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Saturday, July 4, 2009

दीदी की रेल.....

केंद्रीय रेल मंत्री ममता बनर्जी ने आज लोकसभा में रेल बजट पेश किया...रेल बजट में ममता दीदी ने देश की जनता के प्रति पूरी ममता दिखाई और यात्री किराए में किसी भी तरह की बढ़ोत्तरी नहीं की...बजट की अहम बातें रहीं...

      • असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले और 1500 रुपए मासिक आमदनी वाले लोग 25 रुपए में 100 किलोमीटर तक की यात्रा के लिए मासिक पास जारी किया जाएगा

      • ममता बनर्जी ने 'तुरंत' नाम की एक रेल सेवा शुरू करने की घोषणा की है, जो एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक बिना कहीं रुके पहुँचेगी। इस योजना के तहत 12 ट्रेनें चलाई जाएँगी

      • रेल मंत्री ने 57 नई ट्रेन चलाने की घोषणा की

      • ममता बनर्जी ने तत्काल स्कीम के तहत स्लीपर क्लास में टिकट ख़रीदने का अतिरिक्त शुल्क 150 रुपए से घटाकर 100 रुपए कर दिया है। इसके अलावा अब पाँच दिन की बजाए दो दिन पहले तत्काल के तहत टिकट ख़रीदे जा सकेंगे

      • 50 स्टेशनों को विश्व स्तरीय बनाने के लिए चुना गया है और इसमें निजी कंपनियों की भी सहायता ली जाएगी।

      • लंबी दूरी की ट्रेनों में डॉक्टर तैनात किए जाएँगे।

      • बंगाल के काचरापाड़ा में रेलवे कोच फ़ैक्टरी बनाई जाएगी।
        दिल्ली-चेन्नई के बीच सुपर फ़ास्ट पार्सल एक्सप्रेस सर्विस.
        18 हज़ार माल डब्बे ख़रीदे जाएँगे.
        फल, सब्ज़ी के लिए रेलवे कोल्ड स्टोरेज की संख्या बढ़ाई जाएगी.
        ईस्टर्न कॉरिडोर के लिए विशेषज्ञ समिति.
        रेलवे के कुछ अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज बनाया जाएगा.
        मान्यता प्राप्त पत्रकारों को टिकट लेने में अब 30 की जगह 50 फ़ीसदी की छूट मिलेगी
        कोलकाता मेट्रो का विस्तार किया जाएगा

      इस बजट को एक ओर जहां तमाम विशेषज्ञ जल्दबाज़ी में तैयार और बिना सिर पैक का केवल लुभावना बजट बता रहे हैं तो जनता तो इससे खुश है ही...आप क्य सोचते हैं वो भी बताएं....


      स्रोत एवं सहायता-बीबीसी हिंदी

      2 comments:

      1. सुबह पढ चुके हैम अभी क्या कहा जा सकता है जानकारी के लिये आभार्

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      2. कुछ गरीब[??] रथ और चलेंगे.

        जिनमें एक रात के लिये बिस्तर के लिये जो पैसा लिया जाता है वह गरीबों के मासिक पास के बराबर या उससे ज्यादा होगा.
        ,इनमें कौन से गरीब यात्रा करेंगे.
        नयी गाड़ियों में से कितनी मज़दूर बाहुल्य क्षेत्रों के लिये हैं.
        या आपके ब्लाग पर लगी फोटो चरितार्थ होती रहेगी.
        जिन रेल स्टेशन पर प्लेटफार्म नहीं है, सोचिये बीमार/सीनिअर सिटिज़ेन वहाँ कैसे उतरता है??.आज भी एक बड़ा भाग इन परिस्थितियों में जी
        रहा है .

        किसी को अच्छा या बुरा कहना अभिप्राय नहीं है.
        सामाजिक रूप से यह सब भी सोचा जाना चाहिये.

        ममता दीदी से गरीब वर्ग ने बहुत आस लगा रखी है.

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