
-सुधीर सक्सेना 'सुधि'
75/44, क्षिप्रा पथ, मानसरोवर, जयपुर-३०२०२०

-सुधीर सक्सेना 'सुधि'
75/44, क्षिप्रा पथ, मानसरोवर, जयपुर-३०२०२०
आज ११ सितम्बर है , आप लोगों को याद होगा अमेरिका पर आतंक के हमले के लिए । मुझे याद है हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल की मीरा महादेवी वर्मा की पुण्य तिथि होने के कारण । आज ही के दिन १९८७ में वो दुनिया को छोड़ गयीं थीं । आज मैं उनको याद करते हुए , उन्ही की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ , जो मेरी व्यक्तिगत पसंद भी है ......
मैं बनी मधुमास आली!
आज मधुर विषाद की घिर करुण आई यामिनी,
बरस सुधि के इन्दु से छिटकी पुलक की चाँदनी
उमड़ आई री, दृगों में सजनि, कालिन्दी निराली!
रजत स्वप्नों में उदित अपलक विरल तारावली,
जाग सुक-पिक ने अचानक मदिर पंचम तान लीं;
बह चली निश्वास की मृदु वात मलय-निकुंज-वाली!
सजल रोमों में बिछे है पाँवड़े मधुस्नात से,
आज जीवन के निमिष भी दूत है अज्ञात से;
क्या न अब प्रिय की बजेगी मुरलिका मधुराग वाली?
मैं बनी मधुमास आली!
काफ़ी दिनों से हमारे कुछ पाठकों और साथियों की इच्छा थी की ब्लॉग के मुख्या पृष्ठ पर एक यूनिकोड हिन्दी टंकण का औजार ( टूल ) उपलब्ध कराया जाए तो हमने सोचा की इसके लिए हिन्दी सप्ताह से बेहतर मौका क्या होगा ...... हिमांशु कई बार फरमाइश कर चुका है सो प्रस्तुत है गूगल बाबा का हिन्दी टंकण औजार ......
इसमे आप सीधे रोमन में टंकित करके उसे हिन्दी में परिवर्तित कर सकते हैं, ये उन पाठको के लिए बहुत काम का है जो अपनी टिप्पणियाँ अभी रोमन में देते हैं ..... इस औजार के लिए हिंद युग्म के शम्भू जी का भी हार्दिक आभार !
इसका प्रयोग करने के लिए ब्लॉग के पृष्ठ के सबसे नीचे जायें और रफ़्तार के सर्च टूल के ऊपर इसे खोजें, उसके बाद इसमें टंकित करें ऐसे .....
