो किताबो का ख्याल जिनसे न हुआ हमे कभी प्यार,
वो करियर की टेंशन,
वो डैड की पेंशन,
वो सिग्रेटस मोर
जिनसे न हुए हम कभी बोर..
वो लैब में जाना और बिंदास ओर्कुटिंग करना,
वो सीढियों पर बैठना और फ्री की सलाह फ्री में देना...
ये है कॉलेज लाइफ के वो दिन
जिन्हें याद करेगा हर कोई हर दिन,
लेकिन ये फ़िर कभी नही आयेंगे..कभी नही..

हमें माफ़ करें .... कि हम इंसान हैं

जैसा की हिमांशु ने कहा कि यह हफ्ता वाकई हमारे सबके लिए शर्मनाक रहा। हम सबने जिस तरह से आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई की जगह एक दूसरे के ख़िलाफ़ लड़ाई की वह हमें दुनिया के सामने लज्जित करने के लिए काफ़ी था। कुछ लोग जैसे शायद यही चाहते थे, और हमने उनकी चाल समझे बिना उनका सहयोग किया यह हमारी भूल थी।

दरअसल जो कुछ भी अजीत ने शुरू किया था उसमे मेरी सहमती थी और उसका उद्देश्य था कि धार्मिक कट्टरपंथ और धर्मांतरण के पीछे के कारणों पर हम एक सार्थक चर्चा करें जिससे कुछ वाकई गंभीर समाधान निकल कर आयें पर मैं नही समझ पाया कि विचार करने की जगह सीधे अजीत पर आक्षेप क्यों हुआ और उसके बाद इस तरह से व्यक्तिगत टिप्पणियों का दौर क्यों शुरू हो गया। हम क्या एक अच्छे पत्रकार होने के नाते गंभीर और सार्थक चर्चा भी नही कर सकते हैं और क्या इतने सभ्य समझे जाने वाले ब्लॉग का उपयोग ऐसे करेंगे ?

मैं या अजीत या तन्जीर या फिर और कोई भी धर्मांतरण का समर्थक नहीं हैं पर क्या धर्मांतरण के विरोध के लिए किसी कट्टरपंथी संगठन के समर्थक होना जायज़ शर्त है ?

क्या हिंदू होने के लिए जे श्री राम का उद्घोष अनिवार्य है ?

क्या ज़रूरी है कि अगर कोई मुस्लिम है तो वह आई एस आई का एजेंट है ?

क्या १८५७ के संग्राम का नेतृत्व बहादुर शाह ज़फर ने नहीं किया था और उसमे मंगल पांडे और तांत्या टोपे शहीद नही हुए ?

क्या अगर पेशवा नाना साहेब को नज़र बंद किया गया तो बेगम हज़रात महल ने आज़ादी की जंग नहीं लड़ी ?

क्या क्रांति के रास्ते पर बलिदान होने के लिए चंद्रशेखर आज़ाद और अशफाक उलाह खान एक साथ नहीं बढे थे ?

क्या नेहरू और मौलाना आज़ाद अलग अलग गांधियों के सत्याग्रह के आंदोलनकारी थे ?

क्या आपको मालूम होता है कि जो गेंहू आप खाते हैं उसे हिंदू ने उगाया है या मुस्लिम ने ?

मैं भगत सिंह को याद करने वाले अपने एक मित्र से कहूँगा कि एक बार वो भगत सिंह को पढ़ें ज़रूर ....... वो धर्मनिरपेक्ष थे !

मुझे लगता है कि शायद यही हमारा दुर्भाग्य है कि जब भी हमारे बीच कोई व्यक्ति किसी गंभीर मसले पर सार्थक बहस करने की पहल करता है, हम मेरी और तेरी पर उतर आते हैं और वहीं उस मसले को भूल कर दूसरी राह पकड़ते हैं या फिर कुछ लोग चाहते हैं कि इन मसलो का कभी समाधान न हो जिससे उनकी राजनीति चमकती रहे।

मैं इतने दिन तक इस पसोपेश में रहा कि मैं इन लोगों के बीच आऊ या ना आऊ पर जिस तरह के विद्वेष भरे वक्तव्य दिखे उससे लगा कि क्या किया जाए ?

मन व्यथित था कि क्या लक्ष्य लेकर यह चर्चा शुरू की और क्या नतीजे निकले ?

हम सोचने पर मजबूर हैं कि क्या आगे से किसी विषय पर सार्थक पहल का प्रयास करें या न करें .......

क्या कहीं इसी रवैये की वजह से तो आज पूरा मुल्क मीडिया को ग़लत तो नही समझता ?

