एक क्लिक यहां भी...

Saturday, May 9, 2009

ना सूत... ना कपास.....जुलाहों में लट्ठम लट्टा.........









उपर की यह उक्ति भारतीय राजनेताओ पर फिट बैठती है ... अभी लोक सभा के चुनाव चल रहे है ..... चुनावो केसभी चरण पूरे भी नही हो पाये है कि अपने राजनेताओ में कुर्सी हथियाने की कवायद शुरू हो गई है ... इन नेताओने आज देश का भट्टा बैठा दिया है... राजनीती में आज शुचिता जैसी बातें गुम हो चुकी है.... १५ वी लोक सभा मेंकोई मुद्दे नही है... आज एक दूसरे पर आरो़प वाली नई राजनीती शुरू हो गई है...ऐसे में सभी राजनेताओ में एकदूसरे को नीचा दिखाने का चलन शुरू हो गया है.... जनता के मुद्दे हासिये पर चले गए है .... भारतीय राजनीती काबाजार इन दिनों पी ऍम वेटिंग के नाम पर कुलाचे मार रहा है...सबसे पहले भाजपा की बात शुरू करते है.... आडवानी को पिछले १ साल से पीं ऍम बन्ने की तैयारियों में जुटे है... संघ के द्वारा जब से उनको पी ऍम इन वेटिंगघोषित किया गया है तब से वह रात को सही से सो भी नही पा रहे है .... ८० की उम्र में ओबामा जैसा जोश दिखा रहेहै.... गूगल पर कुछ भी सर्च मारो ... कमाल है अपने आडवानी साहब ही तस्वीरो में छाए है ... पड़ोसी अखबारों कोभी खोल लो तो आडवानी का चमकता दमकता चेहरा पी ऍम इन वेटिंग के रूप में दिखाई देता है... बीजेपी का वाररूम हो या प्रचार सामग्री हर जगह अपने आडवानी ही .... उनके रणनीति कारो ने उनको पी ऍम बनाने के लिए एडीचोटी का जोर लगाया है... बीजेपी के एक राज्य स्तरीय कैबिनेट मंत्री की माने तो इस बार पार्टी आडवानी को पी ऍमबनाने के लिए एकजुट है ... पैसा प्रचार सामग्री में पानी कि तरह बहाया जा रहा है... प्रचार का नया तरीकाआजमाया जा रहा है... आडवानी को युवा के रूप में प्रोजेक्ट किया जा रहा है.... अभी कुछ समय पहले तकआडवानी के जिम जाने पर खासी बहस तेज हो गई थी... बताया जाता है कि जिम जाकर आडवानी यह दिखाने किकोशिश करने में लगे थे भले ही वह ८० का पड़ाव पार कर चुके है लेकिन आज की डेट में उनसे स्वस्थ नेता कोईनही है जिसमे युवा होने के सभी गुण दिखाई देते है... आडवानी जी आपने पी ऍम को निश्चित ही नौटंकी बना कररख दिया है... क्या आपके जिम शिम जाने और इन्टरनेट की तर्ज पर प्रचार करने से आपको प्रधान मंत्री की कुर्सीमिल जायेगी? होगा तो वही जिसके भाग्य में पी ऍम बनना लिखा होगा वही बनकर रहेगा..... यार हद ही हो गई ... भारत में इस तरह से किसी को पी ऍम इन वेटिंग बनाने कि परम्परा ही नही थी... इस १५ वी लोक सभा में आपनेइस बार वेटिंग की नई परम्परा का आगाज कर दिया जिसके लिए हम सभी आपके आभारी है... आप पिछले १साल से भारत के पी ऍम इन वेटिंग बनकर जिस तरीके से प्रचार कर रहे है उसको देखते हुए अगर इस १५ वी लोकसभा में सभी ने अपने को पी ऍम इन् वेटिंग की लम्बी लिस्ट में शामिल कर लिया तो इसमे बुरा क्या हुआ? सभीको पी ऍम बन्ने का हक़ है.... केवल आप ही नही है इस पद के दावेदार...