एक क्लिक यहां भी...

Saturday, December 20, 2008

आतंकवाद बनाम देश की सुरक्षा

भारत १९९० से ही आतंकवा की आग में जल रहा है .तब से लेकर अबतक कई सरकारेंआई और गई .लेकिन समस्या जस की तस् बनी हुई है बल्कि अब यह खतरनाक रूपधारण कर चुकी है .१९७० का मीसा,१९८० का राष्ट्रीय रक्षा कानून,१९८७ काटाडा हो या फिर २००२ का पोटा कानून सब के सब अबतक निकम्मे साबित हुए हैं.सुरक्षा एजेंसियों का कहना ही क्या १९२० का इंटेलिजेंस ब्यूरो,१९६३ कासीबीआई हो या फिर रा ,देश की सुरक्षा में सेंध लगती रही और येटुकुर-टुकुर देखते रहे. इन्होने अपने आवारापन की हद कर दी. राष्ट्रीयसुरक्षा गार्ड (एन एस जी ) की स्थापना १९८४ में आतंकवाद से लड़ने के लिएकी गई थी,लेकिन यह सिर्फ़ दमकलकर्मी बनकर रह गई है जो आग लगने पर आगबुझाने का काम करती है. १९७० से लेकर २००८ तक भरत पर कुल ४२०० सौ हमलेहुए जिनमें १३००० से ज्यादा लोग मारे गए यानि ३६५ दिन लगभग ३६५ जानेंआतंकी पागलपन का शिकार हुईं. लेकिन इससे भी कहीं ज्यादा जानें घरेलुआतंकवादियों यानी की पुलिस प्रशासन ने ले ली ,जिस पर सरकार का भी ध्याननहीं गया. दोनों के जान लेने के तरीके अलग हैं एक तूफानी आग से एक झटकेमें मौत के घाट उतारता है तो दूसरा तहखानों में आम गरीब जनता को तड़पकरमारता है. अब तो रक्षक ही जब भक्षक बन जायें तो फिर क्या कहना. इसी बीचदेश में नक्सलवाद,सांप्रदायिक दंगे,क्षेत्रीयता काजहर,हत्या.बलात्कार,अपहरण राजनीती का अपराधीकरण भी खूब पहला-फूला है.परताज़ा हमले ने देश की जनता की बौखलाहट बढ़ गई है. अबतक देश ने जितने भीदहशतगर्दी के तांडव देखे हैं उसमें पकिस्तान और बांग्लादेश का ही हाथ रहाहै ये सभी जानते हैं. और हमारे नेता हैं की अपनी सहनशीलता का डंका दुनियाभर में बजवा रहे है कितने महान है हम ये सबको बता रहे हैं . शिवराजपाटिल,आर.आर.पाटिल और विलास राओ देशमुख की विदाई हो गई वहीं आनन्-फाननमें सरकार ने राष्ट्रीय जांच एजेन्सी (एन.आई.ऐ.) बनानी पड़ी जिसके लिए गैरकानूनी गतिविधियाँ उन्मूलन अधिनियम,१९६७ में संशोधन करना पड़ा. यहाँ सवालयह उठता है की क्या वैश्विक मंच पर आतंकवाद का रोनारोने,गृहमंत्री,वित्तमंत्री,मुख्यमंत्री बदल देने और नै जांच एजेन्सीगठित कर देने से क्या आतंकवाद ख़त्म हो जाएगा तो जवाब हमारे पास है नहीं.
सबसे पहले ४०९६ किलोमीटर लंबा भारत-बंलादेश सीमा,३२६८ किलोमीटर लंबाभारत-पाकिस्तान सीमा,भारत-नेपाल सीमा की पुरी तरह बदेबंदी,तथीय इलाके कीसुरक्षा को बाध्य जाए, विदेशी नागरिक पहचान कानून को सख्त बनायाजाए,आंतरिक सुरक्षा को और फुर्तीला और जांच एजेंसियों को और मुस्तैदबनाया जाए जन जागरूकता फैलाई जाए तभी दहशतगर्द रुपी भस्मासुर से निपटा जासकेगा वरना बीएसऍफ़,आईटीबीपी,सीआईएसऍफ़,सीआरपीऍफ़, होमगार्डस,वायुसेना,जलसेना,थलसेना के रहने का कोई मतलब नही रह जाएगा. कबतक हमअमेरिका,ब्रिटेन,फ्रांस के सरपरस्त बने रहेंगे. आख़िर कबतक हम अपना दुखडादुनिया के सामने रोते रहेंगे. इससे चीन, पाकिस्तान,बांग्लादेश प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से हमारे ऊपर लगातार हावी हो रहे हैं और हम चुपचाप सहनकर रहे हैं. अब वक्त आ गया है की हम मुहतोड़ जवाब दें वरना देश कीएकता,अखंडता और विकास की गति को पटरी से उतरने से कोई नही बचा पायेगा. ओमप्रकाश , भोपाल

No comments:

Post a Comment

गूगल बाबा का वरदान - हिन्दी टंकण औजार

अर्थ...अनर्थ....मतलब की बात !

ब्लॉग एक खोज ....