अगर आप किसी विचार से सहमत नहीं तो उस के विरोध में अपना तर्क रखें ना कि व्यक्तिगत आक्षेपों पर उतर आयें

एक पोस्ट में कहा गया कि यह मेरे तर्क हैं और इन पर मेरा कॉपीराइट है ...... एक बार उसे सब पढ़ें और देखें कि वस्तुतः उस पोस्ट में कोई तर्क था ही नहीं ......कुल मिला कर निजी प्रहार था , क्या यह तर्कसंगत है ?

हाँ आपके लिखे पर कॉपी राइट आपका ही था क्यूंकि जो आप लिखते हैं उसकी ज़िम्मेदारी भी आपकी ही होनी चाहिए !

व्यक्तिगत भड़ास निकालने के लिए और ब्लॉग हैं जो केवल यही काम देखते हैं , मैं भी अक्सर वहाँ जाता हूँ आप भी जा सकते हैं

इसके लिए कृपया केव्स संचार का दुरुपयोग ना करें

आख़िर क्यों यह धर्मान्धता कि आंधी बह रही है .....ऐसा क्यों कि अगर आप हमारे साथ नही तो शत्रु के साथ हैं ?

हम किसी भी तरह के कट्टरपंथ के विरोध में हैं.....वह चाहे किसी भी धर्म का क्यों न हो !
ना तो हम किसी जेहाद में शामिल हैं ना ही किसी धर्मयुद्ध के योद्धा हैं !

हमने सिर्फ़ यह कहा था कि धर्मांतरण के पीछे के कारणों पर विचार होना चाहिए .... क्या अपनी कमियों पर विचार करना ग़लत है ?

अगर धर्म और रोटी वाली बात ग़लत है तो रखिये सामने रोटी और भगवान् की प्रतिमा को एक साथ और भगवान् के नाम पर चार दिन तक भूखे रह कर दिखा दें और भजन करते रहे !

अगर यह हमारी गलती है तो हमारा सर कलम कर दीजिये

हमें माफ़ करें हम सिर्फ़ और सिर्फ़ इंसान है ....और इस मज़हब से हम किसी तरह का धर्मान्तरण नहीं चाहते हैं !

अंत में राही मासूम रज़ा की एक छोटी सी कविता

मेरा नाम मुसलमानों जैसा है
मुझ को कत्ल करो और मेरे घर में आग लगा दो
मेरे उस कमरे को लूटो जिसमें मेरी बयाने जाग रही हैं
और मैं जिसमें तुलसी की रामायण से सरगोशी करके
कालीदास के मेघदूत से यह कहता हूँ
मेरा भी एक संदेश है।


मेरा नाम मुसलमानों जैसा है
मुझ को कत्ल करो और मेरे घर में आग लगा दो
लेकिन मेरी रग-रग में गंगा का पानी दौड़ रहा है
मेरे लहू से चुल्लू भर महादेव के मुँह पर फेंको
और उस योगी से कह दो-महादेव
अब इस गंगा को वापस ले लो
यह जलील तुर्कों के बदन में गढा गया
लहू बनकर दौड़ रही है।

अंत में हमें वो सब एक बार फिर क्षमा करें जिन्हें हमारा सार्थक प्रयास ग़लत लगा !

अगली पोस्ट में उन सज्जन को उत्तर जिन्होंने इतिहास को ढंग से पढने की सलाह दी थी ....

जय हिंद .....

GARAMMUDDA.BLOGSPOT.COM

मित्रो आप सभी आमंत्रित है एक नए ब्लाग garammudda.blogspot.com पर......
यहां हर हफ्ते किसी मुद्दे पर बहस होगी.......खुलकर....
नो लिमिट तक......किसि भी विशय पर.....

इस बार का मुद्दा है ....शहीदो पर राजनीति....

जय भारत.....जय छत्तीसगढ....नवीन सिंह...

Thursday, October 9, 2008

मज़हब नही सिखाता आपस में बैर रखना

मुझे इस ब्लॉग की इस स्थिति पर अब शर्म आ रही है । मेरा आप सभी लोगों से आग्रह है की केव्स संचार नाम के इस ब्लॉग पर , जिस चैनल में आप काम करते हैं , अथवा जहाँ आप रहते हैं कहीं भी साम्प्रदायिकता का ज़हर न फैलायें । अगर आप दूरियां कम नही कर सकते तो कम से कम उन्हें बढाये मत । और सबसे बड़ी दुःख की बात ये है की आप सब मीडिया के व्यक्ति होकर सांप्रदायिक रंग में रंग रहे हैं । हम वो लोग हैं जो अगर हिंदू धर्म में कोई कमी है तो उसपर भी खुल कर प्रहार कर सकें और अगर मुसलमान या इस्लाम कही पर चूक रहा है तो उस पर भी खुल कर बोले । न तो हिंदू धर्म बुराइयों से पूरी तरह मुक्त है न इस्लाम ।

