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Friday, September 19, 2008

मौसेरे भाई

एक कवि के घर आधी रात एक चोर घुसा
कवि जी जगे थे ,दर्द में पगे थे
यानि कविता करने में लगे थे।
अचानक उनके चेहरे पर आ गया
रौद्र रस का स्थायी भाव
आव देखा न ताव
कुछ समझा न सोचा
चोर को धर दबोचा।
बोले प्रिय भाई तुम ग़लत
जगह पर आ गए हो
लगता है धंधे में नए हो।
अरे अगर चुराना ही है
तो किसी नेता के घर चुराओ
देश की गरीबी मिटाओ।
चोर ने हंसकर दिया जवाब।
जनाब क्या कहते हैं आप
हरगिज़ नहीं करूंगा ऐसा पाप।
लोग बदल गए जमाना बदल गया
लेकिन फिर भी हम अपनी
पुराणी मान्यताओं को मानते हें
अपने मौसेरे भाइयों को
अच्छी तरह पहचानते हैं।
हम भूखों मर सकते हैं
मगर किसी नेता के घर
चोरी नही कर सकते हैं।

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