एक क्लिक यहां भी...

Sunday, April 5, 2009

चुनाव के दिन - त्रिलोचन

जल्द ही हम अपनी चुनावी श्रृंखला शुरू करने वाले हैं जिसके लिए हमें कई नाम सुझाए गए हैं जिन्हें हम कल प्रकाशित करेंगे, फिलहाल माहौल बनाने के लिए पढ़ें त्रिलोचन की यह कविता,

चुनाव के दिन

इलायची में बसा हुआ रूमाल लगाया
आँखों पर कि बह चले आँसू; और साथ ही
नाम किसान मजूर का लिया, और हाथ ही
नया दिखाया नेता ने, स्वर नया जगाया

उसी पुराने गले से, चकित थे सब श्रोता
कैसे शेर बन गया बिल्ली, कौन बात थी ।
आज नहीं कुछ दिन पहले किसकी बिसात थी
इससे बातें करता, समय नहीं है, होता

बना बनाया उत्तर, और काम पड़ने पर
बोला करती थी उसकी ओर से गोलियाँ
बिछ जाती थीं एक दो नहीं कई टोलियाँ
आज चिरौरी करता है घोड़ा अड़ने पर

ये चुनाव के दिन हैं नाटक और तमाशे
नए नए होंगे, ठनकेंगे ढोलक, ताशे ।

1 comment:

गूगल बाबा का वरदान - हिन्दी टंकण औजार

अर्थ...अनर्थ....मतलब की बात !

ब्लॉग एक खोज ....