मेरी आप सबसे एक विनती और है बिना किसी धर्म को पढ़े उसके बारे में कोई राय मत व्यक्त किया करें । जो इस्लाम को आतंक का धर्म बता रहे हैं उन्हें पहले कुरान और हदीस को पढ़ लेना चाहिए । अगर आपको इन्हे खरीदने म्विन कोई दिक्कत हों तो मुझे बताएं मैं आपको वो बहुत सी सामग्री भेज दूंगा की इस्लाम में अमन और शान्ति को सैवोपरी मन गया है ,और जिस जिहाद को लेकर इतनी हाय तौबा है उसके भी कुछ नियम है । आतंक कहीं से जिहाद नही है । आप को चाहिए की आप कर्बला का पूरा वृत्तान्त पढ़ें की किस तरह से हुसैन वहां हिन्दुस्तान के प्रति श्रद्धा वान थे । कुरान कहती है " वालेकम दीन वालेय्दीन" यानी उन्हें उनका धर्म मुबारक हो और हमें हमारा "

इसी तरह से हिंदू धर्म को कमज़ोर कहने वाले इस बात को समझें की हिंदू धर्म के ६ देषणों में एक चार्वाक मुनि का दिया हुआ नास्तिक दर्शन भीहै । यानी हिंदू धर्म विश्व का अकेला धर्म है जहाँ नास्तिकता का भी स्वागत किया गेहै ।

रही बात मिसालों की तो उसके लिए आप में से कोई भी मुझसे बहस कर सकता है मैं आपको असंख्य उदहारण गिनवाऊंगा की इस देश में अभी भी मिलजुल कर रहने वाले लोगों की कमी नही है ,ये भारत की निजी उपलब्धि है , और यही मिली जुली रिवायत भारत को भारत बनती है , आप जब भारत की बात करेंगे तो आप अकेले हिंदू की बात नही कर सकते, अकेले मुस्लिम की बात नही कर सकते ।

आप ये बताएं की जब रफी साहब गाते हैं तो मिठास केवल मुस्लिमों के कान में जाती है क्या ? चन्नू लाल मिश्रा की ठुमरी केवल हिंदू सुनते हैं क्या ? कौन है जो अब्दुल हमीद और कलाम पर गर्व नही करता । क्या आपने कल्बे सादिक का बयां सुना है वो सुन्नी इमाम के पीछे नमाज़ पढने को तैयार है और अमरनाथ बोर्ड को ज़मीन दिए जाने का स्वागत किया है उन्होंने । क्या आपको मालुम है की लखनऊ में आज भी हिंदू लोग ताजिया उठाते हैं , अब आपको लग रहा होगा की हिंदू तो सहिष्णु होते हैं, लेकिन इसी लखनऊ में एक रामलीला होती है जिसके सारे कलाकार मुस्लिम हैं । क्या आपको पता है की मुहर्रम पर अनीस और दबीर के जो मर्सिये पढ़े जाते हैं वो उर्दू से ज्यादा अवधी के लगते हैं ।


उदहारण बहुत हैं मेरे पास ...........और वो भी दूरियां कम करने वाले। उदहारण आपभी देते हैं लेकिन नफरत फैलाने वाले । एक दूसरे को जानिए और एडजस्ट करके रहिये । और प्ल्ज़ आपस में ही स्तर हीन बहस से बचिए कुछ पढिये और उस अधर पर लिखिए ....... और एक बार सभी सीनियर्स से अनुरोध है की एक बार फेयरवेल को याद करिए ।

मुमकिन है आसां हो ये सफर कुछ दूर साथ भी चल कर देखें
थोड़ा तुम badal कर देखो , थोड़ा हम बदल कर देखें

आमीन

आपने सुना होगा ,बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो एक्साम देने जाते हैं ,कुएस्शन पेपर ठीक से नही पड़ते और प्रश्नों का ग़लत उत्तर दे आते हैं फिरफेल होने का रोना रोते हैं ,गलती जवाब मे नही बल्कि ग़लत जवाब की होती है। ऐसे लोगो की ये आदत आगे भी बरकरार रहती है और अपनी इस आदत की वजह से वो दूसरों को भी परेशान करते है। खैर दुआ यही है की राम सदबुधि दे इन्हे । आमीन

