एक क्लिक यहां भी...

Saturday, August 15, 2009

पन्द्रह अगस्त

हमने नेता जी से कहा
आज तो पन्द्रह अगस्त है
वो बोले तभी तो हम मस्त हैं
हमने कहा आज क्या कार्यक्रम है
वो बोले गरमागरम है
सुबह झंडा फहराना है
फ़िर प्रभात फेरी मैं जाना है
उसके बाद कहीं
वे बोले कुछ ख़ास नही
हाँ आज हमने पूरा दिन
देशप्रेम मैं बिताने की कसम खायी है
शाम को अंग्रेजी की जगह
देसी मंगवाई है
शौक रखते हो तो आइयेगा
मैंने कहा वाह नेता जी
आपने यहाँ भी हमें बना दिया
जब तक अच्छी वाली मंगवाई
तब तक पूछा भी नही
देसी मंगवाई तो दावत पे बुलवा लिया
नेता जी तुम जियो
बरसों बरस जियो
तुमने देश भी अकेले पिया है
देसी भी अकेले पियो

आशु प्रज्ञा मिश्रा
माखन लाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल

1 comment:

  1. शानदार रचना । स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई। आपने अपने इस रचना के माध्यम से सच्चाई को उकेर कर रख दिया ।

    ReplyDelete

गूगल बाबा का वरदान - हिन्दी टंकण औजार

अर्थ...अनर्थ....मतलब की बात !

ब्लॉग एक खोज ....