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Friday, July 24, 2009

जग आधा भरा भी तो है

अगर हम बात कर रहे हैं सच का सामना जैसे एक सनसनीखेज सीरियल की जो सच को परोसने का दावा करता है, तो हमारे सामने समाज के कुछ ऐसे लोग भी आ जाते हैं की जिन्होंने ख़ुद सच बोलकर समाज और देश दुनिया के सामने सच्चाई और इमानदारी की एक नई लकीर बनाई है जिस पर दुनिया को चलने की सलाह दी जाती है। हमारे सामने सबसे पहला उदहारण महात्मा गाँधी का है जिन्होंने सत्य के साथ अपने प्रयोग मैं सच बोला है और वेश्यावृत्ति से लेकर भाई का कड़ा चुराने तक का सच उन्होंने सबके सामने रखा है। और ये शायद आज के राजनेताओं की जीवनी की तरह भी नही था की जिस पर संसद मैं बयाँ देने की जरूरत पड़े की नही भाई मैंने जो लिखा है वो ग़लत नही, जैसे जसवंत सिंह के मामले पर हुआ था, दूसरा उदहारण हमारे सामने हंसी क्रोनिये का है जिन्होंने अपने कैरियर को मिटा देने वाला सच कहा लेकिन हमारे ही देश मैं अजहरुद्दीन और अजय जडेजा ने आज तक सच को स्वीकार नही किया है, वहीं पे हमारे सामने बिल क्लिंटन का भी उदहारण है जिन्होंने मोनिका लेवेंसकी के साथ अपने संबंधों को बड़ी बेबाकी के साथ स्वीकार किया था और पूरी दुनिया के सामने अपनी पत्नी से माफ़ी मांगी थी हिलेरी ने उन्हें माफ़ करके हमारे देश की संस्कृति और सभ्यता की दुहाई देकर पश्चिमी दुनिया को नीचा कहने वालों के मुह से कुछ भी कहने का अवसर छीन लिया था। और ये बता दिया था की नारी कहीं की भी हो चाहे चीन जापान अमेरिका या दुनिया के किसी भी हिस्से की नारी हो, पति और अपने बच्चों के प्रति उसका समर्पण एक ही जैसा है नारी सिर्फ़ नारी है और देना ही जानती है। हाँ ये सच है की वहां पर बैठने वाले लोग ये जानते हुए भी वहां पर आए थे की उनसे सच बुलवाया जाएगा लेकिन क्या आप उनकी इस दीदा दिलेरी को न कहना पसंद करेंगे की वो उस सच को अपने अन्दर पालते रहते, तो हमारे और हमारे भाइयों जैसे अन्य पत्रकारों की नज़र मैं शायद ही वो सच आ पता की काम्बली की और सचिन की जिंदगी मैं सारा कुछ ठीक नही है। कोई भी व्यक्ति जो सार्वजनिक जीवन मैं हो तो लोग उसके बारे मैं जानना चाहते हैं और वह व्यक्ति अपने जीवन के बारे मैं कितना बताना चाहता है ये उसका व्यक्तिगत हक है जिसका की सम्मान हमे करना ही चाहिए। पर ये सच नही है की लोग सिर्फ़ सेक्स के बारे मैं ही ऐसा सोचते हैं व्यक्ति हर उस चीज के बारे मैं जानना चाहता है जो छुपी हुई हो और लोग ही किसी इंसान को बड़ा बनते हैं तो उन्हें जानने का पूरा हक है। उत्तर प्रदेश मैं कहावत है ओखली के अन्दर और चोट के बाहर। जब लोग आपका मन्दिर बनायें तब तो बड़ा बढ़िया लगता है जब बच्चन के बंगले के बाहर शादी मैं खड़े हो गए तो लाठी चलवा दो। ऐ दोगला व्यवहार कहे भाई। अगर आप सलेब्रटी हैं तो हम जनता हैं सब जानते हैं और जानने का हक भी रखते हैं

3 comments:

  1. आपने विचारों के पक्ष में तर्क तो बढिया है .. पर सब इससे सहमत थोडे ही न होंगे !!

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  2. मैं नहीं समझता कि किसी के भी, चाहे सेलिब्रेटी ही क्यूँ न हो, व्यक्तिगत सोच और जीवन पर किसी का भी हक है. यह मात्र और मात्र उसका हक है कि वो कितना बताना चाहता है.

    हाँ, प्रोफेशनल पारदर्शिता पर आपका पूरा हक है.

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  3. आपके तर्क तो सही है पर बेडरूम में झांकते.. ऐसे सच से क्या भला होगा!इन्हें तो ना बोलना ही अच्छा...!सच वो बोले जाये जो अनुकर्णीय हो...हेंसी क्रोनिए ने एक सच बोल कर क्रिकेट की काया ही बदल दी..!लेकिन इन सवालों से तो नुक्सान ही होना है!हमें जानने का हक है लेकिन ऐसे सच को शायद ही कोई जानना चाहेगा...!पाश्चात्य देशों से ग्रहण करने को बहुत कुछ है लेकिन हम है की बुराइयाँ ही लेना चाहते है..काहे को?

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