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Tuesday, September 9, 2008

लालटेन कवि

जैसे कवि को कविता सुनाना एक रोग है
वैसे ही मंच के कवियों पर हमारा यह नया प्रयोग है
यानि की यह कविता है प्रयोगवादी
कवियों के गले मैं फूल मालाओं के स्थान पर
जलती हुई लालटेने लटका दी
श्रोता कवि को हूट करने का नया फार्मूला छोड़ता
लालटेन को गुलेल मारकरजरूर फोड़ता
इसी से प्रेरणा लेकर कुछ कवियों ने
अपने घर से अपनी नेम प्लेट तक हटा दी
और नेम प्लेट की जगह एक लालटेन लटका दी
इसी से प्रेरणा लेकर हमने भी एक लालटेन
अपने दरवाजे पर लटका दी
लटका कर जला दी जलते ही पता नही
किस मनहूस ने आकर बुझा दी
साथ मैंएक पर्ची और चिपका दी
रे कवि प्रयोग वादी तेरा यह लाल्तेनी प्रयोग हमे
बेहद पसंद आया है
सच पूछो तो आज हफ्तों के बाद भी
मिटटी का तेल नही मिल पाया है
ये बात मैं किसी और को नही बताऊँगा
आज का काम तो हो गया
कल फिर आऊँगा

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