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Tuesday, August 11, 2009

कितने हिंदुस्तान?

(हमारा देश आज़ादी के बाद 6 दशक देख चुका है...भदेस भाषा में कहें तो साठा हो चुका है....पर शायद पुराने अनुभवों से सीखना नहीं सीख पाया है....आज़ादी मनाने की श्रृंखला में एक ख़बर जो लगी कि हर जागरुक नागरिक के लिए ज़रूरी है....उसको मैं आप सबके सामने लाना चाहूंगा....विशेष श्रृंखला का विशेष लेख)

अभी तक भारत को सिर्फ अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान से ही खतरा था... पाकिस्तान ने कई बार भारत पर हमला करने की कोशिश भी की... ये बात और है कि उसे हर बार मुंह की खानी पड़ी... लेकिन अब एक और दुश्मन जाग चुका है... एक बेहद खतरनाक दुश्मन... जिसने भारत पर टेढ़ी नजर कर ली है... दक्षिण एशिया का सबसे ताकतवर देश चीन... वो भारत के खिलाफ शतरंज की ऐसी बिसात बिछा रहा है... जिससे पूरा देश कई टुकड़ों में बंट कर रह जाएगा... और पूरे दक्षिण एशिया में चीन की बादशाहत कायम हो जाएगी...
हिंदुस्तान के दुश्मन अंग्रेज़ों की नीति पर काम कर के हिंदुस्तान को नुकसान पहुंचाने में लगे हैं.... और अब तो वो इस बात को खुल्लमखुल्ला कहने भी लगे हैं....जी हां अब हमारे पड़ोसी अंग्रेज़ों की बांटो और राज करो की अवधारणा पर चल कर हमको नेस्तनाबूद कर देने की साज़िश में लगे हैं... और ये दुश्मन कोई और नहीं बल्कि चीन है....कम्युनिस्ट चीन अब वाकई हमारे लिए बेहद बड़ा खतरा बनने जा रहा है... और अब तो वहां के रणनीतिकार खुले आम भारत को छोटे छोटे टुकड़ों में बांट देने की बात करने लगे हैं... और ये पूरा मामला ऐसे वक्त में सामने आया है जब हमारा देश और सरकार चीन से सम्बंध सुधारने की दशा में लगातार पहल और बातचीत कर रहे हैं....चीन के एक शीर्ष रणनीतिकार झेन ल्यू ने अपने एक विवादास्पद लेख में चीन की भारत को लेकर नीतियों पर एक विवादास्पद लेख लिखा है...जिसमें भारत से बढ़ते खतरे को कम करने के लिए देश को छोटे छोटे 20 से 30 टुकड़ों में बांट देने की बात कही गई है....ये बात चीन की एक बेहद महत्वपूर्ण वेबसाइट पर कही गई है....और इसे चीन की तमाम अन्य सैनिक वेबसाइट्स पर प्रकाशित भी किया गया है....लेख बड़े ही विवादित ढंग से कहता है कि भारत का एक राष्ट्र के तौर अस्तित्व है ही नहीं और इसलिए अलग अलग धर्म और जातियों में बंटे देश को बांटना काफी आसान है....लेख कहता है कि चीन को अपने और एशिया के हित को ध्यान में रखते हुए भारत को तोड़ने की दिशा में काम किया जा सकता है...यही नहीं लेख में पूर्वोत्तर और बाकी इलाकों को लेकर चली आ रही भारतीय चिंताओं को और बढ़ा दिया गया है...क्योंकि लेख कहता है कि चीन को कश्मीर और असम में भी दखल देकर इन हिस्सों को भारत से अलग करने की कोशिश करनी चाहिए....मतलब सीधा सा है कि चीन भारत की अलगाववादी ताकतों को सहायता देना चाहता है...और इसके लिए बांग्लादेश और नेपाल को भी मोहरा बनाना चाहता है...और हमारी सरकार इन हालातों में भी चीन से दोस्ती का हाथ मिलाने में लगी है....शायद यही हमारे लिए चिंता और चीन के लिए खुशी की बात है....
साम... दाम... दंड... भेद... हथकंडा कोई भी हो मंशा सिर्फ एक भारत की बादशाहत को चुनौती..ये मंशा चीन की है...... वो हमारे खिलाफ कूटनीतिक चाल भी चलता है... पाकिस्तान से भी हाथ मिलाता दिखता है... उसने अपनी सामरिक क्षमताएं भी हमसे कई गुना बढ़ा ली हैं.... और हम सिर्फ हिन्दी चीनी भाई भाई का राग अब भी अलाप रहे हैं...हम दोस्ती की बात आज भी कर रहे हैं... और वो बराबर पीठ पर छुरा घोंपने की तैयारी में रहता है... ऐसे मे सवाल उठता है कि कहीं हम बहुत कमजोर तो नहीं होते जा रहे... जब भारत और चीन की सामरिक क्षमताओं की बात आती है तो बहस का विषय बन जाती है...पर वाकई अगर हम चीन की सामरिक क्षमताओं पर गौर करें तो साफ हो जाता है कि न केवल अभी चीन हमसे कहीं ज़्यादा ताकतवर है...बल्कि लगातार अपनी सामरिक ताकत को मज़बूत करता जा रहा है....और ये चीन के हालिया रुख को देखते हुए बेहद चिंताजनक बात है....सैनिक क्षमताओं की बात करें तो भारत की हालिया सैनिक क्षमता 13 लाख 25 हज़ार है....जबकि चीन की सैनिक क्षमता है 22 लाख 55 हज़ार यानी कि लगभग हमसे दोगुनी....चीन के पास करीब 760 नौसैनिक पोत हैं जबकि हमारे पास सिर्फ 143 पोत हैं....