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Tuesday, March 31, 2009

चुनावी चित्रकथा.....देखें मज़ा लें !

बहरहाल अब जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने संजू बाबा के चुनाव लड़ने पर रोक लगा ही दी है तो इस पर ज्यादा टीका टिप्पणी नहीं पर इतना ज़रूर कहूँगा किएक लखनवी होने के नाते खुश हूँ......तो आज इसी परिप्रेक्ष्य में देखें हमारी चुनावी चित्र कथा ('अमर' चित्र कथा विवादित हो जायेगा) का अगला अंक.....
मुन्ना सर्किट संवाद
मुन्ना भ्रमित हो जब सर्किट से पूछता है कि क्या वो चुनाव लड़ सकता है और सर्किट चुनाव लड़ने को क्यूँ कह रहा है

कोर्ट की वक्र दृष्टि प्रसंग
प्रचार तो फुल चल रहा है पर कोर्ट क्या करेगा पता नहीं....

कोर्ट का फ़ैसला अदालत ने बाबा को चुनाव लड़ने की इजाज़त नहीं दी, बापू भी खुश हैं !
दरअसल यह पोस्ट की प्रतिष्ठा की हानि के लिए नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की प्रतिष्ठा की हानि के ख़िलाफ़ है। वाकई देश में न्यायपालिका अभी जिंदा है.....सत्यमेव जयते ! बापू वाकई आज खुश होंगे......






3 comments:

  1. माननीय महोदय,
    आज आपके ब्लाग पर आने का अवसर मिला। बहुत ही उपयोगी रचना है आपकी। यदि आप इन्हें प्रकाशित कराना चाहते हैं तो मेरे ब्लग पर अवश्य ही पधारे। आप निराश नहीं होंगे।
    समीक्षा के लिए http://katha-chakra.blogspot.com
    आपके संग्रह/पुस्तक प्रकाशन के लिए http://sucheta-prakashan.blogspot.com
    अखिलेश शुक्ल

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  2. मान गए मयंक जी. शानदार क्रिएटिविटी
    है.

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गूगल बाबा का वरदान - हिन्दी टंकण औजार

अर्थ...अनर्थ....मतलब की बात !

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