वैसे मैंने आप जैसा नेता नही देखा... आपमेंदेश को आगे लेकर जाने की सारी योग्यताये है इस बात से मै इनकार नही कर सकता... आप हिंदुस्तान के सबसेस्वस्थ राजनेता आज की डेट में है इस बात से भी मै इनकार नही कर सकता ... आपने बीजेपी को इकाई के अंक सेसैकडे के अंको तक पहुचाया है इस बात के लिए भी आप बधायी के पात्र है... पर पता नही क्यों आडवानी जी मुझकोयह लगता है इस बार आप प्रधानमंत्री बन्ने के लिए उतावले बने है ... सबसे दुःख की बात तो यह है इस चुनाव मेंअटल बिहारी वाजपेयी जी नही है जिस कारण उनकी कमी आपकी पार्टी को ही नही पूरे देश को खल रही है... आपके रथ के एक सारथी के इस चुनाव में साथ नही होने से इस चुनाव में भाजपा के लिए आगे की डगर आसाननही लग रही है....आडवाणी जी बुरा मत मानियेगा.... आपके सितारे इस चुनाव में मुझको गर्दिश में नजर आ रहे हैवैसे राजनीती में किसकी व्यक्तिगत आकांशा पी ऍम बन्ने की नही होगी? शायद सभी की होगी ?अटल जी केरहते पार्टी में जो अनुशासन और एकता रहती थी अब शायद वह भाजपा में बीते दिनों की बात हो गई है ... आपकीछवि अटल जी की तरह उदार नही है ... भले ही आप अपनी इस उग्र हिंदुत्व वादी छवि को तोड़ने के लिए तरह तरहके टोटके अपनाए ... इसको पहले जैसा ही रहना है... आप मुसलमानों के बीच जाकर अपने तो अटल जी जैसा पेशकरने से बाज आएये तो सही रहेगा... बड़े होने के साथ आदमी का स्वभाव जैसा रहता है उसमे आगे चलकर किसीभी तरह का बदलाव आने की सम्भावना नही लगती ... ऐसा आपके साथ भी है... अतः इस ढोंग को बंद करे तोअच्छा रहेगा....अटल जी ने आज अपने को स्वास्थ्य कारणों से राजनीती से भले ही दूर कर लिए हो लेकिन आपकीपार्टी को चाहिए कि उनके दिशा निर्देश आप इस चुनावों में लेते रहे... अटल जी जब तक पार्टी में थे तो उनके बाददूसरा स्थान पार्टी में आपका हुआ करता था॥ उस दौर में नारे लगा करते थे भाजपा के लाल "अटल , आडवानी, मुरली मनोहर".... साथी ही अबकी बारी अटल बिहारी का नारा भी मैं नही भूला हूँ बचपन में गली कूचो में इस गानेके बोल बीजेपी के प्रचार में सुने है...लेकिन आडवानी जी इस बार "अबकी बारी आडवानी " के नारे फीके पड़ गएहै॥आपकी पार्टी में आपको पी ऍम बन्ने को लेकर एका नही है॥ दूसरी पात के नेताओ में आपको लेकर मदभेद हैराजनाथ सिंह के साथ आपका ३६ का आंकडा अभी भी जारी है ... शीत युद्घ ख़तम नही हुआ है.... कुछ महीनेपहले सुधांशु मित्तल की पूर्वोतर के प्रभारी के तौर पर की गई तैनाती के बाद इन अटकलों को फिर एक बार बलमिलना शुरू हो गया ... मुरली मनोहर जोशी जैसे नेता को आप पार्टी में आगे नही देखना चाहते थे ... इसी के चलतेआपके उनके साथ वाजपेयी के समय से ही मतभेद रहे है॥ आज वह भी हाशियेमें चले गये है ॥ भले ही डॉ जोशीआज चुनाव प्रचार की कमान अपने हाथो में संभाले हुए है पर वह भी आपके धुर विरोधी है॥ राजनाथ के साथआपका ३६ का आंकडा जगजाहिर है ...ऐसे मैं आपके पी ऍम इन वेटिंग बन्ने का सपना शायद ही साकार हो पायेगाजसवंत सिंह के साथ आपके मतभेद राजस्थान के चुनावो में उजागर हुए थे॥ वसुंधरा राजे सिंधिया का राजशीकाम करने का ढर्रा जसवंत को नही भाया पर आपने वसुंधरा को फटकार नही लगायी जिसके चलते राजस्थान मेंबीजेपी का जहाज डूब गया ॥ आडवानी जी इतना ही नही आपकी " माय कंट्री माय लाइफ " के विमोचन के बादआपने यह बयान दिया की कंधार में आतंकियों को छोड़ने के फेसले के समय वह बैठक में मौजूद नही थे ... यहबयां पूरी तरह से झूठा है ... आपकी पार्टी के कई नेताओ के साथ वाजपेयी सरकार में रक्षा सलाहकार रहेब्रिजेशमिश्रा ने आपके दावो की हवा निकाल दी ॥ अब आप सफाई देते नही फिरना .... अपने को बड़ा तीस मारखान माने आप बैठे है ॥ यह सत्ता के प्रति इतना लोभ सही नही है आडवानी जी... सभी के साथ आपकी ट्यूनिंगसही से मैच नही कर रही है जिस कारन मुझको आपकी प्रधान मंत्री वाली राह काँटों से भरी दिखाई दे रही है ...दूसरीबात यह है आप शायद अपना मुह बंद करे नही रहे सकते है... बार बार एक ही बात चुनावो में कहे जा रहे है ... मनमोहन सबसे कमजोर प्रधानमंत्री है.... सत्ता का केन्द्र दस जनपद है... यह सब क्या है ॥ मनमोहन जी जितनेशालीन नेता है उसकी मिसाल आज तक शायद भारतीय लोकत्रंत्र के इतिहास में देखने को नही मिलती है॥ उनकीइसी शालीनता और विद्वत्ता ने उनको देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुचाया है ... आडवाणी जी उनमेसहनशीलता भी है तभी तो वह आपकी दस जनपद वाली हर बात को सुनते आ रहे थे॥ लेकिन सहने की भी एकसीमा होती है .... फिर बीच बीच में आपकी नई ललकार ... सीधे मनमोहन को टेलीविज़न में बहस करने का न्योतादे डाला ... मनमोहन जी ने इस पर कुछ बयान देने से मना कर दिया .... कांग्रेस ने बचाव का रास्ता अपना लिया... आप भी कभी कभी क्या कर देते है आडवानी जी ? अब आप पर माना ८० के बुदापे में ओबामा जैसा बन्ने का जोशजो चदा है तो इसका मतलब यह तो नही की आप वह सब करने की बात कहे जो अमेरिका में होता आया है... वहांतो केवल २ पार्टिया है ...लेकिन भारत में तो पार्टियों की भरमार है ॥ ऐसे में अमेरिका की तरह यहाँ पर बहस होनीमुस्किल दिखाई देती है ...अब अपने मनमोहन जी भी प्रधानमंत्री बनकर होशियार हो गए है ॥ उनमे पी ऍम केजीन आने लगे है... तभी को आपकी दुखतीरग कंधार और अयोध्या पर हाथ रख दिया उन्होंने.... मनमोहनजी नेआपसे कहा कंधार के समय यह लोह पुरूष क्यों पिघल गया? बात भी सही है आडवानी जी ... आपका समय कौनसा सही था॥ कंधार आपके समय हुआ॥ गोधरा के समय आपके दुलारे" मोदी" ने राज धर्म का पालन नही किया ... ऐसा बयान अटल जी ने ख़ुद दिया था... संसद , मंदिरों पर हमले हुए... आप की पार्टी भी तो कौन सी सही है ? दूध केधुले आप भी नही हो....?कुल मिलकर सार यह है की मनमोहन पर आरोप लगाने से पहले आपने अपनी पार्टी केगिरेबान में झांकना चाहिए था....जो भी हो मनमोहन शालीन है... बुद्धिमान है.... हाँ, यह अलग बात है की वहआपकी तरह लच्छे दार स्पीच नही दे सकते .... पर आपको अर्थ व्यवस्था पर अच्छा पड़ा सकते है ... यह शुक्र है कीमनमोहन जी के रहते इस बार भारत पर वैश्विक आर्थिक मंदी के चलते आंशिक असर बना रहा ॥ नही तो सभी केपसीने ही छूट जाते...आडवानी जी आपको यह किसी भी तरह शोभा नही देता की आप मनमोहन जी के ख़िलाफ़बार बार आग उगले ... ऐसे तो भारत में आने वाले दिनों में प्रधान मंत्री और विपक्षी नेताओ के बीच सम्बन्ध ख़राबहो जायेंगे.... आडवानी जी मुझको लगता है आप पर इस चुनाव में शनि का प्रकोप चल रहा है ॥ तभी तो कुछ नकुछ होते रहता है॥ कभी आपके " भेरव बाबा" आपके खिलाफ ताल ठोकते नजर आते है तो कभी " टाटा , अम्बानी, सुनील भारती की तिकडी "मोदी" को पी ऍम के लायक मानती है... कुछ समय बाद यह विवाद भी शांतहो जाता है... फिर कुछ समय बाद आपकी पार्टी के अरुण जेटली और अरुण शोरी जैसे नेता इस बात की शुरूवातफिर से " मोदी" को पी ऍम के रूप में प्रोजेक्ट करने से करते है... फिर आप इस पर आडवानी जी अपना बचावकरते नजर आते है... " मोदी की काट का नया फार्मूला आपके द्वारा मीडिया के सामने अपने मध्य प्रदेश के " शिवराज" का नाम पी ऍम के रूप में आगे करने के रूप में लाया जाता है... अब हम और जनता जनार्दन इसको क्यासमझे...? आडवाणी जी मेरी इस बात पर शायद आपको नाक लग जाए... बुरा नही मानियेगा तो एक बात कहनाचाहूँगा... आपको प्रधान मंत्री बनने की इतनी जल्दी क्या है ॥ इस जल्दी में आप कब क्या कह जाए इसकामुझकोभरोसा नही रह जाता है अब कुछ रोज पहल एक पत्रिकाको यह कहने की क्या जरूरत थी अगर इस बार पी ऍमनही बन पाया तो राजनीती से हमेसा के लिए संन्यास ले लूँगा ... आडवानी जी यह बयाँ भी आपकी हताशा कोबताता है ...अब कम से कम आडवानी जी १६ मई तक तो इस पर चुप ही रहना चाहिए था...उसके बाद आप अपनारुख स्पस्ट करते तो बेहतर रहता... लेकिन शायद चुप रहना तो आपकी फितरत में ही शामिल नही है... अब देखतेहै ऐसे विषम हालातो में क्या आपका पी ऍम बन्ने की डगर कितनी आसान होती है ? वैसे आपकी राह कई शूलो सेभरी दिख रही है॥ रास्ते में अन्धकार ही अन्धकार है
आडवाणी जी आपका राजनाथ के साथ ३६ का आंकडा जगजाहिर ही है ... इस बार सुधांशु मित्तल मामले में यह सही से उजागर हो गया ॥ राजनाथ के साथ जेटली की ठन गई॥आपने पूरे मामले से कन्नी काट ली... जेटली को मित्तल का पूर्वोत्तर का प्रभारी बनाया जाना नागवार गुजरा... इस पर मीडिया में कई दिनों तक गहमागहमी बनी रही... परन्तु जेटली मुह लटकाए ही रहे॥ यहाँ तक कि मीडिया में केमरे के सामने यह बात सही ढंग से उजागर हो गई .. जेटली सभी के साथ प्रेस कांफ्रेंस में तो पहुचते थे परन्तु उनका ध्यान हर समय भटका रहता था॥ इस मामले पर आडवानी कुछ नही कर सके परन्तु संघ को यह नागवार गुजरा..संघ ने सोचा कि यह मन मुटाव मतदाताओ संदेश देने का काम कर रहा है लिहाजा उसने जेटली कीक्लास ले डाली.... जबरन जेटली ने राजनाथ के घर जाके सब ठीक होने का संकेत दिया॥ लेकिन यह आपस में मीडिया के साथ गले मिलने का यह एक नाटक था जो समाप्त नही हुआ॥ आज भी जेटली मित्तल से खफा है पर संघ के साथ बैठक के बाद जेटली का राजनाथ मिलना जरुरी हो गया था क्युकी इससे कार्यकर्ताओ में ग़लत संदेश जा रहा था॥ साथ ही यह दिख रहा था की पार्टी में आडवानी दूसरी पात के नेताओ के साथ तालमेल कायम कर पाने में सफल नही हो पा रहे है..वैसे सच मानिये राजनाथ अभी भी आडवानी को पीं ऍम पदपर नही देखना चाहते है॥ अब यह तो संघ की मजबूरी है की उसने पहले से ही आडवानी को पी ऍम और अटल का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया..अगर राजनाथ का बस चलता तो वह भी अपनी दावेदारी इस पद के लिए पेश कर देते ...मुरली मनोहर आज भले ही भाजपा में उपेक्षित है लेकिन वह भी आडवानी को प्रधानमंत्री देखना पसंद नही करते॥ याद करिए वाजपयी वाला दौर ॥ तब भाजपा में १ ,२,३ पर अटल, आडवानी, मुरली शामिल थे ॥ तब आडवानी मुरली को २ पर देखना पसंद नही करते थे हालाँकि वाजपेयी के सिपेसलारो में वह गिने जाते थे लेकिन आडवानी के कद के आगे मुरली नही ठहर पाये.. भले ही जिन्ना की मजार पर जाकर आडवानी ने उनको धर्म निरपेक्ष कहा हो लेकिन इन सबके बाद भी संघ ने उन पर सहमती १ साल पहले ही दे दी थी कही न कही यह आडवानी की पार्टी में अपनी पकड़ को मजबूत करता है..