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Wednesday, March 31, 2010

गुजरात दंगे और विभिन्न नजरिया

गुजरात दंगे के बाद देश के तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग और बेशक मीडिया के लोगो ने गुजरात की जनता और वहां की छवि को बिना किसी अवसर गंवाये बदनाम करने की कोई कसर नही छोड़ी. और कुछ लोगो ने तो यहां तक कह दिया कि तरक्की और प्रगति अपनी जगह है लेकिन मोदी के खून से रंगे हाथ को कौन धो सकता है. इन लोगो को सिर्फ गुजरात दंगे के जख्म दिखते है लेकिन इन लोगो ना तो कभी दस लाख कश्मीरी पंडितो की पीड़ा नही दिखती है. कुछ लोगो ने एनजीओ बनाकर गुजरात की छवि को आघात पहुंचाने के लिए हरेक मंच का उपयोग किया. तीस्ता सितलवाड़ जिन्हे सुप्रीम कोर्ट ने भी खरी खरी सुनाई है का कहना है कि मैने गुजरात मे रह रहे अल्पसंख्यको के जख्म को देखा है .ये कहती है कि पुनर्वास सिविर मे रह रहे लोगो के लिए कभी भी वहां के सीएम ने समुचित व्यवस्था नही की . हालांकि इसमे सच्चाई कम है और मिलावट ज्यादा. तीस्ता सितलवाड़ को गुजरात दंगे के जख्म तो दिखते है तथाकथित सेक्युलर और दो मुंही बात करने वाले लोगो को गुजरात के राहत शिविर की तकलीफे तो दिखती है लेकिन उन 59 हिंदू परिवार की पीड़ा नही दिखाई देती है जिसे 500 से ज्यादा की भीड़ ने आग के हवाले कर दिया. जरा सोचिए इन 59 परिवार के बारे मे जिनके परिजन ना तो आतंकवादी थे और ना ही नक्सली थे ये तो केवल कार सेवक थे जो अयोध्या से वापस आ रहे थे क्या इन परिवार के उपर बीत रही होगी .आज तक इन परिवारो का ना तो कोई सरकार से कोई सुविधा मिली है और ना सियारी प्रवृति वाले नेताओ ने इनसे मिलने की कोशिश की हैंवैसे आतंकवादी अफजल जिसकी मौत की सजा सुप्रीम कोर्ट ने 20अक्टूबर 2006 तय की थी लेकि न इसके बाद भी यह देशद्रोही भारत की जेल मे मुफ्त की रोटिया तोड़ता है . खैर मै यहां गुजरात की बात कर रहा हूं ....
न्याय का तकाजा यह है कि आप किसी भी घटना को निरपेक्ष तरीके से देखे तब ही उस पर कोई टिप्पणी करे. लेकिन भारत मे ऐसा नही होता है और इसलिए कभी 2008 के असम दंगे या फिर पूर्वोत्तर क्षेत्र से होने वाले घुसपैठ पर चर्चा नही होती है. गुजरात दंगे से ही जुड़े हालिया मामला है नरेंद्र मोदी की पेशी का . इलेकट्रानिक मीडिया और प्रिट मीडिया मे यह खबर आई की नरेंद्र मोदी को एसआईटी के सामने पेशी के लिए 21 मार्च की तारीख तय की गई थी. जबकि ऐसा कुछ भी नही था .नरेंद्र मोदी 27 मार्च 2010 दिन शनिवार को सुबह 11.56 मिनट मे पहली बार एसआईटी के सामने पेश हुए. अब यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर यह बात मीडिया मे किसने फैलाई कि मोदी को बेजे गये समन मे यह कहा गया है उन्हे 21 मार्च को एसआटी के दफ्तर मे पेश होना है. क्या यह न्याय प्रक्रिया मे हस्तक्षेप नही है.दूसरी बात कही ना कही न्याय प्रक्रिया पर दवाब डालने की कोशिश की है कि एसआटी नरेंद्र मोदी को पेश होने के लिए बाध्य करे. यानि कुछ सियारी जबान के कहने इशारे पर मीडिया मे नरेंद्र मोदी की पेशी की झूठी खबर प्रसारित की गई. खैर मोदी से दो दौर मे 9 घंटे तक पूछताछ की गई और यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट मे पेश होनी हैं..
क्रमश:

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