कहीं निगाहें कहीं निशाना

आतंकवाद हमें निगलने को बढ़ा चला आ रहा है। हमारी कोशिश सर्वप्रथम अपने मुस्लिम भाइयों को यह विश्वास दिलाने की होनी चाहिए की आप भी इसी मुल्क के नागरिक हैं। और आपका भी इस देश पर उतना ही हक है जितना की हमारा या फिर किसी अन्य व्यक्ति का; हम ये क्यों कहें की बात निकलेगी तो पाकिस्तान तक जायेगी। हमारे घर की बात है घर मैं रहेगी। हमारी समस्या आतंकवाद कभी थी ही नही हमारी समस्या तो अपने घर के अन्दर पनप रहा असंतोष था। अब मैं कहूँगा तन्जीर भइया का क्या लेना देना पाकिस्तान से ? या इस देश के किसी भी राष्ट्रवादी मुस्लिम का क्या लेना देना पाकिस्तान से । ध्यान दे कहीं हम दुसरे भिंदरा वाले को जनम नही दे रहे हैं । जब कोई भी जंगली जानवर चारों तरफ़ से घिर जाता है तो उसकी मुद्रा रक्षात्मक नही आक्रामक हो जाती है । हम क्यों किसी भी मुस्लिम को आतंक का जिम्मेवार मान लेते हैं। और किसी एक की गलती के लिए पुरे समाज को आड़े हाथों ले लेते हैं। चौरासी के जख्मअभी भरे नही हैं , हम सतवंत सिंह और केहरसिंह की तरह पुरे मुस्लिम समुदाय को सजा देने की तरफ़ बढ़ तो नही रहे हैं। हमारे लिए ज्यादा जरुरी ये बात है की हम अपने देश को लाखों कश्मीर ना बनने दे की हर मोहल्ले मैं एक कश्मीर जन्म ले लें और हम सिर्फ़ अपने राष्ट्र को तबाही की ओरजाते देखने के सिवाय और कुछ भी न कर सकें। आपके जवाब की प्रतीक्षा मैं आपका
-------------- आशु प्रज्ञ मिश्र

राम जी सदबुद्धी दे ईन्हे....

कुंद,कुठित और संकीर्ण मानसिकता किसकी है ये तो देश मे होने वाले हादसो से पता चल जाता है...
और रही बात कूऐ के मेढक की तो हम अगर मेढक है तो ऊस कूऐ मे कुछ पनियल सांप भी है...जो आए दिन अपना जहर ऊगलते रहते है...

ईतीहास गवाह है ठेकेदारी प्रथा तो मुल्ला मौलवीयों ने शूरु की है...
कडवाहट का बीज तो 47 मे जिन्ना ने बोया था और ऊस फसल को काटने की तैयारी हम जैसे धर्म प्रेमी बंधु कर रहे है...

मुहब्बत की रस्सी को अक्सर होने वाले हादसे और विस्फोट करने वाले स्वंय काट देते है...ऐसा दोहरा चरित्र रखने लोगो के लिए हमारे दिल मे कोई जगह नही है...

और पिछले लेख में ऐसा जवाब इसलिए दिया गया क्योंकी आपके लेख मे हिंदु धर्म को कमजोर धर्म कहा गया था और यह भी लिखा था कि मुठ्ठी भर लोगो से घबराए हुए हैं.....
ईसका जवाब देना आवश्यक था सो दिया....
मै एक व्यक्तिगत सलाह दुंगा की ऐसी टिप्पणीयां देने से थोडा बचे
मेरे पिछले सारे लेख पढे और बारम्बार पढे......ऊसमे चरित्र चित्रण देखने को मिलेगा....
इस ब्लाग पर मुझे ऐसी चीजे लिखने को विवश न करे
क्योंकि
हंगामा खडा करना मेरा मकसद नही...
मेरी कोशिश है कि सूरत बदलनी चाहिये.....

बहरहाल आप सभी व्यथित और कुंठित लोगो को भगवान राम सदबुद्धी दे......

जय भारत...जय छत्तीसगढ.....नवीन सिंह....




