एक क्लिक यहां भी...

Monday, March 23, 2009

या तो हम भूल गए हैं या याद रखना नहीं चाहते....

या तो हम भूल गए हैं या याद रखना नहीं चाहते.... एक ऐसा प्रतीक जिसे वामपंथी से लेकर दक्षिणपंथी तक सभी समान रूप से प्रयोग करते आए हैं। एक ऐसा नाम जिसके तरीके से बुजुर्ग भले ही सहमत ना हों पर सम्मान करते रहे और जवान तो खैर उसके दीवाने हैं ही ....बात कर रहा हूँ भगत सिंह की। भगत सिंह जो एक हीरो हैं, आज़ादी के पहले और आज भी लगातार कुचले जा रहे भारतीय जनमानस के ! दरअसल हम जब भी भगत को याद करते हैं तो बस उन्ही को याद करते हैं, शायद इसलिए कि वे अपने पूरे समूह के नीति और योजना निर्माता के तौर पर काम करते थे पर उनके साथ दो और वीरों को फांसी दी गई थी राजगुरु और सुखदेव को, दोनों ही वीर थे अदम्य साहस के धनी।
राजगुरु का पूरा नाम शिवराम हरि राजगुरु था और उनका जन्म पुणे के निकट खेडा नाम के ग्राम में हुआ। राजगुरु सांडर्स हत्याकांड में भगत के साथ शामिल थे और उन्हें बेहतरीन निशानेबाज़ माना जाता था। दूसरा वीर था सुखदेव जिनका जन्म पंजाब में लुधियाना में हुआ था और उन्होंने नौजवानों में क्रांतिकारी साहित्य का प्रसार करने में बड़ी भूमिका निभाई, सुखदेव भगत सिंह के ख़ास दोस्तों में से थे और गांधी जी को लिखे खुले पत्र के कारण बहुत चर्चा में आए।
भगत सिंह आज भी एक हीरो हैं और इसके पीछे के कारण समझना बहुत मुश्किल नहीं है। एक आम भारतीय नागरिक रोज़ देखता है कि मुल्क गाँधी के देखे गए स्वप्न के भारत से दिन पर दिन दूर और दूर जा रहा है, आम आदमी से गाँधी के सिद्धांतों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है जिनके ख़िलाफ़ तो वह वैसे भी नहीं जा सकता है क्यूंकि वह उसकी सामर्थ्य में ही नहीं है....पहले विदेशियों और अब देशियों के हाथों लुटता पिटता आम आदमी भगत सिंह में व्यवस्था के प्रति विद्रोह और आक्रोश देखता है और याद करता है कि भगत सिंह ने कहा था कि गोरे साहब चले जायेंगे तो भूरे साहब राज करेंगे और हो भी यही रहा है।
दरअसल यह स्थिति सरकार या शासकों के भी समझने की चीज़ है कि भगत सिंह आज भी हीरो क्यों हैं जबकि पिछले ६० वर्षों में हमेशा प्रयास यह हुआ कि कांग्रेसी नेताओं को भगत सिंह पर वरीयता दी जाए और एक नायकत्व प्रदान किया जाए फिर भी वे आज नायक बने हुए हैं। आपने देश के कम ही शहरों में भगत, राजगुरु और सुखदेव की मूर्तियाँ देखी होंगी....उनके नाम पर कितने अस्पताल या स्कूल हैं....या उन पर कोई डाक टिकट ही जारी हुआ। विपरीत विचारधारा का सम्मान ना करने की परिपाटी देश में होने की बावजूद भगत सिंह, उनके साथी और उनके विचार आज भी प्रतिष्ठा पूर्ण स्थान लिए हुए हैं तो कारण कहीं ना कहीं आज़ादी मिलने में सफलता मिलने के बाद भी आम आदमी की स्थिति ना बदलना एक बड़ा कारण है।
सरकार या मीडिया भगत सिंह को याद नहीं करती है या करना नहीं चाहती है, उनका नायकत्व नहीं छीन सकती है। आज उनके शहादत दिवस पर भले ही उनको याद नहीं किया गया, भले ही आम आदमी नहीं जानता कि आज ही के दिन वे शहीद हुए थे, उनकी एक नायक की छवि इतने भर से ही धूमिल नहीं होती। पूछ के देखिये सड़क चलते लोगों से शहीद शब्द के साथ लगने वाला नाम और वे झट से भगत सिंह का नाम ले लेंगे। इसका कारण भारत के आम आदमियों के जीवन संघर्ष के मूल में छिपा है क्यूंकि जब तक सर्वहारा, सब कुछ जीत नहीं लेता उसके नायक भगत सिंह रहेंगे ना कि कोई और।

भगत सिंह को आज के समय याद करती अशोक कुमार पाण्डेय की एक कविता,

जिन खेतों में तुमने बोई थी बंदूकें
उनमे उगी हैं नीली पड़ चुकी लाशें

जिन कारखानों में उगता था
तुम्हारी उम्मीद का लाल सूरज
वहां दिन को रोशनी रात के अंधेरों से मिलती है

ज़िन्दगी से ऐसी थी तुम्हारी मोहब्बत
कि कांपी तक नही जबान
सू ऐ दार पर इंक़लाब जिंदाबाद कहते
अभी एक सदी भी नही गुज़री और
ज़िन्दगी हो गयी है इतनी बेमानी
कि पूरी एक पीढी जी रही है ज़हर के सहारे

तुमने देखना चाहा था जिन हाथों में सुर्ख परचम
कुछ करने की नपुंसक सी तुष्टि में
रोज़ भरे जा रहे हैं अख़बारों के पन्ने
तुम जिन्हें दे गए थे एक मुडे हुए पन्ने वाले किताब
सजाकर रख दी है उन्होंने
घर की सबसे खुफिया आलमारी मैं

तुम्हारी तस्वीर ज़रूर निकल आयी है
इस साल जुलूसों में रंग-बिरंगे झंडों के साथ
सब बैचेन हैं तुम्हारी सवाल करती आंखों पर
अपने अपने चश्मे सजाने को तुम्हारी घूरती आँखें
डरती हैं उन्हें और तुम्हारी बातें
गुज़रे ज़माने की लगती हैं

अवतार बनने की होड़ में
तुम्हारी तकरीरों में मनचाहे रंग
रंग-बिरंगे त्यौहारों के इस देश में
तुम्हारा जन्म भी एक उत्सव है

मै किस भीड़ में हो जाऊँ शामिल तु
म्हे कैसे याद करुँ भगत सिंह
जबकि जानता हूँ की तुम्हे याद करना
अपनी आत्मा को केंचुलों से निकल लाना है

कौन सा ख्वाब दूँ मै अपनी बेटी की आंखों में
कौन सी मिट्टी लाकर रख दूँ
उसके सिरहाने
जलियांवाला बाग़ फैलते-फैलते ...
हिन्दुस्तान बन गया है

3 comments:

  1. बहुत सुंदर आलेख ... कविता भी अच्‍छी ... भगत सिंह और उनके साथ अन्य अमर शहीदों को नमन।

    ReplyDelete
  2. thati ko sambhalne, swabhiman ko jagane ka achha prayas......
    thanx mayank ji.

    ReplyDelete
  3. ारे भाई
    हमारी कविता लगाने के लिये आभार

    ReplyDelete

गूगल बाबा का वरदान - हिन्दी टंकण औजार

अर्थ...अनर्थ....मतलब की बात !

ब्लॉग एक खोज ....