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Thursday, October 9, 2008

मज़हब नही सिखाता आपस में बैर रखना

मुझे इस ब्लॉग की इस स्थिति पर अब शर्म आ रही है । मेरा आप सभी लोगों से आग्रह है की केव्स संचार नाम के इस ब्लॉग पर , जिस चैनल में आप काम करते हैं , अथवा जहाँ आप रहते हैं कहीं भी साम्प्रदायिकता का ज़हर न फैलायें । अगर आप दूरियां कम नही कर सकते तो कम से कम उन्हें बढाये मत । और सबसे बड़ी दुःख की बात ये है की आप सब मीडिया के व्यक्ति होकर सांप्रदायिक रंग में रंग रहे हैं । हम वो लोग हैं जो अगर हिंदू धर्म में कोई कमी है तो उसपर भी खुल कर प्रहार कर सकें और अगर मुसलमान या इस्लाम कही पर चूक रहा है तो उस पर भी खुल कर बोले । न तो हिंदू धर्म बुराइयों से पूरी तरह मुक्त है न इस्लाम ।

मेरी आप सबसे एक विनती और है बिना किसी धर्म को पढ़े उसके बारे में कोई राय मत व्यक्त किया करें । जो इस्लाम को आतंक का धर्म बता रहे हैं उन्हें पहले कुरान और हदीस को पढ़ लेना चाहिए । अगर आपको इन्हे खरीदने म्विन कोई दिक्कत हों तो मुझे बताएं मैं आपको वो बहुत सी सामग्री भेज दूंगा की इस्लाम में अमन और शान्ति को सैवोपरी मन गया है ,और जिस जिहाद को लेकर इतनी हाय तौबा है उसके भी कुछ नियम है । आतंक कहीं से जिहाद नही है । आप को चाहिए की आप कर्बला का पूरा वृत्तान्त पढ़ें की किस तरह से हुसैन वहां हिन्दुस्तान के प्रति श्रद्धा वान थे । कुरान कहती है " वालेकम दीन वालेय्दीन" यानी उन्हें उनका धर्म मुबारक हो और हमें हमारा "

इसी तरह से हिंदू धर्म को कमज़ोर कहने वाले इस बात को समझें की हिंदू धर्म के ६ देषणों में एक चार्वाक मुनि का दिया हुआ नास्तिक दर्शन भीहै । यानी हिंदू धर्म विश्व का अकेला धर्म है जहाँ नास्तिकता का भी स्वागत किया गेहै ।

रही बात मिसालों की तो उसके लिए आप में से कोई भी मुझसे बहस कर सकता है मैं आपको असंख्य उदहारण गिनवाऊंगा की इस देश में अभी भी मिलजुल कर रहने वाले लोगों की कमी नही है ,ये भारत की निजी उपलब्धि है , और यही मिली जुली रिवायत भारत को भारत बनती है , आप जब भारत की बात करेंगे तो आप अकेले हिंदू की बात नही कर सकते, अकेले मुस्लिम की बात नही कर सकते ।

आप ये बताएं की जब रफी साहब गाते हैं तो मिठास केवल मुस्लिमों के कान में जाती है क्या ? चन्नू लाल मिश्रा की ठुमरी केवल हिंदू सुनते हैं क्या ? कौन है जो अब्दुल हमीद और कलाम पर गर्व नही करता । क्या आपने कल्बे सादिक का बयां सुना है वो सुन्नी इमाम के पीछे नमाज़ पढने को तैयार है और अमरनाथ बोर्ड को ज़मीन दिए जाने का स्वागत किया है उन्होंने । क्या आपको मालुम है की लखनऊ में आज भी हिंदू लोग ताजिया उठाते हैं , अब आपको लग रहा होगा की हिंदू तो सहिष्णु होते हैं, लेकिन इसी लखनऊ में एक रामलीला होती है जिसके सारे कलाकार मुस्लिम हैं । क्या आपको पता है की मुहर्रम पर अनीस और दबीर के जो मर्सिये पढ़े जाते हैं वो उर्दू से ज्यादा अवधी के लगते हैं ।


उदहारण बहुत हैं मेरे पास ...........और वो भी दूरियां कम करने वाले। उदहारण आपभी देते हैं लेकिन नफरत फैलाने वाले । एक दूसरे को जानिए और एडजस्ट करके रहिये । और प्ल्ज़ आपस में ही स्तर हीन बहस से बचिए कुछ पढिये और उस अधर पर लिखिए ....... और एक बार सभी सीनियर्स से अनुरोध है की एक बार फेयरवेल को याद करिए ।

मुमकिन है आसां हो ये सफर कुछ दूर साथ भी चल कर देखें
थोड़ा तुम badal कर देखो , थोड़ा हम बदल कर देखें

7 comments:

  1. प्रेम करो सब से, नफरत न करो किसी से.

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  2. सटीक बात। आपकी पीड़ा जायज है। ये अपील हमारी भी समझी जाए।

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  3. maine bhi yahi kaha tha ki blog ek aisi jagah hai jahan hum apni vyakti gat jung na chedain to behtar hai.

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  4. himanshu aapne bahot acha likha hai.mai sirf itna kahna chahta hon ki vicharon ka pravaah charon ore se hone digiye kisi bhi disha ka darwaza band karne par sudhaar ki sambhavna kam ho jaati hai aur aise me naveen vichaaron ka dam ghut jana laazmi hai.

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  5. सही बात है भाई.......यही तो इस देश को बांटने वाले चाहते है.

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