एक क्लिक यहां भी...

Thursday, February 5, 2009

पत्रिकाओं के विशेषांक

लगभग हर तीसरे महीने
हिन्दी की नामी पत्रिकाएँ
"सेक्स सर्वे विशेषांक"
छप जाती हैं
और बड़ी तादाद में
बाज़ार में खप जाती हैं
सेक्स सर्वे: उचित या अनुचित ?
ये मेरा विषय नही
लेकिन कभी-कभी
इन पत्रिकाओं को देख कर
कुछ बातें हैं जो अखरती हैं
यूँ लगता ये पत्रिकाएँ
'सेक्स सर्वे' नही करती
'सेक्स सर्व' करती हैं

2 comments:

  1. सही कहा आपने
    शायद ये मैग्जिन वाले सैक्‍स सर्वे की जगह सैक्‍स सर्व कर रहे हैं

    ReplyDelete
  2. aisa lagata hai ki ye sarve logo ko bhadkane ka ek aur tarika hai.sarve ka uddeshya kuchh aur hi byan karne lagata hai.
    neha

    ReplyDelete

गूगल बाबा का वरदान - हिन्दी टंकण औजार

अर्थ...अनर्थ....मतलब की बात !

ब्लॉग एक खोज ....