एक क्लिक यहां भी...

Thursday, December 24, 2009

खाकी...लाल बत्ती और शराब....

ये दृश्य उत्तर भारत में कहीं का भी हो सकता है....पर फिलहाल उत्तर प्रदेश का है....शहर का नाम है ग़ाज़ियाबाद....और जगह ग़ाज़ियाबाद का रेलवे स्टेशन....और उस स्टेशन का विजय नगर का प्रवेश द्वार....23 दिसम्बर यानी कि कल रात करीब सवा दस बजे...एक मित्र को ट्रेन पकड़ा कर उतरा ही था....कि देखा कि बाहर एक लाल बत्ती की एम्बेसडर खड़ी है....सरकारी....सफेद रंग की....नम्बर भी बताऊंगा अभी....खैर आगे बढ़ते हैं....मैं अभी अपनी बाइक का लॉक खोल ही रहा था कि एक फोन आ गया...इतने में गाड़ी के अंदर से एक भद्दी सी गाली के साथ पीछे रखे पान के खोखे की तरफ एक फरमाइश उछाली गई....अबे....*&*)_(%*&_ एक सिगरेट ला जल्दी....
आवाज़ से लग गया कि जनाब लोग शराब के नशे में हैं....मुड़कर गाड़ी के अंदर देखा तो खून खौल उठा....लाल बत्ती की गाड़ी के अंदर बैठी थी खाकी.....खाकी बोले तो अपने रक्षक पुलिस वाले...और कोई कांस्टेबल या सिपाही नहीं...साक्षात यम का रूप लिए एक दरोगा साहब भी विराजमान थे....और सुना रहे थे अपनी वीरता का एक किस्सा....उनके अलावा गाड़ी में तीन लोग और थे....दो तो साफ साफ पुलिस की वर्दी में दिख रहे थे....एक शायद हेड कांस्टेबल और दूसरा कांस्टेबल.....एक की मूंछें नत्थूलाल जैसी थी....और एक कुछ युवा था....चौथा शख्स ड्राईइविंग सीट पर था....हो सकता है पुलिसवाला हो...या न भी हो....खैर ये तीनो वर्दी में थे....और इन पर कानून की रक्षा की ज़िम्मेदारी थी...पर तीनो कानून तोड़ रहे थे...चौथा भी शामिल था....पर शायद वर्दी में नहीं था....कौन कौन से कानून ये तोड़ रहे थे इस पर भी बात कर लेते हैं....
  • पहला ये सार्वजनिक स्थल पर मदिरापान कर रहे थे.....जी हां लाल बत्ती की इस गाड़ी के अंदर शराब के दौर पर दौर चल रहे थे...वो भी खुलेआम रेलवे स्टेशन पर....बल्कि युवा पुलिस वाला तो हाथ में पैग लेकर सड़क पर घूम रहा था....
  • दूसरा ये कि ये तीनो रेलवे स्टेशन के परिसर में ये हरकत कर रहे थे...जहां तक मेरी जानकारी है वो ज़मीन गाज़ियाबाद रेलवे स्टेशन के अंतर्गत आती है.....
  • तीसरा ये कि तीनो ही वर्दी में थे....यानी कि ऑन ड्यूटी मदिरा सेवन हो रहा था....
  • चौथा ये कि उसके बाद इन लोगों ने उस कार के सीडी प्लेयर पर एक बेहद ही अश्लील गाना चला कर उसकी आवाज़ को पूरे वॉल्यूम पर कर दिया....और उसी वक्त एक ट्रेन आई होने के कारण वहां आस पास तमाम महिलाएं भी खड़ी थी...मतलब सार्वजिनक स्थल पर अश्लील व्यवहार का भी मामला....
  • पांचवां ये कि उसके बाद मैं जो इनको देख रहा था...मुझ पर निगाह पड़ते ही मुझे इशारे से बुलाया गया...और धमकाने वाले अंदाज़ में कहा गया कि देख क्या रहा है बे....मेरे थोड़ा तेवर दिखाने पर चुपचाप कार में बैठ गए साहब....
  • छठा....अब ये बताइए कि जब चारों ही पी रहे थे....तो गाड़ी भी ड्राइवर साहब ने पी कर ही चलाई होगी...एक और मामला....शराब पी कर गाड़ी चलाने का...इसमें तो साहब दो साल की कैद भी हो सकती है.....
अब इसके आगे की बात कि आप में से जो लोग कानून के जानकार हों....ये ज़रूर बताएं कि आखिर कौन कौन से अभियोग लगते हैं इन पुलिस वालों पर....दिनेशराय जी आप से ज़रूर जानना चाहूंगा....अब ये बताएं साहब कि ऐसों के हवाले तो हमारी आपकी सुरक्षा है....आज गंदे गाने चलाए कल पता चला कि कार से बाहर उतर कर स्त्रियों से अभद्रता ही करने लगें...भई नशे में जो ठहरे....अच्छा और ये भी बता दूं कि गाड़ी जिस भी व्यक्ति की रही होगी...वह कोई जनसेवक ही था और वहां नहीं था....गाड़ी पर लाल बत्ती थी...और ये पुलिस वाले शायद सुरक्षा या एस्कोर्ट ड्यूटूीपर थे....और जिन साहब की गाड़ी थी अगर वो इस बात से अनभिज्ञ हैं तो उनसे भी निवेदन है कि ऐसा न होने दें....वरना फिर रुचिका जैसी किसी मासूम की कोई वहशी पुलिसवाला जान ले लेगा....
अब बताता हूं गाड़ी का नम्बर....क्योंकि सबसे ज़रूरी ये है कि इन नीच पुलिसवालों की पहचान हो....उस लाल बत्ती की एम्बेसडर का नम्बर था......
UP32 BN5931

अब साहब गाड़ी का नम्बर भी सबके सामने है....सरकारी गाड़ी थी...नम्बर लखनऊ का है पर पुलिस गाज़ियाबाद की ही थी.....लेकिन सवाल जस का तस है कि जब कानून के रक्षक ही अपराधियों सरीखा व्यवहार कर रहे हों....तब क्या किया जाए और कैसे माओवादियों...या नक्सलियों को गलत ठहराया जाए...और कैसे माना जाए कि आदिवासी इलाकों में पुलिस ज़ुल्म नहीं करती होगी....जब शहरों का ये हाल है....और फिर जब पुलिस ऐसी है तो क्या नागरिक कानून हाथ में ले लें...करें क्या...जवाब चाहिए.....
गाड़ी का नम्बर एक बार फिर नोट कर लें.....
UP32 BN5931

1 comment:

  1. ऐसा रोज होता है, हर कोने में होता है, हर किसी को पता होता है, लेकिन कुछ भी नहीं होता है. इससे बढि़या तो देश की कानून व्यवस्था ठेके पर कनाडा-फ्रांस-जर्मनी को दे दी जाये. किस अफसर या नेता को यह जानकारी नहीं होती लेकिन सब की आंखे बन्द हैं.

    ReplyDelete

गूगल बाबा का वरदान - हिन्दी टंकण औजार

अर्थ...अनर्थ....मतलब की बात !

ब्लॉग एक खोज ....