Wednesday, October 8, 2008

समझ का फेर

बात निकल कर पाकिस्तान तक ही जा सकती क्युकी इससे आगे आप सोच नही सकते .संकीर्ण मानसिकता इंसान को कुवे का मेंढक बना देती। मै किसी धर्म की बुराई कर ही नही सकता क्युकी दुसरे के धर्म का आदर न करने वाला अपने धर्म के प्रति कभी वफादार नही हो सकता । बुराइयां और कुरीतिया हर धर्म मे है मगर वो समाज की बनाई हुई है ,कोई धर्म इंसानियत के विरुद्ध नियम नही गढ़ता वो तो समाज के ठेकेदार अपनी सहूलियत के हिसाब से उसमे फेर बदल करते रहते है । जहाँ तक सवाल लेख का है तो मैंने आपकी तरहां ही अपने विचार रखे थे,लेकिन इसे आपने धार्मिक रंग दे दिया जो इस बात की पुष्टि करता है की आप कितना व्यथित हैं । कृपया करके ऐसे बीज न बोए की कड़वी फसल किसी के भी गले न उतरे और फ़ूड पोइसिनिंग से इंसानियत की तबियत ख़राब हो जाए .ये देश मुहब्बत की डोर से बंधा है इस रस्सी को रेतने का काम न करें .मेरा लेख आपकी समझ मे नही आया शायद इसी लिए आपने एक धर्म और सम्प्रदाए को निशाना बना दिया .अगर लेख एक बार मे समझ नही आता तो कई बार पढ़े और समझने की कोशिश करे रस्सी की लगातार रगड़ से सख्त पत्थर भी घिस जाया करते हैं ,फिर कुंद दिमाग की बिसात ही क्या.

आतंकवादी श्रोता

आतंकवादियों के महल्ले में
कवि सम्मलेन हो रहा था
हम संचालन कर रहे थे
हाल इतने बुरे थे की
हर कवि मंच पर आने में
घबरा रहा था
और श्रोता थे की
बस घूरे जा रहे थे
न हंस रहे थे
न तालियाँ बजा रहे थे
हमने कहा की भाइयों अब
तालियाँ बजाइए और
कवि सम्मलेन को उठाइए
की एक आतंकवादी श्रोता
बोला आप चुपचाप बैठ जाइये
मंच पर उठाने लायक है ही क्या ?
अब कवियत्री जी को बुलाइए ।

मेरा अनुरोध है केव्स के अपने सभी बड़े भाइयों से क्या यार इस ब्लॉग को अखाडा बना दिया है अरे कभी तो मस्ती में आते हो न । हमेशा वैसे ही रहो । परशुराम की तरह फरसा लेकर टहलना हो तो बात ही अलग है भाई लोग गरमा गरम बहस के बीच मेरी ये कविता चाय ब्रेक बने इसी आशा के साथ
हमेशा आपका ---- आशु प्रज्ञा मिश्र

बात निकलेगी तो पाकिस्तान तक जाएगी...

कुछ लोगो की बात निकलती है तो पाकिस्तान और आई एस आई तक ही जाती है....
हमारे दिव्य,यशस्वी हिंदु धर्म की ऊदारता को ऊसकी कमजोरी मानने वाले या तो मूर्ख है या मूर्ख होने का ड्रामा कर रहे है.....
हालाकी ऐसी धूर्तता और मूर्खता वे हमेशा करते रहते है.... डजन्ट मैटर....
जहां 12 बीवीयां 20 बच्चे होते हो.....जहां ससुर अपनी बहु के साथ बलात्कार कर देता हो....जहां सबसे आसानी से तलाक हो जाता हो....जहां बच्चो को मदरसो मे बम बनाना और आतंक फैलाना सिखाया जाता हो.....मुझे नही लगता की इससे मजबूत धर्म कोई और होगा....

हमारे धर्म के गरीब परिवार के बच्चो को पालने और पढाने के लिए ISI और PAK
से पैसा नही आ रहा है...इन लोगो का ऐसा कोई माई बाप नही है.......यही कारण है की कुछ लोग बहक गए है....और हमे पूरी आशा है की वो जल्दी घर लौटेंगे....

और रही बात मानसिकता की तो हमारी मानसिकता स्पष्ट है और सबके सामने है....
कर्मभूमी और जन्म भूमी पर हर राश्ट्रवादी व्यक्ती को गर्व होना चाहिए....
अब मनमोहन सिंह की जन्म भूमी पाकिस्तान है और कर्मभूमी भारत है तो वे पाकिस्तान के कसीदे गढने लगे.....
कौन समझाए ऐसे बुद्धुजीवीयो को.................

कूटनीती तो हर सफल पत्रकार का गुंण है....चाणक्य की कूटनीतीयो ने एक साधारण व्यक्ती को सम्राट बना दिया....
हम तो अभी साधारण बनने की कोशिश कर रहे है........
प्रभु सदबुद्धी दे.........

जय भारत...जय छत्तीसगढ......नवीन सिंह......

