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Monday, March 16, 2009

देख के मज़ा ज़रूर आएगा ....बाबा की राइफल और बापू की लाठी !

कल अभिनेता से अभी अभी नेता बने मुन्ना भाई उर्फ़ संजू बाबा उर्फ़ संजय दत्त ने लखनऊ में बड़ा रंग जमाया। बाबूजी कल होली मिलन समारोह के अतिथि बने और गजब गजब बातें कहीं.....बोले कि समाजवादी पार्टी (नाम के समाजवादी होने पर ना जाएँ, नाम आनंद होने से खुश होने का कोई ताल्लुक नहीं) में इंसानियत की वजह से आया हूँ क्यूंकि पिता सुनील दत्त ने हमेशा इंसानियत का पाठ पढाया (और कांग्रेस से चुनाव लड़े, आपको वो इंसानियत सपा में दिखी, बहना को कांग्रेस में)....अच्छा एक बात और समझ में आई कि केवल सपा ही इंसानों की पार्टी है बाकी तो चिडियाघर !
इसी बीच भीड़ में किसी ने पूछा, "क्यूँ इंसानियत के लिए क्या ऐ के ४७ खरीदनी पड़ती है?" तो एक पक्के वाले सपाई ने पहले घूर कर देखा पर फिर चुनाव का मौका देख कर प्यार से गर्दन पकड़ के समझाया "देखो वो ऐ के ४७ खरीदी नहीं गई थी, वो तो उपहार में मिली थी। सरकार को तो बस जितना टैक्स बनता था लेकर बात ख़त्म करनी थी पर बड़े आदमी को सब बदनाम करना चाहते हैं।" इस पर भी नए वोटर की संतुष्टि जब नहीं हुई तो थोड़ा सा और विनम्रता से गर्दन दबा कर बोला," अबे महर्षि वाल्मीकि भी तो पहले डाकू थे.....देखो कैसी रामायण लिख डाली...मुन्नाभाई जीत कर आए तो रामायण क्या महाभारत....!"
खैर इनकी बातें छोड़ चलें हम सत्ता के मैदानों में, तो मंच से धाराप्रवाह, ओजपूर्ण, भावुक कर देने वाला भाषण जारी था ....."लाल जी टंडन अटल जी की खडाऊ लेकर चुनाव में आए हैं तो हम भी गांधी जी की लाठी लेकर खड़े हैं !" किसी ठेठ लखनउआ ने चुटकी ले ली कि४७ क्या हुई ?" तो बाबा कोप्चे में उसे लेजाकर बोले "वो चुनाव के बाद दिखेगी बेटा!" अच्छा इसके बाद बोले कि लखनऊ में बसपा का शोर्ट सर्किट करने आए हैं तो किसी ने बोल दिया कि बहन जी का सर्किट तो वैसे ही शोर्ट रहता है कहीं इन्होने अर्थिंग दे दी तो कंकाल ना दिख जाए.....खैर संजू बाबा धोखे में बोल तो गए पर ये भूल गए कि उनको तो चुनाव बाद यू पी आना नहीं हैं .....पर मुलायम की अमर कथा का क्या होगा।
अच्छा इसके बाद बोलना शुरू किया तो पूरे फिल्मी रंग में आ गए और बोले कि "बहन जी ने पूरे प्रदेश में अपनी ख़ुद की मूर्तियाँ लगवा दी हैं, वे बुतपरस्त हैं....अरे उखाड़ फेंको इन बुतों को, इन मूर्तियों की कोई जरूरत नहीं है, बहन जी को रखना है तो अपने दिल में रखो.....(अरे रेरे रे रे साला डाइलोग ग़लत जगह बैठ गया......पर कोई बात नही अमर सिंह कौन सा बोलते पर सोचते हैं !) पर मुद्दे की बात ये है कि क्या लखनऊ या देश की जनता एक बार ये साबित करना चाहती है कि अब वो किसी सितारे के नाम पर बेवकूफ नहीं बनेगी....क्या केवल अपने काले कारनामों पर परदा डालने के लिए राजनीति अब और नहीं होने देगी ?
ये सवाल बड़ा है पर मैं ख़ुद इस के जवाब के इंतज़ार में हूँ....मैं ख़ुद लखनऊआ हूँ और देखना चाहता हूँ कि लखनऊ जो मेरी जान से बढ़कर है क्या अपने ज़मीर और दिमाग को साबित कर पायेगा, मेरी लड़ाई किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ नहीं पर जनता के पैसे और विश्वास से अपने पापों को धोने के ख़िलाफ़ है.....खैर मूड को हल्का फुल्का करते हैं, और पह ऐ खिदमत है मेरी एक और कलाकारी जो खाली वक़्त में किया करता हूँ उम्मीद है आपको पसंद आएगी......इसे क्लिक से खोल के डाउनलोड भी किया जा सकता है....



2 comments:

  1. साहब ,आप ने तो बखिया ही उखेड़ दी ,अरे भी अभी नए नए हैं इतना तो कह ही सकते हैं . सीख जायेंगे पिक्चर में कौनसे शुरू से सीखे हुए थे बाद में ही सीखे हैं न भैया !!!

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  2. संजू बाबा कुछ दिनों में मुलामिया और अमरिया का पाठ पढेंगे . हा हा हा

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