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Sunday, August 10, 2008

हिरोशिमा ?? इतिहास...झलक







हिरोशिमा और नागासाकी को समर्पित इस सप्ताह में दुनिया भर में शान्ति की दुआ करने के लिए हमने जैसा की वादा और प्राण किया था ..... हम आज भी लाये हैं सम्बाध सामग्री। आज हम आपके लिए लाये हैं कुछ पुराने अखबारों की वेब कटिंग जो दिखाते हैं की हिरोशिमा-नागासाकी की त्रासदी के अगले दिन अखबारों में क्या कुछ छापा था, उस समय ! यही नहीं हम आभार व्यक्त करते हैं अफलातून जी का जिन्होंने स्वतः स्फूर्त तरीके से हमें अपने ब्लॉग से कुछ युद्ध विरोधी कवितायेँ उपलब्ध कराइ हैं। अफलातून जी समाजवादी जन परिषद् की उत्तर प्रदेश ईकाई के अध्यक्ष हैं, और उनके इस उपहार का धन्यवाद केवल उन कविताओं को हम इस श्रृंखला में सम्मिलित कर के ही कर सकते हैं।




सबसे पहले कुछ पुराने अखबारों की कतरनें ......















न्यू योर्कर











द न्यूयार्क टाईम्स



अब वो कविता जो अफलातून जी ने हमें भेजी हैं, कविता में तीखा व्यंग्य है धार महसूस करियेगा !

युद्ध : एक
हम चाहते हैं कि युद्ध न हों
मगर फौजें रहें
ताकि वे एक दूसरे से ज्यादा बर्बर
और सक्षम होती जायें कहर बरपाने में

हम चाहते हैं कि युद्ध न हों
मगर दुनिया हुकूमतों में बँटी रहे
जुटी रहे घृणा को महिमामण्डित करने में

हम चाहते हैं कि युद्ध न हों
मगर इस दुनिया को बदलना भी नहीं चाहते

हमारे जैसे लोग
भले चाहें कि युद्ध न हों
मगर युद्ध होंगे ।

- राजेन्द्र राजन

अफलातून जी को धन्यवाद देते हुए ..... एक और वादा की अफलातून जी ने ३ कवितायें भेजी थी सो बाकी दो कवितायेँ अगले दो अंकों में !

MAY PEACE PREVAIL ON EARTH !

AMEN ....

1 comment:

  1. MAY PEACE PREVAIL ON EARTH !!

    रचना उम्दा है.

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