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Saturday, October 11, 2008

तुशटीकरण की राजनीती....


पिछले कई सालो से देश की कुछ पार्टीया तुश्टीकरण की राजनिती कर रही है...

.... आए दिन अल्पसंख्यकों को कोई न कोई गिफ्ट देती रहती है...और घोशणाओ का तो कोई ठिकाना ही नही है... अब ये गिफ्ट देने के मामले मे एक दूसरे से काम्टीशन करती रहती है...और कभी कभी तो इस हद तक गिर जाती है...कि विपक्षीयो को शर्म आ जाती है....

इनमे सबसे पहला नाम कांग्रेस का आता है...
जब जम्मु के लाल चौक मे कट्टरपंथीयो ने भारत के झंडे को अपमानित करते हुए पाकिस्तान के झंडे को जिस गर्मजोशी के साथ फहराया.....
ऊस समय कांग्रेस अलगाववादियों को आई लव यू कह रही थी....

अब जब दिल्ली इनकाऊंटर मे शर्मा जी शहीद हो जाते है तो कांग्रेस के अर्जुन सिंह...ऊनकी शहादत पर शक करते है... और जामिया मीलीया के संदिग्ध आतंकीयो को कानूनी संरक्षण देने के बयान पर सहमती व्यक्त कर देते हैं....

असली मास्टरमाइंड तो ये हैं जो आतंक की भाषा बोलते हैं........जो लोग पकड़े गए हैं उन्हें कानूनी सहायता मिलनी ही चाहिए।
हमारा संविधान-कानून उन्हें इसका अधिकार देता है लेकिन ये सहायता देना किसी संस्थान का काम नहीं है। ये जामिया मिलिया का काम नहीं है।’

ईसके बाद सपा के मुलायम और अमर सिंह है... अमर सिंह ने शर्मा जी के शहीद होने पर 10 लाख देने की घोशणा की... अल्पसंख्यक नेताओ के साथ कुछ दिन बाद एक कार्यक्रम में उन्होंने श्री शर्मा की शहादत पर सवाल उठाकर अल्पसंख्यक समुदाय का भी राजनैतिक लाभ उठाने की चाल दी....

इसके बाद है लोजपा के पासवान.... जिन्होंने देश के सबसे बडे नेटर्वक वाले आतंकवादी संगठन के बैन हो जाने पर विरोध किया....वैसे ये कोई नई बात नही है,ऐसा ये अक्सर करते रहते है......

वोट की राजनीती आदमी को किस हद तक गिरा देती है....सोचने की बात है... एसी राजनीती करके ये अपने घर कैसे जाते होंगे....अपने बच्चो को मुंह कैसे दिखोते होंगे...ईनके रिशतेदारो को इनकी बातो पर यकीन कैसे होता होगा....

ये आज तक यक्ष प्रश्न बना हुआ है....

औरजब इस दलदल मे अटल जी जैसा कमल का फूल खिला हो तो..... सोचने की बात है....

अन्त मे मै कुछ लोगो को कहना चाहुंगा की तुशटीकरण की राजनीती बन्द करे....

जय भारत....जय छत्तीसगढ....नवीन सिंह....

4 comments:

  1. नवीन मैं आपकी कुछ बातों से हो सकता है सहमत हूँ पर आपसे मैंने बार बार मना किया है की किसी धर्म विशेष के ख़िलाफ़ इस मंच का इस्तेमाल ना करें ......
    आख़िर क्यों मुझे यह बार बार कहना पड़ रहा है ?
    क्या आप लोग किसी कड़े कदम की प्रतीक्षा में हैं...?
    तुष्टिकरण का मैं भी विरोधी हूँ पर इसके लिए राजनीति जिम्मेदार है न की आम मुस्लिम !
    आप ख़ुद भी इस ब्लॉग का राजनीतिक मंच की भांति इस्तेमाल बंद करें और किसी पार्टी के प्रवक्ता की तरह न बोले

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  2. kafi had tak sahi hai aap, desh ko pragatisheel banane mein rajniti kafi aham bhumika nibhati hai par aaj usi pe sawal uthne lage hai. baki rahi aantankwad ki baat to terrorism ko khatam karne ki zarurat hai na ki is baat par vichar karne ki terrorist kaun se dhrm ka hai.

    ReplyDelete
  3. kafi had tak sahi hai aap, desh ko pragatisheel banane mein rajniti kafi aham bhumika nibhati hai par aaj usi pe sawal uthne lage hai. baki rahi aantankwad ki baat to terrorism ko khatam karne ki zarurat hai na ki is baat par vichar karne ki terrorist kaun se dhrm ka hai.

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  4. फिरदौस उर्फ़ मौसम जो एक ही आदमी है ओर जिनके ब्लॉग से अक्सर इस देश के लिए नफरत नजर आती है कायदे से उनके ब्लॉग पर बैन लगना चाहिए .
    खास तौर से नजर डाले

    जिया उर रहमान
    उम्र -२४ साल
    जामिया मिलिया का तीसरे साल में पढने वाला छात्र

    मुझे अपने किए पर कोई पछतावा नही ,अगर पकड़ा नही जाता तो नेहरू-प्लेस पर बोम्ब रखता ,कुछ ही लोगो का अल्लाह का ये फर्ज निभाने का मौका मिलता है ,मै इस्लाम की सेवा कर रहा हूँ .
    जब उसे पोच्चा गया क्यों ऐसा कर रहे हो ?
    गुजरात में जो हुआ उसके ख़िलाफ़ !
    तो दिल्ली में मासूमो का मारकर कैसा बदला ?
    जवाब में में गुस्सा "मार दो गोली मुझे "

    साकिब निसार -उम्र २३ साल
    जामिया मिलिया का graduates ,फिलहाल M.B.A की तैय्यारी सिक्किम की मनिपाल यूनीवर्सिटी से से
    कहते है जिहाद के लिए बम रखा
    शकील -उम्र २६ साल
    जामिया मिलिया के आखिरी साल के इकोनोमिक्स के छात्र
    कोई पछतावा नही ,हम अल्लाह के लिए कर रहे है ओर इस देश की इकोनोमी बरबाद कर देगे .

    ये सब पढने के लिए इंडिया टुडे ओक्टोबर अंक पेज नंबर ३२-३९ पढिये तो जो लोग बड़े बड़े दावे पेश कर रहे थे इन मासूमो के बचाव में ,उनकी आँखे खुल जानी चाहिए ,अब या तो इंडिया टुडे झूठी है या सारे सबूत मन घड़ंत जैसा की सब कहते है .
    जामिया मिलिया का अगर कोई छात्र ख़राब है तो इसमे जामिया को क्यों शर्म आती है ,हर यूनी-वर्सिटी में किस्म किस्म के शोहदे होते है ,इसमे यूनी-वर्सिटी की कोई गलती नही ,उम्मीद है अब वहां के वाइस चांसलर भी खामोश बैठेगे .

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