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Friday, May 14, 2010

डर....(पूर्णेंदु शुक्ल की छोटी कविता)


केव्स के वरिष्ठ साथी पूर्णेंदु शुक्ल जी ने एक बेहद छोटी सी पर उतनी ही गहरी कविता लिखी है...नई कविता आप भी पढ़ें......

डर...

वह बच्चा था
और तब
उसे हमेशा
मरने से डर लगता था....

अब...
वो
बड़ा हो चुका है
और...
ज़िंदगी से डरता है...

पूर्णेंदु शुक्ल
(लेखक पत्रकार हैं और सम्प्रति टीम सी-वोटर में चुनाव विश्लेषक हैं।)

7 comments:

  1. वाह! जबरदस्त!

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  2. उम्दा प्रस्तुती /

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  3. kya kahu..... in bato me jo sacchayi hai usko jo jiwn ka falsafa byan karti hai....aur kya kahu.....????

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  4. वाह! कमाल की पंक्तियाँ है!

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  5. kavita yatarth ko darshati hai . pryaas utkrisht hai .

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