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Wednesday, January 21, 2009

सत्य से स्वप्न तक.....किंग से ओबामा तक

कल रात जब भारत में रात के दस बज रहे थे....दुनिया के दूसरे कोने में सूर्योदय हो रहा था, सूर्योदय आशाओं का, सत्य का, उत्साह का और एक नए नेता का। एक लड़ाई जो ४० साल पहले बीच में ही सुशुप्त हो गई थी पर अन्दर ही अन्दर जगी हुई थी, उसका अंत हुआ और वो जीता जिसे मार दिया गया था। दरअसल मार्टिन लूथर किंग की १९६८ में हत्या के ४५ साल बाद ओबामा की जीत ने ये तो दिखा ही दिया था कि हत्या व्यक्ति की हो सकती है विचारों की नहीं...उसके बाद वो लड़ाई सामने नही पर नेपथ्य में चलती रही और अफ्रीकी मूल के अमेरिकी आख़िर अपने नागरिक अधिकार एक एक करके पाते रहे और आख़िरकार एक समता मूलक समाज बँटा गया जिसकी कि कल्पना अमरीकी संविधान के 'परस्यूट ऑफ़ हैप्पीनेस' में की गई है जो कहता है, "सभी लोग स्वतंत्र हैं, सभी समान हैं और सबको अपने हिस्से की ख़ुशियाँ तलाश करने के लिए अवसर मिलने चाहिए।"
मार्टिन लूथर किंग के आन्दोलन के विषय में मैं एक पोस्ट में पहले ही कह चुका हूँ पर आज बात करेंगे कि यह सब महत्वपूर्ण क्यों है.....दरअसल हम सब पिछले कुछ समय से यह चिंता और विमर्श कर रहे हैं कि भारत या दुनिया पर इसका क्या असर पड़ेगा .....क्या ओबामा भारत का साथ देंगे या पाकिस्तान के साथ खड़े हो जायेंगे। पर ओबामा ने अपने कल के भाषण में एक बड़ी महत्वपूर्ण और प्रासंगिक बात की कि हमें नफरत को ख़त्म करना है। दरअसल यही मूल मंत्र है क्यूंकि जब तक नफरत ख़त्म नहीं होती किसी भी तरह के आतंकवाद को ख़त्म नही किया जा सकता ना ही यह कोई दीर्घकालिक उपाय है।
वस्तुतः यह मूलमंत्र उस पीड़ा से उपजा है जो कभी कबार ओबामा और सदियों तक उनके पूर्वजों ने सही है, जो नफरत और तिरस्कार गौर वर्णों की आंखों में उन्हें दीखता रहा उससे। और वे जानते हैं कि किसी भी समस्या को तात्कालिक नहीं दीर्घकालिक उपायों की ज़रूरत है। इन सब बातों से हटकर अगर देखें तो यूरोप से अलहदा जितने भी देश हैं जहाँ के लोगों की चमड़ी का रंग गोरा नहीं है उनकी तादाद दुनिया में सबसे ज्यादा है और ये परिवर्तन उनके लिए है। ओबामा ने शायद इसके लिए ही अपने भाषण में कहा, "अमरीका ईसाइयों, मुसलमानों, यहूदियों, हिंदुओं और नास्तिकों का भी देश है, इसे सबने मिलकर बनाया है, इसमें सबका योगदान है, अमरीका की नीतियों को हम हठधर्मी विचारों का गुलाम नहीं बनने देंगे."
परिवर्तन जो वहाँ हुआ है एक प्रेरणा स्रोत बनेगा उनके लिए और अब दुनिया के और कोनो में अंगडाई लेगा। ये सब जानते हैं कि परिवर्तन जब अंगडाई लेता है तो होके ही रहता है। ये शुरुआत है सर्वहारा में उत्साह और आत्मविश्वास भरने की। ये बदलाव है जब लोग अपनी स्थिति को और सम महसूस करंगे ......ये जीत है उस सपने की जो मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने देखा था और कहा था," आई हैव अ ड्रीम"
ज्यादा दिमाग ना खाते हुए देखिये ये दो वीडियो एक उस सपने का और एक इस हकीकत का,
सपना



हकीकत
(इस वीडियो में आप कई नागरिको की आँखों में आंसू भी देख सकते हैं)


अमरीका ईसाइयों, मुसलमानों, यहूदियों, हिंदुओं और नास्तिकों का भी देश है, इसे सबने मिलकर बनाया है, इसमें सबका योगदान है

2 comments:

  1. स्वपन पूरा हुआ किंग का-ओबामा अब उम्मीदों का केन्द्र हो गये हैं.

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  2. sir kashmir mudde pe deerghkalik nirday lene se kya nikla.baat tatkaalik aur deerghkaalik tareeke se kisi cheeg ko khatm karne ki nahi hai balki ek himmat aur sahi se faisla lene ki hai.sir aatankvaad bhi america ki hi den hai aur 9/11 ke baad bhaarat me 26/11 pe kya bharat ke paksha me byaan de diya.vivek mishra m.a.b.j.2nd sem.

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