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Monday, October 20, 2008

आर्थिक मंदी की मार....

दुनिया भर के वित्तीय बाज़ार में जो खलबली मची हुई है और वित्तीय कंपनियों को जो पैसे का दबाव झेलना पड़ रहा है, वह आर्थिक विकास के लिए गंभीर ख़तरा है...
और इस क्रम मे जब नौकरीयो मे छटनी हो,वेतन मे कटौती हो और रोजगार की संभावनाए खत्म हो जाए तो यह निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण होगा...
जहां हर वर्ष लाखो युवा अपनी शिक्षा पूर्ण करके नौकरी करने के लिए निकलते हो और उन्हे कुछ हाथ न लगे तो यह भारत जैसे विकासशील देश के लिए और भी घातक होगा...

भारत मे आर्थिक मंदी के आने का सबसे बडा कारण है विदेशी पैसा...

भारतीय सेंसेक्स मे सूचीबद्ध हर सेक्टर के 30 कम्पनीयो मे विदेशी धन लगा हुआ है...फिलहाल विदेशी निवेशक अपना पैसा निकालने के मूड मे दीखाई दे रहे है...
सेंसेक्स के शीर्ष 5 सेक्टरो मे जो विदेशी पैसा लगा हुआ है और वह कभी भी भारतीय बाजार मे तबाही ला सकते है वो है----
1-बैंक-------------34%
2-आई टी----------28%
3-आटो-----------24%
4-फार्मा-----------18%
5-रियल ईस्टेट-------17.5%....
भारतीय बाजार मे 1 अक्टूबर को 2,83,468 करोड रू विदेशी पैसा लगा हुआ था...जिसमे से अभी तक 46,661 करोड रू निकाला जा चुका है...

फिलहाल ये पैसा सबसे ज्यादा बैंकिंग और आई टी मे लगा हुआ है और इन दोनो सेक्टर्स को अपने भविष्य के प्रती सचेत रहना पडेगा...

इस समय दुनिया भर के बैंको की हालत खस्ता है...कारण है अनाब शनाब लोन दिया जाना...
भारतीय बैंको की हालत भी ऐसी ही है...
हमारे देश के बैंको के पास एक समय इतना पैसा हो गया था कि लोन देने की सारी हदे पार कर दी थी...त्योहारो पर ये अपना सारा धन लुटाने को तैयार रहते थे...

अभी देश भर मे बैंको का 30,000 करोड रू. क्रेडिट काड धारको पर बकाया है...और सोचने की बात यह है कि देश भर मे क्रेडिट कार्ड धारक मात्र 4% है...

वैसे इस संकट के दौर मे दुनिया भर के देशो ने बाजार को स्थिर करने के लिए लगभग 32 खरब डालर की सहायता देने का निर्णय किया है...
जिसमे यूरोपीय देशो ने 1000 अरब डालर
अमेरिकी ने 700 अरब डालर
दक्षिण कोरिया ने 130 अरब डालर और
भारत सरकार ने भी 1,45,000 करोड बाजार को स्थिर करने मे झोंक दिये है...

और हायरिंग फायरिंग पालिसी के तहत जब लोगो को संस्था से निकाला जा रहा है तब वे संस्था को दोषी करार दे रहे है...
पर ये गलत है क्योंकी पिछले 2 सालो मे जब कुछ लोगो ने 5-5 ,6-6 नौकरीया बदली और वह भी सैलरी मे 40% इजाफे के साथ तब इन लोगो ने स्थिरता की दुहाई क्यो नही दी...
क्योंकी हर संस्था अपने इम्पलोई से स्थिरता और लम्बे समय का साथ चाहती है...

यदि बाजार को स्थिर करना है और अपने भविष्य को सुरक्षित करना है तो निवेशको को कंपनियो मे एवं कर्मचारियो को अपनी संस्था मे विश्वास रखना होगा एवं भय के वातावरण को दूर करना होगा...अन्यथा बाजार मे बहुत जल्द ही विस्फोट की स्तिथी बन जाएगी...

जय भारत...नवीन सिंह...

2 comments:

  1. ऐसा कुछ नहीं होगा | हाँ अब अमीर दुनिया को खरीदने की हैसियत खो बैठे हैं |

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  2. bekar hai sarkar, is liye hai mandi kee mar

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