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Sunday, October 5, 2008

शहादत रास ना आई

मित्रो हमारे देश की बरसो पुरानी विडंबना रही है....कि हम देश के वीरो को अक्सर शहीद हो जाने के बाद भुला देते है...

इस बार 28 को भगत सिंह का कही नामो-निशान नही था.....वहीं 2 को गांधी जी पर हल्ला हुआ पडा था.....क्या गांधी ही देश के अकेले हीरो थे.........

इस पर हम सभी को सोचने की जरुरत है..... बहरहाल,

अभी हाल ही मे एक और ऐसी ही घटना हुई..... एक कार्ड-र्बोड शूटर को फर्जी शूटिंग जीतने पर करोडो रुपए मिले...और कुंवारी लडकीयो से शादी के आफर मिले....

वहीं एक रीयल शूटर को आतंकीयो से लडते हुए शहीद हो जाने पर 5 लाख का ईनाम मिलता है.....इस दर्द को और इस अपमान को केवल शर्मा जी का परिवार

ही समझ सकता है.....

और यदी आप लोग समझ सके तो अच्छा है.......

.......नवीन सिंह.......

3 comments:

  1. समझ रहे हैं किन्तु कितना बेबस है इन्सान!

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  2. स्वागत नवीन ..... केव्स संचार में आपकी पहली पोस्ट पढ़ कर हर्ष हुआ साथ ही सोचने को भी मजबूर किया ..........
    लिखते रहे......क्यूंकि ये इससे हम सोचते रहेंगे

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  3. एकदम सच कहते हैं आप पत्रकार बिरादरी से जुड़े हमारे बड़े भाई लोग जो सिर्फ़ विद्यार्थी परिषद् की टुच्ची सी राजनीति अपनाना जानते हों उनसे आप ये उम्मीद करें की वो भगत सिंह को याद करें ये बात तो बेमानी है भाई , हाँ अलबत्ता नरेन्द्र मोदी मंच पर हों तो बात तीसरी है
    आशु प्रज्ञ मिश्र

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