Tuesday, October 7, 2008

जीवन के कुछ अनमोल पल

जीवन के कुछ हसीं पल ,
जो कभी याद आते है,
तो कभी गुद -गुदाती है,
पर हर पल यह एहसास दिलाते है
की कोई तो है जो हमारे पास है ,
जो हमारे दिल का बना एहसास है ,
जिसके बिना सुना पड़ा आवास है ,
जिसके बिना अब न भूख है और न प्यास है ,
पर हमें उनके अब भी आने की आस है ,
अब तो भगवान पर टिकी हुई आस है ,
लेकिन फ़िर होता एह्ससा है
हम भी तो भगवान की ही संतान है
उन्ही का ही तो वरदान है ,
तो फिर क्यो दिल में उठी यह भ्रम की प्यास है ,
न कोई दूर है, न कोई पास है,
अब हम आने वाली दुनिया है,
इसे लिए भगवान से जोड़ रखी आस है.

मुझे मरने दो

मेरा भी मानना है की रोटी की कीमत पर धर्म परिवर्तन नही होना चाहिए .कम से कम भूख से मर कर वो गरीब जब अपने भगवान् से मिलेगा तो,उससे ये सवाल करेगा की भगवान् तुने मुझे गरीब क्यों पैदा किया और अगर गरीब पैदा कर भी दिया तो ऐसे धर्म मे क्यों भेजा जिसमे अमीर हमें तेरे मन्दिर मे जाने नही देते तेरी अराधना नही करने देते,ये ख़ुद तो हमारी फरियाद सुनते नही और तुझे सुनाने नही देते, भगवान् तो एक है बस उसके रूप अलग है , नाम अलग है,फिर वो गाड हो ,खुदा हो या भगवान् .हे भगवान् ये कितना कमज़ोर धर्म है जो कुछ लोगों के धर्म परिवर्तन से प्रभावित हो रहा है,इस धर्म के ठेकेदार कितने डरपोक है जो मुठ्ठी भर मिशानारीस से घबराए हुए है.क्या ये हमें मारने की अपेछा रोटी नही देसकते थे हमारे बच्चो को शिक्षा नही उपलब्ध करवा सकते थे। हमें गले लगते तो हम इनसे दूर क्यों जाते। क्या इनसे हमारी हालत नही देखी जाती और अगर वो ये देख सकते है तो इन सवालों पर चुप क्यों है.

बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी

पढ़ कर अफसोस हुआ की उत्तर प्रदेश के रहने वाले राज ठाकरे की मानसिकता से प्रेरित हो कर जय छत्तीसगढ़ का नारा बलंद कर रहे हैं .दूसरों को अच्छे पद और नौकरी की नसीहत देने वाले ख़ुद नौकरी के प्यार मे छत्तीसगढ़ के कसीदे पड़ने लगे हैं.मुझे किसी राज्य से कोई बैर नही है पर .लोगों की मानसिकता और डिप्लोमेसी उनकी बातो से ज़ाहिर हो जाती है.अब आप उनसे निश्पच्क्ष्ता की उम्मीद कैसे कर सकते हैं .बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी

न्युक्लीयर धर्म बम....

भाई अजीत जानकर अच्छा लगा की आप मिशनरीयो के आजीवन प्रचारक हो गए है...दिल्ली बैठ कर ऐसी बाते करना,लगता है किसी पार्टी का कोई प्रवक्ता बोल रहा हो.....
रही बात धर्म परिर्वतन की...तो मै आपको ये बता दू की मिशनरीयां भोलेभाले आदीवासीयो पर कोई परोपकार नही कर रहे है बल्की ईसाइयत नामक न्युक्लियर धर्म बम ऊनके हाथो मे थमा रहे है....और यह बम ईसाई देशो से ईम्पोर्ट हो रहा है...और जब यह धर्म बम अपनी शक्ती अनुसार फटेगा तो हर जगह आपको प्रभु,ईश्वर और प्रार्थनांए दिखायी देंगी....और वैसे भी आप भविश्य मे और ज्ञानीयों पर ज्यादा यकीन रखते है तो मै आपको बता दू की नास्त्रेदमस ने कहा है कुछ समय बाद दुनीया मे केवल ईसा और मूसा ही रहेंगे.....अगर आप भी अपना भविश्य सुरक्षित करना चाहते है तो ईसाई धर्म अपना लीजीए....और आपको लगता है की आदीवासीयो का धर्म परिवर्तन प्रगतीवादी कदम है तो आप भी ऐसा कदम ऊठाईये...ऊन्हे तो रोटी मिलती है आपको पद,मुद्रा और सुविधा मिल सकती है....
और रही बात तर्को की तो ये मेरे तर्क है और इस पे मेरा कोपीराईट है....और तर्क नापने का पैमाना खोज निकाला है क्या आपने....
मै दो पंक्तीयां कह रहा हू....ये दो लाईने आदीवासीयो और मिशनरीयो के लिये है....
मुद्रा पे बिके हुए लोग सुवीधा पे टिके हुए लोग बरगद
की बात करते है गमले पे ऊगे हुए लोग.......
जय भारत...जय छत्तीसगढ......नवीन सिंह....

