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Wednesday, February 17, 2010

आस्था , आइ ए एस और अरुण








अभिषेक पाण्डेय

ये तस्वीर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के सबसे पॉश इलाके चार इमली में स्थित एक मंदिर से ली गयी हैं . इस इलाके में अरविन्द जोशी और टीनू जोशी जैसे आई.ए.एस. रहते हैं जिनके बेड से इतने रूपये मिलते हैं कि उसे जब २० लोग नहीं गिन पाते हैं तब नोट गिनने की मशीन बुलाई जाती है . इस मंदिर के महंत जी को पहले से अनुमान था कि आई.ए.एस. लोग अच्छा खासा पैसा कई स्रोतों से इकठ्ठा करते हैं और उन्हें उम्मीद थी कि शायद प्राचीन पंडितों के प्रवचन का असर इन लोगो पर पड़े और वे कुछ पैसे दान करे. कमाते ज्यादा हैं तो दान भी ज्यादा करेंगे इसी तर्क को ध्यान में रखते हुए महंत जी ने सोचा कि यदि कोई ज्यादा रूपये दान करने कि स्थिति में होता है और दान पात्र छोटा पड़ता है तो वो सीधे महंत जी से दूरभाष पर संपर्क कर दान कर सकता है।
धर्म , आस्था, कांड, मान्यता और परम्परा में तर्क की सुई के नोक कितनी भी गूंजाइस नहीं होती है. भारतीयों को सबसे ज्यादा इन्ही के नाम पर नुक्सान पहुचाया गया . खैर इस मदिर में विश्व की सबसे बड़ी हस्तलिखित राम चरित मानस है ऐसा लेखक का दावा है । इसे लिखा है एक पत्रकार ने जिनका नाम है अरुण खोबरे . अरुण माखनलाल वि . वि . के छात्र रह चुके हैं । उन्होंने हनुमान जी से स्वप्न में प्रेरित होकर इतना बड़ा राम चरित मानस मात्र ५ महीनो में लिखा है । इसे कुल 6333 पेज में लिखा गया है ।

1 comment:

  1. जितना हराम का कमाया उसका कुछ हिस्सा धर्म के नाम पर हमें दे दो, और अपने पाप की ज़िम्मेदारी हमपर छोड़ दो. दान करने मात्र से सारे पाप धुल जायेंगे, और स्वर्ग में टिकिट पक्की होगी सो अलग. धर्म और होता किसलिए है?

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