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Saturday, March 7, 2009

भ्रूण परीक्षण

साथियों कल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है, इस अवसर पर आज आके लिए प्रस्तुत है छत्तीसगढ़ के प्रसिद्द वरिष्ठ कवि नासिर अहमद सिकंदर की एक कविता भ्रूण परीक्षण .....
भ्रूण परीक्षण
मेरे सामने की बर्थ पर था
उनका परिवार
माँ
और दो बच्चियाँ

बड़ी बच्ची का चेहरा
हुबहू माँ की तरह गोल
चांद सरीखा

छोटी का
बड़ी बहन से मिलता-जुलता
लेकिन दिखने में उससे भी सुन्दर

बड़ी प्यारी हैं बच्चियाँ
मैंने
उनकी माँ से कहा

इस वाक्य पर बिना ध्यान दिए
वह खोई रही मुग्ध
अपने भ्रूण पर
जो निश्चित
लड़का था।
नासिर अहमद सिकंदर

1 comment:

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