Sunday, October 5, 2008

शहादत रास ना आई

मित्रो हमारे देश की बरसो पुरानी विडंबना रही है....कि हम देश के वीरो को अक्सर शहीद हो जाने के बाद भुला देते है...

इस बार 28 को भगत सिंह का कही नामो-निशान नही था.....वहीं 2 को गांधी जी पर हल्ला हुआ पडा था.....क्या गांधी ही देश के अकेले हीरो थे.........

इस पर हम सभी को सोचने की जरुरत है..... बहरहाल,

अभी हाल ही मे एक और ऐसी ही घटना हुई..... एक कार्ड-र्बोड शूटर को फर्जी शूटिंग जीतने पर करोडो रुपए मिले...और कुंवारी लडकीयो से शादी के आफर मिले....

वहीं एक रीयल शूटर को आतंकीयो से लडते हुए शहीद हो जाने पर 5 लाख का ईनाम मिलता है.....इस दर्द को और इस अपमान को केवल शर्मा जी का परिवार

ही समझ सकता है.....

और यदी आप लोग समझ सके तो अच्छा है.......

.......नवीन सिंह.......

Saturday, October 4, 2008

सड़क पार करने वालों का गीत

इब्बार रब्बी की यह कविता या नज़्म जो भी कहें मुझे बहुत पसंद है.....आप भी गुने ...

महामान्य महाराजाधिराजाओं के
निकल जाएं वाहन
आयातित राजहंस
कैडलक, शाफ़र,
टोयोटा बसें और
टैक्सियाँ और स्कूटर

महकते दुपट्टे
टाइयां और सूट
निकल जाएं ये प्रतियोगी
तब हम पार करें सड़क

मन्त्रियों, तस्करों
डाकुओं और अफ़सरों की
निकल जाएं सवारियां
इनके गरुड़
इनके नन्दी
इनके मयूर
इनके सिंह
गुज़र जाएं
तो सड़क पार करें

यह महानगर है
विकास का
झकाझक नर्क
यह पूरा हो जाए
तो हम
सड़क पार करें
ये बढ़ लें तो हम बढ़ें

ये रेला आदिम प्रवाह
ये दौड़ते शिकारी थमें
तो हम गुज़रें।

Friday, October 3, 2008

एक दिन का मौन व्रत .....

कल ईद थी और संयोग रहा की साथ ही गांधी जयंती भी......पर माहौल कुछ अजीब रहा। हालांकि पिछले करीब ३ साल से लखनऊ से दूर हूँ पर क्जिसी न किसी तरह ईद मना लेता था उअर गांधी जयंती पर भी कोई न कोई समारोह में शामिल हो ही जाता था पर इस बार कुछ सही नही था। अजीब सा माहौल था दिल के भीतर भी और बदन के बाहर भी और शायद इसीलिए कल इतना महत्वपूर्ण दिन होने पर भी कोई पोस्ट नहीं लिख पाया।

खैर उसके लिए माफ़ी पर जब मन न हो तो न लिखना ही बेहतर ....... आप बताएं किजब रोज़ के धमाकों में इतने लोग मर रहे हो ! मुल्क में अमां का माहौल न हो.......हिन्दू और मुस्लिम के बीच की खाई बढती जा रही हो और गांधी के तथाकथित उत्तराधिकारी सत्ता के मज़े लूटते नीरो बने हो तब ...........................किस दिल से ईद मनाई जाए और किस तरह से गांधी जयंती ?

खैर मैंने कुछ न लिखने की धृष्टता की इस के लिए मेरे पास कई मेल, एस एम् एस और फ़ोन आ चुके हैं सो मुझे माफ़ करें पर लिखा तो आपने भी कुछ नही केव्स संचार पर ? चलिए माना मैंने कल इन सब घटनाओं से व्यथित हो कर लेखन से और बधाई देने का बहिष्कार किया था पर आज मान लेते हैं कि हमने देश भर में हुई आतंकवादी घटनाओं के शहीदों और मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक दिन का मौन रखा था ............

तो साथियों चलें थोड़ी ( थोड़ी ज्यादा ) देर से ही सही पर गांधी जयंती और ईद के बधाई और कुछ आशार ....

