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Monday, March 8, 2010

रात भर

रात भर चलती हैं रेले

ट्रक ढोते हैं माल रात भर

कारखाने चलते हैं

कामगर रहते हैं बेहोश

होशमंद करवटे बदलते हैं रातभर

अपराधी सोते हैं

अपराधों का सम्बन्ध अब

अँधेरे से नहीं रहा

सुबह सभी दफ्तर खुलते हैं अपराध के ।

नरेश सक्सेना की कविता

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