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Tuesday, February 24, 2009

ब्लॉगर होशियार (सौजन्य: खबरी अड्डा)

(खबरी अड्डा पर एक ख़बर मिली लगा कि आप सब को पढ़ा दूँ)
अब तक ब्ल़ॉग को ऐसा माध्यम माना जाता था , जहां विचारों पर कोई बंदिश या पाबंदी नहीं थी । लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि ब्लॉग का कंटेट भी कानून के दायरे में है और अगर ब्लॉगर किसी की अवमानना या गाली - गलौज करते हैं तो उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है । इसलिए ब्लॉगर भाइयो सावधान ...किसी पर कीचड़ उछालने या फिर किसी के बारे में असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करने से पहले सोच लीजिएगा , आपको जुर्माना भी हो सकता है और सजा भी । अब पहले की तरह वो बात नहीं रही कि एक सुबह उठे । गूगल पर एकाउंट खोला । एक अच्छा सा नाम सोचकर ब्लॉग शुरू कर दिया और लगे विचारों का गोला दागने। इस गोलेबाजी में किसी की ऐसी तैसी होती है तो हो....कोई परवाह नहीं । आपके कमेंट बॉक्स में कोई किसी की मां - बहन करते हुए गालियां पोस्ट कर दे तो भी कोई बात नहीं । अब आप लोग सतर्क हो जाइए ।सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक अब ये डिसक्लेमर लगाने से काम नहीं चलने वाला कि ब्लॉग पर जो भी विचार हैं वो लेखक के निजी विचार हैं ।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के जी बालाकृष्णन और जस्टिस पी सदाशिवम ने केरल के एक ब्लॉगर के खिलाफ दर्ज मामले की सुनवाई करते हुए साफ कर दिया है कि कानून से ऊपर नहीं है ब्लॉगर । केरल के कंप्यूटर साइंस छात्र अजीत डी ने एक सोशल नेटवर्किंग साइट शुरू करके शिवसेना के खिलाफ मुहिम चलाई थी । उनके ब्लॉग पर बहुत से लोगों ने खुलकर अपने विचार रखे थे और शिवसेना पर देश को बांटने की साजिश रचने के इल्जाम लगाए थे । अजीत के ब्लॉग पर कई अनाम पोस्ट भी डाले गए थे , जिसमें शिवसेना की ऐसी तैसी की गई थी ।शिवसेना के यूथ विंग के राज्य सचिव ने थाणे में अगस्त 2008 में ब्लॉगर जनता की भावनाओं को भड़काने का इल्जाम लगाते हुए एक आपराधिक मामला दर्ज करा दिया ।
केरल हाईकोर्ट में ब्लॉगर ने अंतरिम जमानत तो ले ली लेकिन सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल करके पूरे मामले को खारिज करने की मांग की । ब्लॉगर की दलील थी कि उसे महाराष्ट्र हाईकोर्ट में हाजिर होने से मुक्त किया जाए क्योंकि वहां उसकी जान को खतरा है । सुप्रीम कोर्ट ने ब्लॉगर को फटकार लगाते हुए मामले को खारिज करने से इंकार कर दिया और ब्लॉगर को अगली सुनवाई के लिए संबंधित अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया । सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा कि किसी ब्लॉगर के खिलाफ अगर कोई आदमी कंटेंट पर एतराज करते हुए आपराधिक मामला दर्ज कराता है तो उसे कानूनी प्रक्रिया से गुजरना ही होगा । सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि इंटरनेट को बहुत से लोग देखते हैं और इस पर पोस्ट होने वाले पर किसी संबंधित पार्टी को एतराज करने का हक है ।
अब तक ब्लॉग को अभिव्यक्ति की आजादी का सबसे बड़ा माध्यम मानने वाले लोगों को अब सचेत रहने की जरूरत है । माना जाता है कि ब्लॉग किसी का निजी विचार है , जिसे व्यक्त करना उसका हक है लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश ब्लॉगिंग जगत के लिए दिशा निर्देश की तरह है ।

(सौजन्य : खबरी अड्डा www.khabriadda.blogspot.com)

1 comment:

  1. अभिव्यक्ती की आजादी के अधिकार के साथ उससे जुडे कर्तव्यों का भी पालन करना पडता है । किसी और का सुख चैन हनन करने की आजादी नही है यह ।

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