ईद पर एक कविता ( साभार : हिंद युग्म )

कुदरत का ये करिश्मा भी क्या बे-मिसाल है

चेहरे सफ़ेद काले लहू सबका लाल है

हिंदू यहाँ है कोई मुसलमान है कोई

कितना फरेबकार ये मज़हब का जाल है

हिंदू से हो सके न मुसलमां की एकता

दूरी बनी रहे ये सियासत की चाल है

धरती पे आदमी ने बसाई है बस्तियां

इंसानियत का आज भी जग में अकाल है

दिन ईद का है आ के गले से लगा मुझे

होली पे जैसे तू मुझे मलता गुलाल है

जगदीश रावतानी

बापू के प्रति

सोहनलाल द्विवेदी की यह कविता मैंने बरसों पहले अपनी हिन्दी की पाठ्य पुस्तक में पढ़ी थी ...... काफ़ी छोटा था पर आजतक यह दिल के काफ़ी करीब है इसीलिए याद रह गई.....

चल पङे जिधर दो डग, मग में

चल पङे कोटि पग उसी ओर;

पङ गई जिधर भी एक दृष्टि

पङ गये कोटि दृग उसी ओर,


उसके शिर पर निज धरा हाथ

उसके शिर रक्षक कोटि हाथ,

जिस पर निज मस्तक झुका दिया

झुक गये उसी पर कोटि माथ;


हे कोटिचरण, हे कोटिबाहु!

हे कोटिरूप, हे कोटिनाम!

तुम एकमूर्ति, प्रतिमूर्ति कोटि

हे कोटिमूर्ति, तुमको प्रणाम!


युग बढा तुम्हारी हंसी देख

युग हटा तुम्हारी भृकुटि देख,

तुम अचल मेखला बन भू की

खींचते काल पर अमिट रेख;


तुम बोल उठे, युग बोल उठा,

तुम मौन बने, युग मौन बना,

कुछ कर्म तुम्हारे संचित कर

युगकर्म जगा, युगकर्म तना;


युग-परिवर्तक, युग-संस्थापक,

युग-संचालक, हे युगाधार!

युग-निर्माता, युग-मूर्ति! तुम्हें

युग-युग तक युग का नमस्कार!

अंत में एक बार फिर कि अब ज़रा सोचना शुरू करें ............

Wednesday, October 1, 2008

जी न्यूज़ का जी 24 घंटे छत्तीसगढ़ लांच हुआ


रायपुर में आज सुबह एक भव्य कार्यक्रम में जी ग्रुप ने अपने लंबे समय से प्रस्तावित जी २४ घंटे छत्तीसगढ़ का लोकार्पण कर दिया। चैनल मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ की खबरें प्रसारित करेगा पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी इसकी सूक्ष्म नज़र रहेगी। जी न्यूज़ जिसने हाल में ही अपनी प्रसारण नीति को आमूलचूल ढंग से बदलते हुए केवल गंभीर खबरिया चैनल के रूप में काम करने का निर्णय लिया था, उम्मीद जतायी जा रही है किइस चैनल का भी कलेवर गंभीर रखा जाएगा।

चैनल के लोकार्पण के अवसर पर हुए भव्य कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री रमन सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री विद्याचरण शुक्ल, जी न्यूज़ लिमिटेड के अध्यक्ष लक्ष्मी गोयल, एस बी मीडिया के अध्यक्ष तथा स्वामी रामदेव उपस्थित थे। स्वामी रामदेव ने मंच से भावी पत्रकारों और लोगों को देश सेवा का प्राण दिला कर चैनल का शुभारम्भ किया और इसके साथ ही जी २४ घंटे छत्तीसगढ़ का प्रसारण प्रारंभ हो गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा छत्तीसगढ़ की प्रसिद्द पंवानी शैली की लोक गायिका तीजन बाई का महाभारत प्रसंग गायन।

चैनल को प्रथम दृष्टया देखने पर ही समझ में आता है कि हालांकि चैनल के संचालन की ज़िम्मेदारी अनुभवी कन्धों पर है पर टीम का बहुसंख्य हिस्सा युवा पत्रकारों का है। खुशी की बात यह भी कि चैनल ने हमारे विश्वविद्यालय में एक कैम्पस इंटरव्यू किया था जिसमे हमारे विभाग के काफ़ी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का भी चयन हुआ था तो हम में से कई उस टीम का हिस्सा हैं .....

आप सबको बधाई और नए चैनल को शुभकामनाएं !

गूगल बाबा का वरदान - हिन्दी टंकण औजार

अर्थ...अनर्थ....मतलब की बात !

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