लेकिन दूसरी पात के नेता आडवानी का नाम घोषित होते ही हताश हो चले है॥ जसवंत सिंह जैसे नेता आज खुले तौर पर उनसे दो दो हात करने को तैयार रहते है..आडवानी जानते है यह उनका अन्तिम चुनाव है शायद इसके बाद ५ साल बाद वह प्रधानमंत्री पद नही पा सकेंगे क्युकी तब उनका स्वास्थ्य भी सही नही रहे लिहाजा वह चुनाव प्रचार में हाई टेक तरीको को अपनाने से पीछे नही है ॥ इस बार भाजपा ने ४० लोगो की मदद से चुनावी वार रूम बनाया है जिसमे आईटी, बैंकिंग,जैसे फील्डों से लोग उनके इन्टरनेट प्रचार में जुटे हुए है..सुधीन्द्र कुलकर्णी दिल्ली में २६ तुगलक क्रिसेंट पर इसकी कामन को अपने हाथो में लिए हुए है ॥ वह चुनाव पर पैनी नजर रखे हुए है॥ आंकडो के जरिये जी वी एल नरसिम्हन भाजपा की संभावनाओं पर नजर रख रहे है॥ अब यह तो वक्त ही बताएगा की क्या आडवानी पी ऍम बन पायेंगे ?वैसे बीजेपी की हालत इस समय ख़राब हो चले है॥ पार्टी के अन्दर इतने जयादा झगडे है की वह अब सार्वजानिक होने लगे है ॥ हालाँकि वाजपेयी के रहते सब ठीक ठाक रहता था॥ और पार्टी के अन्दर क्या खिचडी पकरही है या दाल चावल यह पता नही चल पट था॥ लेकिन जा से अडवाणी आए है तब से पार्टी अपनी राह से भटक गई है॥ नेताओ में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ मच गई है॥ सबसे बड़ी बात यह है आज आडवानी को बड़े सहयोगी भी नही मिल पारहे है ॥ साथ ही अटल जी की कमी खल रही है.. फर्नांडीज का न होना भी भाजपा की राह को मुस्किल बना रहा है..आज साउथ में पार्टी को कोई सहयोगी ही नही मिल पा रहे है ..ममता आज कांग्रेस के साथ है॥ वही जयललिता तीसरे मोर्चे के साथ चली गई है ॥ चंद्रबाबू भी तीसरे मोर्चे के साथ है ..ऐसे में ५ ,६ दलों के साथ आडवानी कैसे प्रधान मंत्री बन पायेंगे यह असंभव लगता है॥ आडवानी जी विन्ध्य में भगवा लहराने से काम नही चलेगा......आज का दौर गठबंधन राजनीती का है बिना सहयोगियों के कोई बहुमत के आस पास नही फटक सकता ॥ फिर यह चुनाव वैसे ही मुद्दा विहीन हो गया है॥शरद यादव फर्नांडेज की तरह चुस्ती नही दिखा पा रहे है॥ जिस कारन भाजपा को इस चुनाव में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.. वैसे ही लालू प्रसाद आपकी प्रधानमत्री की कुंडली पर अपनी पी एच दी पूरी कर चुके है ॥ अगर यह सही साबित हो जाती है तो आप का रेलवे से टिकेट कन्फर्म नही होपायेगा॥ आर ऐ सी मिल जाता हो बात होती॥ लेकिन अगर चुनावो में बीजेपी बुरी तरह पिटती है तो आप पी ऍम इन वेटिंग ही बने .....रहोगे

3 comments:

  1. short me bat karne ki koshish karo

    ReplyDelete
  2. short me bat karne ki koshish karo

    ReplyDelete
  3. Han likha to thik hi hai,
    yun to loktantra hai. jo bhi kaho ya likhoge uske apne apne nihitarth honge hi.par bhai ab adwani ji ko 80years hogaye aaj bhi yadi unhe PM banane ki jaldi naho to kise hona chahiye.
    Achha hai, waqai sut uya kapas ke bina hi isbaar lathi chal rahi hai.

    ReplyDelete

गूगल बाबा का वरदान - हिन्दी टंकण औजार

अर्थ...अनर्थ....मतलब की बात !

ब्लॉग एक खोज ....