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Wednesday, February 18, 2009

गाजा की चीत्कार

पश्चिम एशिया के पश्चिमी मुहाने पर बसे इजराइल और फिलिस्तीन ने अपने-अपने तोपों के मुंह फिलहाल बंद कर दिए है। युद्ध इसलिए नही बंद हुआ कि गोले ख़त्म हो गए है या vijayashree किसी के मस्तक पर जगमगाने लगी। तलवारे म्यान में इसलिए रख दी गई क्यूकि विजयश्री ही कराहने लगी। उसे हमास के मस्तक का ताज नही बनना, न ही इजराइल का अहम। वो तो तड़पते, बिलखते, मासूम बेसहारा, आज़ादी की राह ताकने वालो का गर्व बनना चाहती है। खैर ये तो अभी ख्वाब है.रणभेरी गूंजने की वजह १९ दिसम्बर ०८ को संघर्ष विराम का ख़त्म होना रहा। ये तो संग्राम छेड़ने का बहाना मात्र था। असली वजह तो इतिहास के पन्नो में लाल स्याही से लिखे हुए है। उस मिटटी ने हर मंज़र देखा है। जिस देश की नींव (१४ मई १९४८ ) के peechhe खून की नदियाँ बहीं हो, उसको सुकून कहाँ नसीब होगा। जन्म से लेकर आज तक उस धरा के लोग सहमी हुई ज़िन्दगी जी रहे हैं। गोलियों की गडगडाहट में उनका दम घुटता है। पीढी दर पीढी यही सिलसिला चलता रहता है। लेकिन शान्ति का कोई नामलेवा नही है। द्वितीय विश्व युद्ध का दौर था जब यहूदी समुदाय के लोगों को माकूल जगह नही मिली थी। उन्होंने इस क्षेत्र को ही अपना घर बना लिया। ये क्षेत्र मुस्लिम बहुल था । दो धरी तलवारे यही से खीच गई। १९४७ में संयक्त राष्ट्र संघ ने इजराइल,फिलिस्तीन और कुछ स्वतंत्र क्षेत्र घोषित किया। १९४८ से ही इजराइल,मिस्त्र, सीरिया और जार्डन लड़े गाजा, गोलन pahadiyan , pashchimi क्षेत्र के लिए शुरू से ही chuhe- billee का khel होता रहा। ये khel कुछ netao, गाजा के लोगो का rahnuma kahne wale हमास,hijbulla के bich खेला jata है। लेकिन bemaut मारे jane वाली आम janta है। उनकी आवाज़ goliyo की गडगडाहट में कही गम हो गई। पेट में अन्न का दाना नही है, aakhon के aasu सुख चुके हैं। दिल से sirph एक ही पुकार निकलती है "हमें भी jeene का haq " है।

neha gupta भोपाल

2 comments:

  1. आपका लेख अच्छा लगा .दशकों से चल रहे इस युद्ध के जिम्मेदार वे देश हैं ,जो महाशक्ति होने का दावा करते हैं .इनका काम देशों को लड़वाकर अपने हथियारों के कारोबार को चलाते रहना है .इस जंग में निर्दोष लोग ही सबसे अधिक पीड़ित हैं .

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  2. अच्छा ज्ञान इकठ्ठा किया है...ये सिर्फ एक लेख में आकर्षण लाने के लिए नहीं होगा ऐंसा मैं मानता हूँ....बहरहाल एक छोटे से लेख में इतनी जानकारी भर देने का हुनर आखिर आपने सीख ही लिया मुझे आपसे चिढ़ होने लगी है..कितना पढ़ते हो कहां से लाते हो इतना ज्ञान....हम तो सूचना के वाहक होते हुए भी इतना अपडेट नहीं रह पाते....चलो अच्छा है आपकी यही ताकत आपको बहुत आगे ले जाएगी,जो संपर्क बनाये रखने के गुण से सरावोर हो कर अपने रंग जल्द दिखाएगी........शुभकामनाएं.........

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