यही नहीं चीन की वायुसेना के पास एक अंदाज़े के अनुसार करीब 9 हज़ार 218 विमान हैं तो भारत के पास हैं केवल 3382 विमान....यही नहीं चीन लगातार अपनी सामरिक ताकत बढ़ाने की तरफ भी तेज़ी से बढ़ रहा है...चीन का रक्षा बजट इसका सबसे बड़ा सबूत है जो 2008 में करीब 59 अरब डॉलर का था जो चीन लगातार बढ़ाता जा रहा है....यही नहीं जिस चीन ने हमारे साथ ही अपने सामरिक कार्यक्रम को शुरु किया था आज वो हमसे कहीं आगे है....चीन के पास 12 से 13 हज़ार किलोमीटर की रेंज की इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल्स हैं....जो कहीं भी परमाणु हमला करने में सक्षम हैं....यही नहीं चीन हमारे देश में कई अलगाववादी गुटों के साथ साथ कश्मीर में पाकिस्तान की भी लगातार सहायता कर रहा है....और हम या तो बेखबर हैं या बाखबर होना नहीं चाह रहे हैं....
शनिवार को जब भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद को सुलझाने के लिए चल रही 13वें दौर की वार्ता समाप्त हो रही थी...तब चीन के रणनीतिकार भारत को टुकड़ों में बांट देने के एक नापाक मंसूबे पर काम कर रहे थे....यानी कि गले मिलने के बहाने गला काटने की साज़िश कर रहा है....और ये उसके लिए कोई नई बात नहीं है....याद कीजिए 1962 को...जब चीन ने पहली बार हमारी पीठ में छुरा घोंपा था....हिंदी चीनी भाई भाई के नारे की आड़ में छिप कर चीन ने किस तरह से हम पर एक युद्ध थोप दिया था....और हम अचानक मिले इस धोखे से कराह तक नहीं सके थे...पंचशील के भारतीय सिद्धांत की चीन ने धज्जियां उड़ा के रख दी थी...और भारतीय जवानों के चीन सीमा पर स्मारक सजा दिए थे...उसके बाद से चीन आज तक लगातार दोस्ती की आड़ में दुश्मनी निभाता आ रहा है...चीन ने अक्साईचिन में पहले ही भारत की 38 हज़ार वर्ग किलोमीटर भूमि पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है और इसके अलावा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भी 5180 वर्ग किलोमीटर ज़मीन उसे तोहफे में मिला हुई है....पर इसके बाद भी वो अरुणाचल में घुसने की आड़ में है...और करीब 90,000 वर्ग किमी भारतीय ज़मीन पर अपना दावा जताता है....चीन साम दाम दंड और भेद से किसी भी तरह भारत की सम्प्रभुता को भेद देना चाहता है...और इसके लिए वो भारत में आंतरिक अराजकता से लेकर युद्ध की स्थिति लाने तक के सारे हथकंडे अपना रहा है....और दूसरी ओर बातचीत के प्रस्ताव भेज कर लगातार अपने पुराने धोखेबाज़ रवैये पर कायम है
दुश्मनी के लिहाज़ से देखा जाए तो चीन और पाकिस्तान भारत के लिए एक ही सिक्के के दो पहलू हैं....किसी भी तरफ से सिक्का गिरे भारत के हिस्से में बारुद की खनक ही आनी है...दरअसल चीन ने काफी पहले से ही ये जान लिया था कि दक्षिण एशिया में अगर भारत के वजूद और ताकत को खारिज करना है....तो पाकिस्तान को अपना सामरिक और रणनीतिक साझेदार बनाना होगा...और चीन की इसी शातिराना सोच ने जन्म दिया भारत के दो दुश्मनों की दोस्ती को....यही नहीं जब जब पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हमला किया...तो पीछे से उसके कंधे पर चीन का हाथ था...जब 1962 में चीन ने भारत पर हमला किया तो पाकिस्तान उसे अप्रत्यक्ष समर्थन कर रहा था...और इसके इनाम में पाकिस्तान को लगातार मिलती रही आर्थिक और सामरिक मदद....और ये भरोसा कि भारत के खिलाफ छाया युद्ध में वो सामने न सही पीछे से ही सही उसके साथ है...पाकिस्तान की सारी सैनिक ज़रूरतें....चाहें वो लड़ाकू विमान हो या फौज के हथियार चीन पूरी करता है....यही नहीं माना जाता है कि पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम भी चीन के ही वैज्ञानिकों की देन है....और तो और पाकिस्तान का मिसाइल कार्यक्रम भी अगर कुछ दावों की मानें तो चीन का ही आशीर्वाद है...इस सब से बढ़कर भारत में पाकिस्तान द्वारा समर्थित अलगाववादी आतंकवाद को तो चीन समर्थन देता ही है...असम और पूर्वोत्तर में वो खुद आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है....चीन के इरादे जो पहले ही खतरनाक हैं...पाकिस्तान के साथ मिलकर वो विध्वंसकारी होते जा रहे हैं...और अगर हम अभी नहीं जागे तो पता नहीं हिंदुस्तान में बन जाएंगे और कितने हिंदुस्तान?

मयंक सक्सेना

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