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Saturday, January 24, 2009

आखिर कयों न हो जै-जै ओबामा वरुण जी..

वरुण जी आपकी शुरुआती बातों से तो मैं इत्तेफाक रखता हूं.. लेकिन आपके निष्कर्ष से थोड़ा असहमत हूं.. आखिरकार ओबामा को हमारे देश में इतनी तवज्जो क्यों नहीं दी जानी चाहिए.. क्योंकि वे दुनिया के सबसे मजबूत और व्यवस्थित लोकतंत्र के पहले अश्वेत राष्ट्रपति हैं.. क्योंकि उनका चुना जाना श्वेत और अश्वेत के बीच विभेद के खत्म होने का सुखद और संभवतः निर्णायक अहसास कराता है.. क्योंकि वे एक ऐसे देश से सम्बन्ध रखते हैं.. जिस देश की तमाम परम्पराएं भारत की ही तरह ब्रिटिश हुकूमत के आंचल में ही पलकर जवान हुईं हैं.. वही ब्रिटिश हुकूमत जिसका हर फैसला फूट डालो और राज करो की कसौटी पर कसा जाता था..
वरुण जी ये तो रही ओबामा और उनके अमेरिका की बात.. अब हम कुछ अपनी बात भी कर लें.. आखिरकार हम क्यों न ओबामा की महिमा का गुणगान करें.. क्योंकि हमें भी अमेरिका की ही तरह चरण वंदना करने की आदत भी ब्रिटिश हुकूमत से विरासत में मिली थी.. कयोंकि आज भी हमारे नेता सार्वजनिक सभाओं में लोगों से चरण स्पर्श करवाने में गर्व की अनुभूति किया करते हैं..
वरुण जी अब मैं सीधे निष्कर्ष पर आ जाता हूं.. हमें कुछ बातें अमेरिका से सीखनी चाहिए.. वह देश काफी बदल गया है.. अब वह चरण वंदना करता नहीं बल्कि करवाता है.. लेकिन हम....... छोड़िए.. मैं यह नहीं कहता कि हमें अमेरिका जैसा बन जाना चाहिए.. मैं यह नहीं कहता कि हमें ओबामा के आवेग में पूरी तरह से बह जाना चाहिए.. लेकिन मैं यह जरुर कहता हूं कि हमें भी एक ऐसा ही ओबामा अपने देश में ही चाहिए.. जो देश में मौजूद तमाम सामाजिक दायरों को पाट दे.. और जरुरत पड़े तो सदियों के इतिहास को भी पलट दे..
बस आज इतना ही

6 comments:

  1. ताकत और पैसे का जयकारा हमेशा होता आया है/

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  2. bomay dhamakon main abhi tak usne hamari koi madad ki hai?

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  3. हम किसी और से आख़िर मदद की अपेक्षा रखते क्यों हैं ?
    अजीत काफ़ी हद तक आपसे सहमत हूँ और ताकत की जयकार अगर होती है तो हमें ताकत बनना होगा

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  4. udan ji main yahan paise ya America ke takat ki baat nahi kar raha hoon.. main keval obama aur unke saath aaye parivartan ki baat kar raha hoon... aap ki baat se main sahmat hoon. main bus yahi yaad dilana chahta hoon ki kab tak hum aisi soch se apne aap ko ubaar paayenge.. kab tak hum kuch karenge nahi keval sochte rahenege..
    shayad yah comment hamari hamesha sochte rahne ki skill par hi hai...

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  5. america me obama ka aana ek achcha sanket hai.lekin khud bharat ke liye abhi dilli door hai.kyuki america me chehre badalte hai lekin rashtra hit nahi aur yahi hame bhi seekhna hoga.

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  6. main sehmat hn, dusron par tippani karke insaan hamesha apne andar ki burai ya khami ko chupane ki koshish karta hai, kyon nahi khud behtar ban k dusron ko samjhane ki koshish ki jaye.........

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